स्कूलों की हकीकत जानने हर महीने अभिभावकों से मिलेंगे अधिकारी, बिहार में नई पहल

पटना:बिहार में सरकारी स्कूलों की सूरत बदलने और पठन-पाठन के स्तर को बेहतर बनाने के लिए शिक्षा विभाग एक अनूठा और बेहद बड़ा कदम उठाने जा रहा है. अब ग्रामीण इलाकों की जमीनी हकीकत जानने के लिए विभाग के शीर्ष अधिकारी सीधे जनता के बीच पहुंचेंगे. इस नई व्यवस्था के तहत विभागीय आलाधिकारियों को हर महीने अपना दफ्तर छोड़कर गांवों का रुख करना होगा, जिससे न सिर्फ प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि सरकारी दावों और वास्तविक धरातल के बीच के अंतर को भी पाटा जा सकेगा. जनशिकायतों के त्वरित निवारण के लिए आयोजित विशेष शिविरों में आए मामलों की गंभीरता को देखते हुए यह नीतिगत फैसला लिया गया है.

महीने में एक दिन गांवों में बिताएंगे आलाधिकारी, अभिभावकों से होगा सीधा संवाद

नई कार्ययोजना के अनुसार, प्रत्येक जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारी और प्रखंड स्तर के जिम्मेदार अधिकारी महीने में एक विशेष दिन पूरी तरह से ग्रामीण क्षेत्रों के लिए समर्पित करेंगे. वे निर्धारित तिथि को पूरे दिन चुनिंदा गांवों में कैंप करेंगे और वहां चौपाल लगाकर स्थानीय लोगों से रूबरू होंगे. इस बैठक में विशेष रूप से उन अभिभावकों को आमंत्रित किया जाएगा जिनके बच्चे सरकारी प्राथमिक, मध्य या उच्च माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं. इस खुली चर्चा का मुख्य उद्देश्य बिना किसी मध्यस्थ के सीधे माता-पिता से यह जानना है कि उनके बच्चों को स्कूल में सही ढंग से पढ़ाया जा रहा है या नहीं.

शिक्षकों की उपस्थिति और पढ़ाई की गुणवत्ता का जमीनी स्तर पर लिया जाएगा फीडबैक

गांवों में लगने वाली इन विशेष चौपालों के दौरान अधिकारी मुख्य रूप से स्कूलों में अध्यापकों की नियमित उपस्थिति, विषयों की समय पर पढ़ाई और शिक्षण की गुणवत्ता जैसे गंभीर मुद्दों पर जनता से राय लेंगे. अभिभावक बिना किसी डर के अधिकारियों को बता सकेंगे कि स्कूल के गुरुजी समय पर आ रहे हैं या नहीं, अथवा किस विषय के शिक्षक की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. इस सीधे संवाद से मिलने वाली जानकारियां पूरी तरह से गोपनीय और निष्पक्ष होंगी, क्योंकि इसमें किसी भी स्थानीय स्कूल प्रबंधन या प्रधानाध्यापक का सीधा हस्तक्षेप नहीं होगा.

फीडबैक के आधार पर तैयार होगी रिपोर्ट, प्रधानाध्यापकों की तय होगी जवाबदेही

अभिभावकों के साथ हुई इस मैराथन बैठक में जो भी शिकायतें या सुझाव सामने आएंगे, उनके आधार पर जिला स्तर पर एक विस्तृत मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार की जाएगी. इस रिपोर्ट को आधार बनाकर संबंधित स्कूलों के प्रधानाचार्यों से कड़ाई से पूछताछ की जाएगी और उन्हें कमियों को दूर करने के लिए कड़े निर्देश दिए जाएंगे. विभाग केवल निर्देश देकर शांत नहीं बैठेगा, बल्कि यह जांचने के लिए कि जमीनी स्तर पर सुधार हुआ है या नहीं, अधिकारियों द्वारा उसी गांव के अभिभावकों से कई चरणों में दोबारा फीडबैक लिया जाएगा ताकि व्यवस्था में सुधार को स्थाई बनाया जा सके.

मुख्यालय स्तर से होगी पूरे अभियान की निगरानी, बुनियादी ढांचे का भी सुधरेगा हाल

इस पूरे महाअभियान की कमान सीधे राज्य मुख्यालय के हाथों में होगी, जहां प्रत्येक जिले से आने वाली प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा की जाएगी. मुख्यालय इस बात का पूरा हिसाब रखेगा कि किस अधिकारी ने कितने गांवों का दौरा किया और वहां छात्र-शिक्षक अनुपात की क्या स्थिति है. पूर्व में आयोजित सहयोग शिविरों में यह बात प्रमुखता से उठी थी कि कई जगहों पर न सिर्फ शिक्षकों का अभाव है, बल्कि स्कूलों के भवन भी जर्जर और असुरक्षित हैं. अब इस नई व्यवस्था से न केवल शैक्षणिक स्तर सुधरेगा, बल्कि स्कूलों की जर्जर इमारतों और बुनियादी सुविधाओं को भी दुरुस्त करने की दिशा में तेजी से काम शुरू हो सकेगा.

Leave a Reply