आरपीएससी में दो नए मेंबर नियुक्त, संघ पृष्ठभूमि को लेकर चर्चा तेज

जयपुर। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) में दो नए सदस्यों के आगमन के साथ ही इसके शीर्ष प्रशासनिक ढांचे में बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। राज्य की वर्तमान भाजपा सरकार ने प्रो. संतोष आनंद और डॉ. दीपक कुमार शर्मा को आयोग के नए सदस्य के रूप में जिम्मेदारी सौंपी है। इसके साथ ही, जब तक किसी स्थायी चेयरमैन का चयन नहीं हो जाता, तब तक के लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में नियुक्त किए गए वरिष्ठतम सदस्य लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) केसरी सिंह राठौड़ को आयोग का कार्यवाहक अध्यक्ष मनोनीत किया गया है।
राज्यपाल ने जारी किए आदेश और छह वर्ष का रहेगा कार्यकाल
राजभवन से शुक्रवार की देर रात राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े द्वारा इन नियुक्तियों से जुड़े आधिकारिक आदेश जारी किए गए। स्थापित नियमों के अनुसार, दोनों नवनियुक्त सदस्यों का सेवाकाल अपना पदभार ग्रहण करने की तिथि से आगामी छह वर्ष तक अथवा 62 वर्ष की आयु पूरी होने (जो भी पहले हो) तक मान्य रहेगा। यह प्रशासनिक पुनर्गठन ठीक उस समय हुआ है जब आरपीएससी के निवर्तमान अध्यक्ष उत्कल रंजन साहू का कार्यकाल 19 जून को समाप्त हो गया। साहू को मौजूदा सरकार ने जून 2025 में इस पद पर नियुक्त किया था और अब उनके हटने के बाद वरिष्ठता के क्रम में कमान केसरी सिंह राठौड़ को सौंपी गई है।
शिक्षा जगत और वैचारिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते हैं दोनों नए चेहरे
आयोग के इन नए चेहरों को लेकर प्रदेश के राजनैतिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में काफी चर्चाएं हो रही हैं, क्योंकि दोनों ही नवनियुक्त सदस्य लंबे समय तक शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े रहे हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की वैचारिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते हैं। नए सदस्य डॉ. दीपक कुमार शर्मा हाल ही में कॉलेज शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्राणीशास्त्र (जूलॉजी) के प्रोफेसर पद से सेवानिवृत्त हुए हैं और उच्च शिक्षा में कई प्रशासनिक पदों के साथ-साथ राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ में सक्रिय रहे हैं। वहीं, दूसरी नई सदस्य प्रो. संतोष आनंद वर्तमान में भीलवाड़ा के एमएलवी राजकीय महाविद्यालय में प्राचार्य (प्रिंसिपल) के रूप में कार्यरत हैं और वे पूर्व में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) तथा विद्या भारती जैसे संगठनों में विभिन्न भूमिकाएं निभा चुकी हैं।
स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति पर टिकी नजरें और आगामी परीक्षाओं की चुनौती
आयोग के खाली पदों को भरे जाने के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भजनलाल सरकार द्वारा आरपीएससी के नए स्थायी अध्यक्ष के रूप में किसके नाम पर मुहर लगाई जाती है। माना जा रहा है कि सरकार बहुत जल्द ही इस शीर्ष पद को लेकर भी स्थिति स्पष्ट कर सकती है। इसका मुख्य कारण यह है कि आयोग के पास आने वाले समय में प्रदेश की कई महत्वपूर्ण सरकारी भर्ती परीक्षाओं के आयोजन, उनके परिणाम जारी करने और साक्षात्कार सहित चयन प्रक्रियाओं से जुड़े कई बड़े व संवेदनशील कार्य लंबित पड़े हैं, जिन्हें समयबद्ध तरीके से पूरा करना नए विनियामक ढांचे के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
