दिल्ली में अपराध की बदलती तस्वीर, कम उम्र के अपराधियों पर चौंकाने वाली रिपोर्ट

नई दिल्ली। देश की राजधानी में नाबालिगों द्वारा किए जाने वाले अपराधों का ढर्रा अब पूरी तरह बदल चुका है। कभी छोटी-मोटी चोरियों या जेबकतरी तक सीमित रहने वाले किशोर अब कत्ल, सरेआम गोलीबारी, चाकूबाजी और कुख्यात गैंग संस्कृति का हिस्सा बन रहे हैं, जिसने दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था के सामने एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। हालिया हफ्तों में घटित हुए डरावने घटनाक्रमों ने बुद्धिजीवियों और प्रशासन को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर हमारी नई पीढ़ी में इतनी आक्रामकता और क्रूरता कहाँ से आ रही है।
मामूली कहासुनी में हत्या और सोशल मीडिया पर हथियारों का भौकाल
मयूर विहार फेज-3 में जून 2026 के दौरान महज एक छोटी सी टक्कर के बाद उपजे विवाद में तीन किशोरों ने मिलकर एक 18 साल के लड़के को चाकुओं से गोदकर मौत के घाट उतार दिया। इसी तरह अमर कॉलोनी में एक 16 वर्षीय लड़के ने बारहवीं कक्षा के छात्र के सिर में सरेआम गोली मार दी। उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के आदर्श नगर में तो हद ही हो गई, जहाँ एक नाबालिग ने सिर्फ इसलिए एक मोटरसाइकिल फूंक दी क्योंकि मालिक ने उसे वाहन देने से मना कर दिया था। पुलिस तफ्तीश में यह चौंकाने वाला सच भी सामने आया है कि ये कम उम्र के अपराधी सोशल मीडिया पर कट्टों और चाकुओं के साथ अपनी तस्वीरें पोस्ट कर इलाके में अपना खौफ कायम करना चाहते हैं, यानी अब अपराध को युवाओं द्वारा एक 'स्टेटस सिंबल' की तरह देखा जाने लगा है।
महानगरों में दिल्ली अव्वल और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के डरावने आंकड़े
सरकारी रिपोर्ट 'क्राइम इन इंडिया' के ताजा आंकड़े राजधानी के बेहद स्याह पक्ष को उजागर करते हैं। दिल्ली में बीते वर्ष के दौरान नाबालिगों से जुड़े 2,300 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज किए गए। देश के 19 प्रमुख महानगरों में होने वाले कुल किशोर अपराधों का करीब 46 प्रतिशत हिस्सा अकेले दिल्ली के खाते में आता है। आंकड़ों की मानें तो प्रति एक लाख नाबालिग आबादी पर यहाँ अपराध की दर लगभग 42 मामले है, जो पूरे देश में सबसे ज्यादा है। इसके बाद चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहर आते हैं, जो दिल्ली की तुलना में काफी पीछे हैं।
गंभीर हिंसक वारदातों सहित महिलाओं के खिलाफ अपराधों में बढ़ी हिस्सेदारी
नाबालिगों के मामलों में सबसे ज्यादा डराने वाले आंकड़े मानव शरीर को नुकसान पहुंचाने से जुड़े हैं। बीते वर्ष किशोरों पर हत्या के 144, कत्ल की कोशिश के 210 और अपहरण के 19 संगीन मामले दर्ज हुए। इसके अलावा संपत्ति से जुड़े अपराधों में भी उनकी संलिप्तता बहुत गहरी है, जिसमें स्नैचिंग के 217 और लूटपाट के 195 मामले शामिल हैं। इतना ही नहीं, महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध भी नाबालिगों ने घिनौने अपराध किए हैं, जिसके तहत पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत 132 मामले सामने आए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी स्थिति बिगड़ रही है, जहाँ पकड़े गए कुल अपराधियों में से लगभग 77.7 प्रतिशत की उम्र 16 से 18 साल के बीच है, जो यह साफ इशारा करती है कि किशोरों के बीच अपराध का यह तंत्र अब और अधिक हिंसक, आक्रामक तथा संगठित होता जा रहा है।
