महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ी हलचल: छगन भुजबल का दिल्ली जाने का प्लान, सुनेत्रा पवार की खाली सीट पर नजर

मुंबई | महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में इस समय राज्यसभा की एक खाली सीट को लेकर सरगर्मी चरम पर है। राज्य के पास राज्यसभा की कुल 19 सीटें हैं, जिनमें से 18 पर सांसद काबिज हैं और केवल एक सीट रिक्त चल रही है। यह रिक्ति राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के इस्तीफे के बाद आई है। इस खाली पद पर काबिज होने के लिए एनसीपी के कद्दावर और वरिष्ठ नेता छगन भुजबल ने अपना पूरा जोर लगा दिया है। हालांकि, पार्टी की ओर से अभी तक इस सीट के उम्मीदवार के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि भुजबल पर्दे के पीछे से अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए सक्रिय रूप से लॉबिंग कर रहे हैं। इसके साथ ही वे अपने भतीजे समीर भुजबल को राज्य मंत्रिमंडल में जगह दिलाने के लिए भी प्रयासरत हैं।
दो साल का कार्यकाल अभी है शेष, मंत्री पद छोड़ संसद जाने की तैयारी
छगन भुजबल महाराष्ट्र की राजनीति में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के एक बेहद प्रभावशाली और कद्दावर चेहरे माने जाते हैं। वे पूर्व में राज्य के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री जैसी बड़ी जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं और 'समता परिषद' के माध्यम से ओबीसी संगठनों पर उनकी मजबूत पकड़ है। सुनेत्रा पवार के इस्तीफे से खाली हुई इस राज्यसभा सीट का कार्यकाल अभी दो साल का बाकी है, यही वजह है कि भुजबल इस मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहते। वर्तमान में वे राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री हैं और नासिक के येवला निर्वाचन क्षेत्र से विधायक हैं। यदि पार्टी उन्हें राज्यसभा भेजने का फैसला करती है, तो उन्हें मंत्री पद और विधायकी दोनों से इस्तीफा देना होगा। चर्चा है कि भुजबल अपने स्थान पर अपने भतीजे और नासिक के पूर्व लोकसभा सांसद समीर भुजबल को राज्य सरकार में मंत्री बनवाना चाहते हैं, जो पूर्व में एनसीपी (अजित पवार) की मुंबई इकाई के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
महाराष्ट्र की उच्च सदन सीटों का समीकरण और एनडीए का भारी पलड़ा
महाराष्ट्र में राज्यसभा की सीटों का मौजूदा गणित पूरी तरह से सत्ताधारी गठबंधन के पक्ष में दिखाई देता है। राज्य की कुल 19 सीटों में से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पास कुल 14 सीटें हैं, जिसमें भारतीय जनता पार्टी के पास 8, एनसीपी के पास 3, शिवसेना (शिंदे गुट) के पास 2 और आरपीआई (आठवले) के पास 1 सीट है। दूसरी ओर, विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) के खाते में केवल 4 सीटें हैं, जिनमें से कांग्रेस के पास 2, जबकि एनसीपी और शिवसेना (UBT) के पास 1-1 सीट है। ऐसे में संख्या बल के हिसाब से एनसीपी के कोटे की इस खाली सीट पर सत्ताधारी दल की जीत पूरी तरह से तय मानी जा रही है, जिससे इस आंतरिक उम्मीदवारी को लेकर खींचतान और अधिक बढ़ गई है।
परिवारवाद के आरोपों पर उठाए सवाल, नई पीढ़ी के नेतृत्व में भुजबल की परीक्षा
छगन भुजबल के समर्थक खेमे ने पार्टी के भीतर भाई-भतीजावाद या परिवारवाद के दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। भुजबल समर्थकों का तर्क है कि जब उपमुख्यमंत्री रहते हुए सुनेत्रा पवार को सांसद बनाया जा सकता है, सुनील तटकरे के सांसद होने के बावजूद उनकी बेटी को राज्य कैबिनेट में जगह मिल सकती है, और पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष खुद उपमुख्यमंत्री हैं जबकि उनके बेटे पार्थ पवार सांसद हैं; तो फिर भुजबल परिवार पर ही परिवारवाद के आरोप क्यों मढ़े जाते हैं? गौरतलब है कि भुजबल ने यह राजनीतिक घेराबंदी ऐसे समय में शुरू की है जब संगठन में अजित पवार के दौर के बाद नई पीढ़ी के हाथों में एनसीपी की कमान है। अब देखना दिलचस्प होगा कि बदली हुई परिस्थितियों में क्या भुजबल अपनी राजनीतिक इच्छा पूरी कराने में सफल हो पाते हैं या नहीं।
