कभी पाई-पाई को थीं मोहताज, आज हर महीने कमाती हैं दस हजार से ज्यादा

रायपुर। कहते हैं, अगर इरादे मजबूत और ईमानदार मेहनत हो तो सफलता खुद-ब-खुद कदम चूमने लगती है। ग्राम पंचायत मंदिरहसौद की अन्नपूर्णा ग्राम संगठन की महिलाएं आज इसी सूत्र वाक्य के जरिए अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई हैं। कभी पाई-पाई को मोहताज समूह की महिलाएं आज पेवर ब्लॉक व फ्लाई ऐश की ईंटें बनाकर औसतन दस हजार रुपये महीना तक कमा रही हैं। बच्चों को अच्छी शिक्षा दिला रही हैं। उनकी परवरिश से संतुष्ट हैं। खास बात यह कि यह सबकुछ सालभर के भीतर ही हो गया।

राजधानी से करीब 15 किलोमीटर दूर माना एयरपोर्ट के पास नेशनल हाइवे से लगा हुआ है ग्राम पंचायत मंदिरहसौद। अन्नपूर्णा ग्राम संगठन में कुल 345 महिलाएं हैं, जिनमें से 30 महिलाओं का एक समूह स्वतंत्र रूप से पेवर ब्लॉक यूनिट का संचालन करता है। गांव की ओर से जमीन मिली है और रूर्बन योजना के तहत मशीन। वर्तमान में लगी यूनिट से एक बार में चार पेवर ब्लॉक या फ्लाई ऐश की ईंटें तैयार होती हैं। महिलाएं अब बड़ा यूनिट लगाने जा रही हैं, जिससे एक बार में 26 ईंटें तैयार होंगी। यानी आगामी दिनों में उनकी कमाई दोगुना से ज्यादा हो जाएगी।समूह की सचिव प्रतिमा खूंटिया ने बताया कि समूह से ऐसी महिलाओं को जोड़ा गया है, जो आर्थिक रूप से बहुत ही कमजोर थीं। आज उनकी जिंदगी बदल गई है। बैंक से लोन लेकर 19 जून 2018 में छोटी सी यूनिट के साथ काम शुरू किया गया था। आज लोन चुकता हो गया है। सभी महिलाएं ठीक-ठाक कमा रही हैं। इतना ही नहीं, मास्टर ट्रेनर के रूप में अन्य गांव की महिलाओं को सिखाने भी जाती हैं।
प्रतिमा ने बताया कि उनकी बनाई ईंटें व पेवर ब्लॉक का उपयोग सरकारी योजनाओं के तहत हो रहे विकास कार्यों में होता है। छह महीने में ही 65 लाख का वर्क ऑर्डर उन्हें मिल चुका है। वर्तमान में रोजाना 4000 ईंटें व 2000 पेवर ब्लॉक बनाते हैं। बड़ी यूनिट लगते ही उत्पादन और आमदनी दोनों बढ़ जाएगी।
प्रतिमा ने बताया कि समूह की तुलसी साहू के पति बीमार होने के कारण काम करने में असमर्थ हैं। समूह के जरिए आज वे अपना परिवार संभाल रही हैं। समूह का अपना अलग बैंक अकाउंट है। इसमें जमा राशि समूह की जरूरतमंद महिलाओं को एक फीसद ब्याज पर बतौर लोन भी दिया जाता है।
औद्योगिक कचरे के निपटान एवं रिमाड्युलिंग करने के लिए समूह का काम एक मिसाल है। जल्द ही वाइब्रेटिंग पेवर मशीन मिलने वाली है, जिससे प्रोडक्शन बढ़ जाएगा। महिलाओं ने मेहनत से अपनी काबिलियत साबित की है। – श्रृंखला जैन, प्रभारी रूर्बन योजना
 

Leave a Reply