मायावती और अखिलेश सरकार में हुआ किसानों के साथ धोखा, किया 16.56 करोड़ का घोटाला

लखनऊ । एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जनसभा में किसानों की बेहतरी की बात कर रहे हैं। वहीं यूपी में किसानों के साथ धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है। दरअसल, खरीद कर गरीब किसानों को बांटने के लिए मुहैया कराए गए कई क्विंटल बीज की खरीद एवं आपूर्ति केवल कागजों में ही हुई। जिससे साफ होता है कि किसानों को कुछ भी नहीं मिला। दरअसल बीज खरीद की फर्जी रसीद के ऊपर अधिकारियों के हस्ताक्षर या सरकारी मुहर का इस्तेमाल किया गया था। शुरुआती जांच में पता चला है कि इस घोटाले का अधिकतर हिस्सा पूर्व मुख्यमंत्री मायावती और अखिलेश यादव के कार्यकाल के दौरान का है। अभी तक कुल 16.56 करोड़ रुपए की फर्जी रसीदों का हिसाब मिला है, परंतु यह इस बड़े घोटाले का केवल एक अंश है। वही योगी आदित्यनाथ सरकार ने धन के दुरुपयोग के संबंध में आर्थिक अपराध शाखा को जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने उन्हें पता लगाने को कहा कि सिर्फ कानपुर में ही ऐसा हुआ या उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में भी।
कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उमाशंकर पाठक ने बताया कि कानपुर पुलिस में उत्तर बीज एवं वन विकास निगम की जांच के आधार पर पहले ही प्राथमिकी दर्ज की है। यह घोटाला पिछले साल उस समय प्रकाश में आया जब बीज निगम ने भुगतान के लिए अपना बिल कृषि विभाग के बाद भेजा। इस दौरान 99 लाख रुपए का एक फर्जी बिल पाया गया, जिसके बाद घोटाले की विभागीय जांच शुरू की गई। जानकारी के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के कार्यकाल (2007- 2012) और उसके बाद सत्ता में आए अखिलेश यादव के कार्यकाल (2012- 2017) के दौरान 16.16 करोड रुपए के फर्जी पाए गए। बता दें कि मुख्यमंत्री ने पहले ही भ्रष्टाचार का अड्डा बने पशुपालन और चकबंदी विभागों के कई भ्रष्ट अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। साथ ही गोमती रिवर फ्रंट योजना और खनन घोटाले जैसे भ्रष्टाचार से संबंधित अहम मामलों की जांच मुख्यमंत्री ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी है।
