‘आपका उद्देश्य पूरा हुआ’—सोनम वांगचुक के मुद्दे पर महुआ का तीखा हमला

नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर लद्दाख की मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य लगातार चिंताजनक होता जा रहा है। 28 जून से शुरू हुए उनके इस अनशन के कारण उनके शरीर पर विपरीत असर पड़ा है। 'सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस' (CJP) के अनुसार, भूख हड़ताल के चलते वांगचुक का वजन अब तक 8.2 किलोग्राम कम हो चुका है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनके स्वास्थ्य की चौबीसों घंटे निगरानी कर रही है। सोनम वांगचुक की गिरती सेहत को देखते हुए सामाजिक कार्यकर्ता अभिजीत दीपके और सांसद महुआ मोइत्रा समेत कई प्रमुख हस्तियों ने उनसे अपना अनशन समाप्त करने का विनम्र अनुरोध किया है।
20 जुलाई को संसद मार्च की घोषणा
लद्दाख के अधिकारों की इस लड़ाई को आगे बढ़ाते हुए सीजेपी ने आगामी 20 जुलाई को एक विशाल 'संसद मार्च' का आह्वान किया है। आंदोलन से जुड़े रणनीतिकारों का मानना है कि यह मार्च प्रदर्शन का सबसे निर्णायक और ऐतिहासिक चरण साबित होने वाला है। इस विरोध प्रदर्शन के जरिए लद्दाख को विशेष संवैधानिक सुरक्षा देने की मांग को और पुरजोर तरीके से केंद्र सरकार के समक्ष रखा जाएगा।
मानसून सत्र के साथ बढ़ेगा टकराव?
संयोग से जिस दिन प्रदर्शनकारियों ने संसद घेराव का फैसला किया है, ठीक उसी दिन यानी 20 जुलाई से ही संसद का मानसून सत्र भी आरंभ होने जा रहा है। ऐसे में दिल्ली में राजनीतिक और सामाजिक हलचल बेहद तेज होने की उम्मीद है। अब पूरे देश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार मानसून सत्र की शुरुआत से पहले प्रदर्शनकारियों से बातचीत की मेज पर आती है, या फिर यह आंदोलन आने वाले दिनों में और अधिक उग्र रूप अख्तियार करेगा।
