किसानों के प्रदर्शन से रेलवे चक्का जाम: गेहूं की सरकारी खरीद बढ़ाने की मांग, ट्रैक खाली कराने पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी

हनुमानगढ़ | राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीद की अंतिम तारीख बढ़ाने की मांग को लेकर अन्नदाताओं का आक्रोश शनिवार को सातवें आसमान पर पहुंच गया। पिछले दो दिनों से पीलीबंगा उपखंड अधिकारी (SDM) कार्यालय के समक्ष शांतिपूर्ण धरना दे रहे किसानों ने शनिवार को अचानक रेलवे ट्रैक का रुख कर लिया और पटरियों पर बैठकर उग्र प्रदर्शन किया। इस कदम से कुछ समय के लिए बीकानेर-हनुमानगढ़ रेल मार्ग पर यातायात ठप होने जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। हालांकि, मौके पर मुस्तैद पुलिस प्रशासन ने सूझबूझ से ट्रैक को खाली कराया, जिसके बाद जिला प्रशासन और किसान संगठनों के पदाधिकारियों के बीच नए सिरे से बातचीत का दौर शुरू हुआ।
आंधी-बारिश के बीच पटरियों पर डटे रहे अन्नदाता, आला अधिकारियों ने संभाला मोर्चा
शनिवार सुबह लगभग 11 बजे पीलीबंगा में किसानों की एक विशाल महापंचायत शुरू हुई, जिसमें आस-पास के क्षेत्रों से भारी संख्या में काश्तकार शामिल हुए। सभा में मौजूद वक्ताओं के आह्वान पर उद्वेलित किसान अचानक सड़क पार कर बीकानेर-हनुमानगढ़ रेलवे ट्रैक पर जाकर बैठ गए। भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद प्रदर्शनकारी पटरियों से हटने को तैयार नहीं थे। इसी दौरान अचानक मौसम बदला और तेज आंधी के साथ मूसलाधार बारिश शुरू हो गई, लेकिन इसके बाद भी किसान डटे रहे। बाद में पुलिस ने समझाइश और आंशिक बल प्रयोग कर रेलवे ट्रैक को खाली कराया। इसके तुरंत बाद जिला कलेक्टर डॉ. खुशाल यादव, पुलिस अधीक्षक नरेंद्र सिंह मीना और अतिरिक्त जिला कलेक्टर उम्मेदीलाल यादव सहित तमाम आला अधिकारी पीलीबंगा पहुंचे और गतिरोध सुलझाने के लिए किसान प्रतिनिधियों के साथ बैठक की।
बारदाने की भारी किल्लत और 30 जून तक खरीद अवधि बढ़ाने की गूंज
किसान और स्थानीय व्यापारिक संगठन लगातार मांग कर रहे हैं कि गेहूं खरीद की अवधि को आगामी 30 जून तक विस्तारित किया जाए। इससे पूर्व हुई वार्ताओं में प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों को तुरंत 75 हजार बारदाने (बोरे) उपलब्ध कराने का भरोसा दिया था, परंतु किसान नेताओं का स्पष्ट कहना है कि स्थानीय अनाज मंडियों में अभी भी करीब 8 लाख बारदानों की सख्त जरूरत है। किसान प्रतिनिधियों का मानना है कि खरीद की अंतिम तिथि और खरीद का कोटा (लक्ष्य) बढ़ाने का अंतिम फैसला राज्य सरकार के स्तर पर ही संभव है, इसलिए स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी केवल ठोस आश्वासन ही दे सकते हैं। इसी वजह से किसान अब सरकार से सीधे हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहे हैं।
बंपर पैदावार के बावजूद लक्ष्य कम, औने-पौने दाम पर फसल बेचने का सता रहा डर
प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक, हनुमानगढ़ जिले में इस सीजन के लिए कुल 7.52 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य तय किया गया था, जिसमें से लगभग 90 फीसदी सरकारी खरीद पूरी हो चुकी है। इसके उलट धरातल की सच्चाई यह है कि मंडियों में अब भी खुले आसमान के नीचे हजारों क्विंटल गेहूं पड़ा हुआ है। किसानों का आरोप है कि बारदाने की भारी कमी, मंडियों से अनाज के उठाव में ढुलमुल रवैया और ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग में आ रही तकनीकी दिक्कतों के चलते हजारों काश्तकार हताश हैं। इस साल जिले में गेहूं की बुवाई का रकबा करीब 6 प्रतिशत बढ़ा है और फसल का उत्पादन भी पिछले साल के मुकाबले काफी बेहतर रहा है। ऐसे में यदि खरीद की समय-सीमा नहीं बढ़ाई गई, तो किसानों को अपनी खून-पसीने की उपज को खुले बाजार में औने-पौने दामों पर बेचने के लिए विवश होना पड़ेगा।
