मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव, इराक के इरबिल पर ड्रोन अटैक; कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यदि रूस संघर्ष के दौरान ईरान की मदद भी कर रहा है, तो उससे जमीनी हालात पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस मसले पर सीधे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत करेंगे।
ईरान को खुफिया जानकारी देने का आरोप
यह पूरा मामला यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के उस दावे के बाद गरमाया, जिसमें उन्होंने कहा था कि रूस अमेरिकी व खाड़ी देशों के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए ईरान को सैटेलाइट डेटा उपलब्ध करा रहा है। इसके अलावा जेलेंस्की ने यह भी दावा किया कि रूस अपनी सैन्य क्षमता मजबूत करने के लिए उत्तर कोरिया से 30 हजार सैनिक बुलाने की तैयारी में है।
ट्रंप का दावा—बेअसर साबित हुई मदद
विमान में पत्रकारों से चर्चा करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से ईरान को भारी नुकसान हुआ है। ट्रंप के मुताबिक, ईरान की थलसेना, वायुसेना और नौसेना पूरी तरह से पस्त हो चुकी है, जिसके चलते रूस से मिली किसी भी संभावित मदद का उसे कोई फायदा नहीं मिल पाया।
सऊदी-हूती विवाद और अमेरिका का रुख
सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच जारी जंग पर ट्रंप ने कहा कि अमेरिका फिलहाल इसमें सीधे शामिल नहीं है। हालांकि, असैन्य परमाणु समझौते को लेकर सऊदी अरब से बातचीत जारी है और जरूरत पड़ने पर अमेरिका आगे हस्तक्षेप कर सकता है। दूसरी ओर, हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच एक-दूसरे के हवाई हमलों और ड्रोन को मार गिराने के दावों को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है।
