सोनम वांगचुक को पुलिस ने उठाया, संसद मार्च से पहले प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई

नई दिल्ली: देश की राजधानी के जंतर-मंतर पर पिछले तीन हफ्तों से भूख हड़ताल पर बैठे विख्यात शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के खिलाफ हुई प्रशासनिक कार्रवाई पर सियासी घमासान तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने पुलिस बल द्वारा आंदोलनकारी को धरना स्थल से उठाकर जबरन अस्पताल में दाखिल कराने की प्रक्रिया की तीखी भर्चना की है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह ने इस कार्रवाई को पूरी तरह दमनकारी बताते हुए आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष आगामी 20 जुलाई को होने वाले शांतिपूर्ण 'संसद मार्च' की व्यापकता से घबरा गया है, जिसके कारण इस जन आंदोलन को बलपूर्वक कुचलने का प्रयास किया जा रहा है।
करोड़ों युवाओं के भविष्य और पेपर लीक का मुद्दा
सांसद संजय सिंह ने आंदोलन की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि 59 वर्षीय सोनम वांगचुक अपनी जान की परवाह न करते हुए पिछले 21 दिनों से लगातार आमरण अनशन पर थे। वे देश के उन करोड़ों बेबस नौजवानों की बुलंद आवाज बने हुए थे, जिनका भविष्य विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के दर्जनों पेपर लीक मामलों के कारण पूरी तरह अंधकारमय हो चुका है। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि इतने लंबे समय तक चले इस अनशन के बावजूद शीर्ष नेतृत्व या सरकार के किसी भी प्रतिनिधि ने प्रदर्शनकारियों से सुध लेना या उनके पास जाकर वार्ता की पहल करना उचित नहीं समझा, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
तड़के हुई पुलिसिया कार्रवाई और लाठीचार्ज का आरोप
प्रदर्शन स्थल पर सुबह हुए घटनाक्रम की निंदा करते हुए आम आदमी पार्टी के नेता ने कहा कि अचानक भारी पुलिस बल ने जंतर-मंतर को चारों तरफ से घेर लिया और वहां मौजूद शांतिप्रिय नौजवानों पर लाठियां भांजीं। इस अफरा-तफरी के बीच सोनम वांगचुक को जबरन उठाकर अस्पताल पहुंचा दिया गया, ताकि 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद कूच को रोका जा सके। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस आंदोलन को दबाने के उद्देश्य से ही प्रशासनिक फेरबदल किए गए हैं और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार आंदोलन से जुड़े अन्य प्रमुख सहयोगियों जैसे अभिजीत दिपके को भी हिरासत में ले लिया गया है।
सत्ता के अहंकार और दमनकारी नीतियों पर तीखा प्रहार
राजनीतिक नेतृत्व पर सीधा निशाना साधते हुए संजय सिंह ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर जायज मांग और शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर लाठियां चलाना, आंसू गैस के गोले छोड़ना या गिरफ्तारियां करना सही राजनीति का हिस्सा नहीं हो सकता। उन्होंने पूर्व के आंदोलनों का स्मरण कराते हुए कहा कि कभी किसानों की आवाज को दबाया गया, तो कभी माताओं-बहनों और नौजवानों के प्रदर्शनों को कुचलने का प्रयास किया गया। उन्होंने सचेत करते हुए कहा कि सत्ता का ऐसा अत्यधिक अहंकार लोकतंत्र के हित में नहीं है और इतिहास गवाह है कि जब-जब युवाओं पर दमन चक्र चला है, तब-तब व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है।
देशव्यापी समर्थन और युवाओं से आंदोलन जारी रखने की अपील
बयान के अंतिम हिस्से में उन्होंने देश के समस्त युवाओं, छात्रों और आम नागरिकों से इस मुहिम को कमजोर न पड़ने देने की पुरजोर अपील की। उन्होंने कहा कि आगामी 20 जुलाई को संसद का सत्र शुरू होने के साथ ही देश की जनता, युवाओं और विभिन्न विपक्षी दलों के सांसदों का समर्थन इस मार्च को मिलने वाला था, जिससे घबराकर यह प्रशासनिक कदम उठाया गया है। उन्होंने आह्वान किया कि देश के युवाओं को एकजुट होकर सोनम वांगचुक के इस संघर्ष का पुरजोर साथ देना चाहिए ताकि भविष्य में परीक्षाओं की शुचिता बनी रहे और युवाओं के अधिकारों की रक्षा की जा सके।
