पति की अर्थी उठने से पहले पत्नी ने मांगा हिस्सा, तहसील जाकर घर कराया अपने नाम

पति की मौत के बाद जमीनी विवाद इस कदर हावी हो गया कि शव का संस्कार छोड़ परिजनों को तहसील आना पड़ा। पत्नी ने पति की अर्थी उठने से पहले शर्त रख दी कि पहले मकान उसके नाम करवाया जाए। उसके बाद ही संस्कार होगा। बहस के बाद भी जब मामला शांत नहीं हुआ, तो परिजन मृतक बालकिशन की पत्नी के नाम घर करवाने के लिए तहसील पहुंच गए। करीब डेढ़ घंटे तक हंगामे के बीच पत्नी के नाम घर करने के लिए सभी ने हस्ताक्षर कर दिए। इसके बाद संस्कार हुआ। मकान मृतक बालकिशन की बहन के नाम था। पत्नी को आशंका थी कि पति का संस्कार होने के बाद कहीं उसे निकाल न दिया जाए।
गीतिका विहार में पत्नी अपने पति बालकिशन (37) व अन्य परिजनों के साथ रह रही थी। ननद की शादी होने के बाद तो वह चली गई, मकान अभी भी उसके नाम ही था। मंगलवार सुबह अचानक पति की ह्दय गति रूकने से मौत हो गई। पहले तो रिश्तेदारों का इंतजार होने लगा और शव को रखने के लिए फ्रिजर मंगवा लिया गया। ताकि अगले दिन तक शव का सुरक्षित रखा जा सके।
संस्कार की तैयारी करते समय छिड़ा विवाद
मंगलवार सुबह 11 बजे के करीब जब बाल किशन के शव को फ्रिजर से बाहर निकालकर नहलाने की तैयारी चल रही थी। अचानक मृतक की पत्नी व उसके परिजनों ने ससुराल पक्ष के सामने मकान का जिक्र छेड़ दिया। पहले तो संस्कार के बाद हिस्से की बात करने को लेकर टालते रहे। पत्नी के मायके पक्ष ने बाद में कहीं पत्नी को हिस्सा देने से इंकार न कर दें इसी डर से पहले ही मकान नाम करवाने की बात कही। इसी बात से दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हो गई। आखिर में संस्कार की तैयारियों को बीच में रोककर शव को जमीन पर रख दिया। पड़ोसियों के समझाने पर भी मामला शांत होने पर दोनों पक्ष मकान के कागजात तैयार करवाने के लिए तहसील कार्यालय में पहुंचे।
तहसील में दोनों पक्षों के बीच डेढ़ घंटे तक चली बहस
मकान से जुड़े कागजात को पत्नी के नाम करवाने के लिए दोनों पक्ष बिना संस्कार के ही तहसील कार्यालय पहुंच गए। करीब डेढ़ घंटे तक शपथ पत्र के अंदर हस्ताक्षर को लेकर पत्नी के ससुराल व मायके पक्ष में तीखी बहस हुई। तहसील कार्यालय के अंदर घरेलू विवाद को देखकर वकील भी हैरान थे। संस्कार के देरी के कारण कहीं शव सडऩे न लगे इसी बात पर आखिर में पत्नी के नाम ही मकान करवाने में सहमति बनी। तब कहीं जाकर मामला शांत हुआ।
