बच्चों की सेहत पर फोकस, मध्यान्ह भोजन बनाने वाले 234 रसोइयों को मिला विशेष प्रशिक्षण

बतौली: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिला अंतर्गत बतौली विकासखंड में प्रधानमंत्री पोषण शक्ति योजना को अधिक प्रभावी और सुरक्षित बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। क्षेत्र के शासकीय विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन (मिड-डे मील) तैयार करने वाले 234 रसोइयों को भोजन की उत्तम गुणवत्ता, व्यक्तिगत स्वच्छता और पोषण मूल्य बनाए रखने के तौर-तरीकों से अवगत कराने के लिए एक विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। बीआरसी भवन के मुख्य सभागार में आयोजित इस एक दिवसीय कार्यशाला में प्रशासनिक अधिकारियों ने दोटूक शब्दों में कहा कि स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ या भोजन पकाने में किसी भी प्रकार की लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और तय नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।
ईंधन प्रबंधन: बड़े स्कूलों में लकड़ी-कोयले की जगह एलपीजी सिलेंडर के इस्तेमाल पर जोर
इस प्रशिक्षण सत्र के दौरान विकासखंड शिक्षा अधिकारी शरदचंद्र मेस्पाल और विकासखंड परियोजना अधिकारी उमेश गुप्ता ने उपस्थित रसोइयों को सुरक्षित एवं पूरी तरह से स्वच्छ वातावरण में भोजन पकाने के कड़े निर्देश दिए। अधिकारियों ने विशेष रूप से यह सुझाव दिया कि जिन प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं में दर्ज विद्यार्थियों की संख्या काफी अधिक है, वहां पारंपरिक चूल्हों के बजाय अनिवार्य रूप से एलपीजी (LPG) गैस सिलेंडरों के उपयोग को प्राथमिकता दी जाए। इससे न केवल रसोईघर धुआं मुक्त रहेगा, बल्कि कम समय में बेहतर गुणवत्ता और शुद्धता के साथ बच्चों के लिए भोजन तैयार हो सकेगा।
जीरो टॉलरेंस पॉलिसी: स्वच्छता के मानकों से नहीं होगा कोई समझौता
कार्यशाला में मौजूद ट्रेनर्स ने रसोइयों को खुद की साफ-सफाई के साथ-साथ पूरे रसोईघर (किचन शेड) को कीटाणुमुक्त रखने के व्यावहारिक तरीके सिखाए। अधिकारियों ने साफ कहा कि भोजन बनाने की शुरुआत करने से पहले सभी बर्तनों को उबले या साफ पानी से धोना, मसालों व राशन सामग्री को एयरटाइट डिब्बों में सुरक्षित रखना और खाना पकाने से पहले प्रत्येक खाद्य सामग्री की अच्छे से जांच करना बेहद जरूरी है। विभाग ने स्पष्ट किया कि स्वच्छता के निर्धारित पैमानों पर किसी भी स्तर पर ढिलाई मिलने पर तत्काल अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएंगे।
अनुशासन और सत्कार: बच्चों को बेंच या टाटपट्टी पर बैठाकर गर्म भोजन परोसने के निर्देश
प्रशिक्षण के दौरान रसोइयों को सख्त हिदायत दी गई कि वे बच्चों को बासी या ठंडा भोजन किसी भी परिस्थिति में न परोसें। हर दिन बच्चों को पूरी तरह ताजा, गर्म और पौष्टिक आहार ही मिलना चाहिए। भोजन वितरण प्रणाली को सुचारू बनाने के लिए यह निर्देशित किया गया कि मध्यान्ह भोजन के समय सभी छात्र-छात्राओं को टाटपट्टी या बेंचों पर कतारबद्ध और व्यवस्थित तरीके से सम्मानपूर्वक बैठाया जाए। इससे स्कूलों में न केवल स्वच्छता बनी रहेगी, बल्कि बच्चों में सामाजिक अनुशासन की भावना भी विकसित होगी।
सरकारी मीनू का पालन अनिवार्य, फोर्टीफाइड चावल और मौसमी सब्जियों को लेकर विशेष गाइडलाइन
स्कूलों में कार्यरत कुक (रसोइयों) को शासन द्वारा निर्धारित साप्ताहिक मीनू के चार्ट के अनुसार ही प्रतिदिन अलग-अलग भोजन तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इस दौरान प्रशिक्षण में शामिल मास्टर ट्रेनर लव गुप्ता ने रसोइयों को सरकारी कोटे से मिलने वाले फोर्टीफाइड चावल की पौष्टिकता, उसकी सफाई और उसे पकाने की सही वैज्ञानिक विधि के बारे में विस्तार से समझाया। इसके साथ ही, हरी सब्जियों को काटने से पहले अच्छी तरह धोने तथा वर्तमान में बदलते मौसम व बरसात के दिनों को ध्यान में रखते हुए भोजन में सोयाबीन बड़ी का उपयोग न करने की विशेष सलाह दी गई है।
कड़े एक्शन की चेतावनी: गड़बड़ी मिलने पर सीधे तौर पर नपेंगे जिम्मेदार
कार्यक्रम के समापन पर प्रशासनिक अधिकारियों ने एक बार फिर दोहराया कि बच्चों को मिलने वाले पोषण आहार की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर प्रशासन पूरी तरह गंभीर है। यदि किसी भी स्कूल के औचक निरीक्षण के दौरान मध्यान्ह भोजन के स्वाद, गुणवत्ता या किचन की सफाई में कोई बड़ी खामी पाई जाती है, तो संबंधित स्व-सहायता समूह और रसोइयों के खिलाफ सीधे नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रशिक्षण में सभी उपस्थित रसोइयों को बच्चों के स्वास्थ्य सुरक्षा की शपथ भी दिलाई गई।
