अमृत महोत्सव में विधानसभा का भव्य आयोजन, दिग्गज नेताओं ने साझा किया मंच

जयपुर। राजस्थान विधानसभा की गौरवशाली लोकतांत्रिक यात्रा के 75वें वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित अमृत महोत्सव का बुधवार को एक भव्य और ऐतिहासिक शुभारंभ हुआ। इस खास मौके पर प्रदेश के वर्तमान और पूर्व विधायकों का एक अभूतपूर्व समागम देखने को मिला, जहां सभी ने एक मंच पर आकर प्रदेश की विधायी यात्रा और समृद्ध संसदीय परंपराओं को याद किया। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के नेतृत्व में आयोजित इस गरिमामयी समारोह ने राजस्थान के विधायी इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है।
देश और प्रदेश की शीर्ष हस्तियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस ऐतिहासिक समारोह का औपचारिक उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा किया गया। इस भव्य आयोजन के दौरान मंच पर राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और राष्ट्रमंडल संसदीय संघ के सचिव संदीप शर्मा सहित लोकतंत्र के कई स्तंभ और गणमान्य अतिथि एक साथ मौजूद रहे। इस बहुप्रतीक्षित महोत्सव के समापन सत्र को और अधिक विशेष बनाने के लिए उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर जनप्रतिनिधियों को संबोधित करेंगे।
वरिष्ठ पूर्व विधायकों के सम्मान में अनूठी पहल और अभूतपूर्व स्वागत
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने इस अवसर पर कहा कि राजस्थान विधानसभा के यह 75 वर्ष जनभागीदारी, उच्च लोकतांत्रिक मूल्यों और मजबूत संवैधानिक परंपराओं के जीवंत प्रतीक हैं। उन्होंने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि देश की पहली विधानसभा के रूप में राजस्थान ने इस अमृत महोत्सव के जरिए पूर्व जनप्रतिनिधियों को सम्मानित करने की एक बेहद सराहनीय परंपरा की नींव रखी है। प्रदेश के कोने-कोने से जयपुर पहुंचे वरिष्ठ एवं वयोवृद्ध पूर्व विधायकों के आतिथ्य, आवास, सुगम आवागमन और स्वास्थ्य की देखभाल के लिए सचिवालय द्वारा चाक-चौबंद प्रबंध किए गए, जबकि पूरे जयपुर शहर और विधानसभा भवन को इस उत्सव के लिए आकर्षक रोशनी और होर्डिंग्स से सजाया गया।
महत्वपूर्ण विधायी कानूनों पर मंथन और लोकतांत्रिक विरासत का हस्तांतरण
अमृत महोत्सव के अंतर्गत आयोजित किए गए दो विशेष वैचारिक सत्रों में राजस्थान विधानसभा के 75 वर्षों के लंबे सफर के दौरान पारित किए गए 24 अत्यंत महत्वपूर्ण और युगांतकारी कानूनों पर बेहद विस्तृत चर्चा की गई। इन सत्रों में सदन के 16 वर्तमान और पूर्व अनुभवी विधायकों ने अपने दीर्घकालिक विधायी अनुभवों, बदलती विधायी भूमिकाओं और संसदीय मूल्यों पर गहराई से प्रकाश डाला। विधानसभा सचिवालय के अनुसार, इस भव्य समागम का मुख्य उद्देश्य केवल एक औपचारिक उत्सव मनाना नहीं है, बल्कि राजस्थान की समृद्ध लोकतांत्रिक विरासत और संसदीय मर्यादाओं को आने वाली नई पीढ़ी तक पूरी प्रामाणिकता के साथ पहुंचाना है।
