मुश्किल में दो मंत्री, मनीष ग्रोवर के खिलाफ FIR का रास्ता साफ, राव नरबीर को हाईकोर्ट का नोटिस

लोकसभा चुनाव के दिन सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर व कांग्रेस के पूर्व विधायक भारत भूषण बतरा के बीच झड़प के मामले में मंत्री की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस मामले में एडीजे रितु वाईके बहल की अदालत ने बुधवार को पुलिस की अपील खारिज कर दी।जेएमआईसी विवेक सिंह की कोर्ट ने मंत्री के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करने के आदेश दिए थे, जिसे पुलिस ने सेशन कोर्ट में चुनौती दी थी। दोनों पक्षों की बहस के बाद कोर्ट ने पुलिस की अर्जी खारिज कर दी।
लोकसभा चुनाव में मतदान के दिन 12 मई को रोहतक शहर विधानसभा के काठमंडी के बूथ पर सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर और कांग्रेस के पूर्व विधायक भारत भूषण बतरा के बीच बूथ के अंदर जाने को लेकर कहासुनी हो गई थी। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बोहर निवासी रमेश लोहार व उसके साथियों को गिरफ्तार किया था।
रमेश लोहार के खिलाफ पहले भी कई संगीन मामले दर्ज रहे हैं। हालांकि अब वह कई मामलों में बरी हो चुका है और भाजपा के टिकट पर नगर निगम के वार्ड नंबर 9 से चुनाव भी लड़ा था। इतना ही नहीं, उसे मंत्री का करीबी समर्थक माना जाता है। इसी बीच बार के प्रधान लोकेंद्र फौगाट उर्फ जोजो ने जेएमआईसी विवेक सिंह की कोर्ट में अर्जी दाखिल की कि पुलिस ने मामले में सही ढंग से कार्रवाई नहीं की।
उसकी शिकायत पर मामला दर्ज करने की बजाए मनमाने तरीके से कार्रवाई की है। मामले में सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर व रमेश लोहार सहित अन्य के खिलाफ 420, 483, 188, 171सी, 171एफ, 166ए, 511, 506, 34, 120बी, आर्म्स एक्ट और 135 रिप्रजेंटिव एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जाए। जबकि पुलिस ने केवल रमेश लोहार व उसके साथियों के खिलाफ ही कार्रवाई की है। जबकि मंत्री और रमेश लोहार वायरल वीडियो में एक साथ ही थे।
पुलिस की तरफ से अर्जी दी गई कि घटनाक्रम को लेकर पुलिस पहले ही एफआईआर दर्ज कर चुकी है। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने पुलिस को सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत दायर याचिका पर केस दर्ज किया जाए। पुलिस केस दर्ज करने की बजाए 6 जून को निचली कोर्ट के आदेश को सेशन कोर्ट में चुनौती दी। तभी से मामले की सुनवाई चल रही थी। शुक्रवार को दोनों पक्षों की बहस के बाद कोर्ट ने पुलिस की अर्जी खारिज कर दी।
अब आगे क्या
एडीजे कोर्ट में अपील खारिज होने के बाद पुलिस के बाद दो रास्ते ही बचे हैं। जांच अधिकारी हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सकता है। नहीं तो एफआईआर दर्ज करनी पड़ेगी। अगर केस दर्ज हुआ तो मंत्री को मामले में जमानत करानी पड़ सकती है।
जेएमआईसी विवेक सिंह की कोर्ट ने मंत्री व रमेश लोहार सहित अन्य के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए थे, जिसे पुलिस ने सेशन कोर्ट में चुनौती दी थी। एडीजे रितु वाईके बहल की अदालत ने बुधवार को पुलिस की अर्जी खारिज कर दी है। – जितेंद्र हुड्डा, वकील याचिकाकर्ता एवं बार प्रधान लोकेंद्र फौगाट उर्फ जोजो
मंत्री के वकील बोले, मैं बाहर हूं
पूरे मामले में सहकारिता मंत्री के वकील राजेश सहगल से बात की तो उन्होंने कहा कि वे बाहर हैं। अभी अदालत के ऑर्डर की कॉपी नहीं मिली है।
हरियाणा के कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह द्वारा चुनावी हलफनामे में शैक्षणिक योग्यता की झूठी जानकारी देने के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उन्हें नोटिस जारी कर पूछा हैं कि क्यों न उनके खिलाफ आपराधिक मामला चलाया जाए।
गुरुग्राम के आरटीआई कार्यकर्ता हरिंदर ढींगरा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया कि उन्होंने 2017 में मंत्री राव नरबीर की शैक्षणिक योग्यता की जानकारी आरटीआई से मांगी थी।
सूचना नहीं मिलने पर प्रथम अपील दाखिल करनी पड़ी थी। 1 दिसंबर 2018 को उन्हें राव नरबीर के शपथ पत्रों और शैक्षणिक योग्यता की जानकारी मिली। उन्होंने आरोप लगाया है कि राव नरबीर ने झूठे शैक्षणिक पत्र दाखिल किए है। ढींगरा ने बताया कि राव नरवीर ने 2005, 2009 और 2014 के चुनावी हलफनामे में अलग-अलग जानकारी दी है।
2005 में रेवाड़ी के जाटुसाना विधानसभा से चुनाव लड़ने के वक्त दिए हलफनामे में दसवीं 1976 में माध्यमिक शिक्षा परिषद् इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) से की है। 2009 के चुनाव में शपथ पत्र दाखिल कर बताया कि उन्होंने दसवीं बिरला विद्या मंदिर, नैनीताल से की है।
इसके अलावा स्नातक 1986 में हिंदी साहित्य में हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग से होने की बात कही है। जबकि वर्ष 2014 में बादशाहपुर विधानसभा से चुनाव लड़ने के दौरान दिए गए शपथ पत्र में स्नातक वर्ष 1987 बताया है।
याची ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 2010 में एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि हिंदी साहित्य सम्मेलन को विश्वविद्यालय या बोर्ड की मान्यता नहीं है। इससे डिग्री लेकर सरकारी नौकरी लगे लोगों को हटाया जाए। इससे पहले याचिकाकर्ता ने गुड़गांव कोर्ट में भी यह याचिका दायर की थी लेकिन गुड़गांव कोर्ट ने उसकी यह तकनीकी आधार पर याचिका खारिज कर दी थी। अब याची ने हाईकोर्ट में यह याचिका दायर की।
