Gold Silver Rates Today: सोना-चांदी ने भरी रफ्तार, इन 3 बड़े कारणों से बढ़े दाम

नई दिल्ली: सोने-चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल, रिकॉर्ड निचले स्तर से बाजार में लौटी रौनक
वैश्विक और घरेलू बाजारों में बहुमूल्य धातुओं की कीमतों को एक बार फिर पंख लग गए हैं। बीते 3 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय स्तर के साथ-साथ भारतीय सर्राफा बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में शानदार तेजी दर्ज की गई। पिछले पांच हफ्तों में यह पहला मौका है जब सोने के भाव में इस तरह का बड़ा उछाल देखा गया है। इस पूरे हफ्ते के दौरान सोने की कीमतों में करीब 2.2 फीसदी की मजबूती आई है।
ग्लोबल मार्केट: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमका सोना
वैश्विक बाजार में स्पॉट गोल्ड (हाजिर सोना) 1.3 फीसदी की बड़ी छलांग लगाकर 4,177.31 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। यह 23 जून के बाद से सोने का सबसे उच्चतम स्तर है। वहीं, अगस्त डिलीवरी वाला गोल्ड फ्यूचर्स भी 1.6 फीसदी की तेजी के साथ 4,190.70 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था।
घरेलू बाजार: MCX पर सोने-चांदी में भारी तेजी
अंतरराष्ट्रीय संकेतों का असर भारतीय बाजारों पर भी साफ देखने को मिला। भारत के प्रमुख कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स (MCX) पर गोल्ड फ्यूचर्स 1.40 फीसदी यानी 2,035 रुपये की बढ़त के साथ 1,47,793 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। सिर्फ सोना ही नहीं, बल्कि चांदी में भी जबरदस्त लिवाली रही। सिल्वर फ्यूचर्स 1.76 फीसदी यानी 4,026 रुपये के उछाल के साथ 2,33,262 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रहा था।
क्यों आई अचानक तेजी? ये हैं 3 मुख्य कारण:
1. अमेरिका में कमजोर रोजगार के आंकड़े: सोने की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका से आए आर्थिक आंकड़े हैं। जून महीने में अमेरिका में गैर-कृषि क्षेत्र में उम्मीद से काफी कम (सिर्फ 57,000) नई नौकरियां पैदा हुईं, जबकि जानकारों को 1,10,000 नौकरियों की उम्मीद थी। कमजोर डेटा के चलते अमेरिकी केंद्रीय बैंक (फेडरल रिजर्व) द्वारा ब्याज दरें जल्द बढ़ाने की आशंका कम हो गई है, जिससे निवेशकों का रुझान सोने की तरफ बढ़ा।
2. डॉलर इंडेक्स में गिरावट: इस हफ्ते अमेरिकी डॉलर में कमजोरी देखी गई है। डॉलर के कमजोर होने से दूसरी करेंसी वाले देशों के लिए सोना खरीदना सस्ता हो जाता है, जिससे इसकी मांग और कीमत दोनों बढ़ती हैं।
3. केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की खरीदारी: वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने मई महीने में अपने ऑफिशियल रिजर्व में 41 टन सोने की बढ़ोतरी की है। केंद्रीय बैंकों की इस लगातार खरीदारी ने सोने की कीमतों को मजबूत सपोर्ट दिया है।
रिकॉर्ड ऊंचाई से अब भी काफी नीचे
भले ही बाजार में अभी तेजी का रुख दिख रहा हो, लेकिन सोना अभी भी अपनी रिकॉर्ड ऊंचाई से काफी पीछे है। इस साल जनवरी के अंत में सोने की कीमतें 5,600 डॉलर प्रति औंस के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई थीं, जिसके बाद इसमें करीब 28 फीसदी की बड़ी गिरावट आई। अकेले जून महीने में ही सोने में 14 फीसदी की मंदी देखी गई थी। जानकारों का मानना है कि मध्य-पूर्व (अमेरिका-ईरान) में तनाव कम होने के बाद बाजार में यह स्थिरता और सुधार देखने को मिल रहा है।
