GIS से पहले MP में बड़ा डिजिटल बदलाव, G2B सेवाएं होंगी पूरी तरह पेपरलेस

भोपाल। जनवरी 2027 में भोपाल में आयोजित होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) से ठीक पहले मध्य प्रदेश सरकार ने निवेश प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत गवर्नमेंट टू बिजनेस (G2B) सेवाओं को 100 प्रतिशत पेपरलेस करने का एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग ने इस पर तेजी से काम शुरू कर दिया है और इस प्रस्ताव को 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (Ease of Doing Business) एक्ट के अंतर्गत शासन को भेज दिया गया है। इस पूरी पहल का मुख्य उद्देश्य निवेशकों के लिए कागजी कार्रवाई को न्यूनतम करना और निवेश प्रस्तावों की रियल टाइम मॉनिटरिंग (रियल टाइम निगरानी) की एक मजबूत व्यवस्था विकसित करना है।
डिजिटल डैशबोर्ड से मिलेगी हर जानकारी
इस प्रस्तावित आधुनिक डिजिटल व्यवस्था के लागू होने के बाद निवेशकों को अपने प्रोजेक्ट की प्रगति (Progress) जानने के लिए अलग-अलग सरकारी विभागों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निवेशकों को निम्नलिखित सुविधाएं मिलने की उम्मीद है:
आवेदन किस विभाग में लंबित (Pending) है।
कौन-कौन सी मंजूरियां (Approvals) मिल चुकी हैं।
कौन सी प्रक्रियाएं अभी बाकी हैं।
सरकार का मानना है कि प्रक्रियाओं के डिजिटल होने से प्रशासनिक कार्यों में मानवीय हस्तक्षेप कम होगा, जिससे फाइलों के निपटारे में पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार की गुंजाइश न के बराबर रह जाएगी। इसके अलावा, विभिन्न विभागों के बीच फाइलों के आने-जाने में लगने वाले समय में भी भारी कमी आएगी।
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 से पहले सिस्टम अपग्रेड
जनवरी 2027 में होने वाली जीआईएस (GIS) से पहले 'डिजिटल इन्वेस्टमेंट ट्रैकिंग सिस्टम' को और अधिक सुगम व आधुनिक बनाया जा रहा है। सरकार का पूरा फोकस एक ऐसे एकीकृत सिस्टम को तैयार करने पर है, जिसमें निवेशक अपने निवेश प्रस्ताव की शुरुआत से लेकर अंतिम स्वीकृति मिलने तक की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन ट्रैक कर सकें। इस व्यवस्था के लागू होने से कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता घटेगी और निवेशकों को मध्य प्रदेश में उद्योग स्थापित करने के लिए बेहद अनुकूल व पारदर्शी माहौल मिल सकेगा।
