किसानों की आय दोगुनी करने बाजार व्यवस्था में बदलाव जरूरीः मुख्यमंत्री

अहमदाबाद | मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित भारतीय कृषि में बदलाव के लिए गठित मुख्यमंत्रियों की उच्चाधिकार प्राप्त समिति की पहली बैठक में भाग लिया। नीति आयोग ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस को इस उच्चाधिकार प्राप्त समिति का संयोजक बनाया है। वहीं, गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के अलावा उत्तर प्रदेश, अरूणाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक तथा हरियाणा के मुख्यमंत्रियों का भी इसमें समावेश किया गया है। इस समिति की पहली बैठक में कृषि ऋण, सौर ऊर्जा, ग्रामीण कृषि बाजार, इलेक्ट्रॉनिक राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) और माइक्रो इरीगेशन जैसे विषयों पर गहन चर्चाएं की गईं।
चर्चा में भाग लेते हुए मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने देश के किसानों की आय को दोगुनी करने के उद्देश्य को पूरा करने के लिए बाजार व्यवस्था में बदलाव की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि किसानों की आय की गणना करने का मापदंड उसके मुनाफे पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बाजार की भूमिका में बदलाव लाकर किसानों को सीधे ही अधिक फायदा दिया जा सकता है। विजय रूपाणी ने आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 (एसेंशियल कमोडिटिज एक्ट-1955) के संदर्भ में स्पष्ट कहा कि छोटे व्यापारियों, कृषक उत्पाद संघ (एफपीओ) तथा अन्य संस्थाओं द्वारा उत्पादित जिन फसलों के लिए केंद्र सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित करती है, ऐसी वस्तुओं को इस कानून से छूट दी जानी चाहिए। चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने अपने अन्य सुझाव पेश करते हुए ग्रामीण कृषि बाजार को भंडारण सुविधा के साथ जोड़ने की सिफारिश की। इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि यदि किसान बाजार से जुड़े भंडारण की सुविधा का उपयोग करता है तो उसे वेयर हाउस रसीद और क्रेडिट-लोन की सुविधा मुहैया करानी चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर ऐसे भंडार गृह की स्थापना किसान के लिए मददगार हो सकती है। विजय रूपाणी ने कृषि निर्यात प्रोत्साहन के संबंध में सुझाव देते हुए कहा कि कृषि जिंसों (एग्रीकल्चरल कमोडिटीज) में रासायनिक कीटनाशकों के अवशेषों के अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के साथ ही अंतरराष्ट्रीय मांग वाले निश्चित क्षेत्रों को चिन्हित करने में सरकार की भागीदारी अधिक सुदृढ़ होनी जरूरी है। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की एक ऐसी प्रणाली विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया जिसमें आयातकों की आवश्यकता व मांग को समझते हुए किसान अपने उत्पादों की सटीक गुणवत्तायुक्त बिक्री कर सकें।
मुख्यमंत्री ने गुजरात में कृषि निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) का क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित करने का भी सुझाव दिया। उन्होंने जल संसाधनों के कुशल उपयोग के लिए माइक्रो इरीगेशन की हिमायत भी की। रूपाणी ने इस संदर्भ में गुजरात की सूर्यशक्ति किसान योजना (स्काई) का दृष्टांत पेश किया। उन्होंने कहा कि स्काई योजना के अंतर्गत राज्य सरकार किसानों को 60 फीसदी सहायता देती है और 35 फीसदी बैंक ऋण भी दिया जाता है। राज्य में माइक्रो इरीगेशन को प्रोत्साहन के लिए सरकार 85 फीसदी तक सहायता देती है। बैठक में मुख्यमंत्री के साथ मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव के. कैलाशनाथन तथा कृषि विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय प्रसाद भी उपस्थित थे।
