E20 पेट्रोल पर विवाद गहराया, जयराम रमेश ने उठाई मैकेनिकों और वाहन मालिकों की चिंता

नई दिल्ली| देश भर में E20 पेट्रोल (यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित ईंधन) की बिक्री और उसके दुष्प्रभावों को लेकर राजनीतिक गलियारों में भारी सरगर्मी और सियासत तेज हो गई है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस नीति को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी का सीधा आरोप है कि बिना किसी पुख्ता और ठोस डाटा के यह ईंधन देश की आम जनता और वाहन चालकों पर जबरन थोपा जा रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ महासचिव जयराम रमेश ने हाल ही में आरोप लगाया कि केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी द्वारा संसद में दिए गए जवाब से जनता का भ्रम दूर होने के बजाय कई नए और गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सरकार भले ही यह दावा कर रही है कि E20 पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि देश का आम उपभोक्ता और मैकेनिक दोनों ही इस ईंधन से खासे परेशान और बेबस नजर आ रहे हैं।

जयराम रमेश ने सरकार की नीतियों पर उठाए गंभीर सवाल

जयराम रमेश ने अपने बयान में आगे कहा कि जून 2026 में वर्ष 2023 से पहले के 44,000 वाहन चालकों को लेकर किए गए एक स्वतंत्र सर्वे में यह बात सामने आई थी कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ियों के इंजन और पुर्जों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। इससे पहले सितंबर 2025 में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने इंजन खराब होने से जुड़ी शिकायतों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें 'बकवास' करार दिया था।

कांग्रेस नेता ने आंकड़े रखते हुए कहा कि नीति आयोग की वर्ष 2021 की रिपोर्ट खुद इस बात को स्वीकार करती है कि E20 ईंधन के प्रयोग से पुराने E10 क्षमता वाले वाहनों के रबर के पुर्जों को तेजी से नुकसान पहुंचता है। इसके अलावा, जुलाई 2026 की ARAI (ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया) की रिपोर्ट के मुताबिक, E20 के इस्तेमाल से वाहनों के फ्यूल टैंक और धातु से बने अंदरूनी हिस्सों में जंग (Rust) लगने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है। इसके प्रयोग से पुरानी चार पहिया गाड़ियों (4-Wheelers) का माइलेज 6 से 7 प्रतिशत, दो पहिया गाड़ियों (2-Wheelers) का माइलेज 3 से 4 प्रतिशत और यहां तक कि E20-कंपैटिबल नई गाड़ियों का माइलेज भी 1 से 2 प्रतिशत तक कम हो जाता है।

क्या E20 पेट्रोल से सचमुच खराब हो रहे हैं वाहन?

जयराम रमेश के अनुसार, पिछले कई महीनों से देश के कोने-कोने से वाहन चालक और ऑटोमोबाइल मैकेनिक E20 पेट्रोल को लेकर लगातार गंभीर शिकायतें दर्ज करा रहे हैं, जिनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित समस्याएं शामिल हैं:

  • माइलेज में भारी गिरावट: गाड़ियों के ईंधन औसत (Mileage) में लगातार उल्लेखनीय कमी दर्ज की जा रही है।

  • इंजन पर प्रतिकूल असर: इंजन के समग्र प्रदर्शन में गिरावट, सर्दियों के मौसम में 'कोल्ड-स्टार्ट' की समस्या और समय से पहले इंजन के घिसने की शिकायतें बढ़ रही हैं।

  • पुर्जों को नुकसान: वर्ष 2023 से पहले निर्मित गाड़ियों में फ्यूल इंजेक्टर जाम हो रहे हैं, फ्यूल पाइप में जंग लग रही है और रबर सील, होज पाइप तथा गास्केट तेजी से गल रहे हैं।

  • विकल्प का अभाव: देश के आम उपभोक्ताओं के सामने सबसे बड़ी विवशता यह है कि उनके पास सामान्य ईंधन के बजाय अनिवार्य रूप से E20 खरीदने के अलावा कोई दूसरा विकल्प ही नहीं बचा है।

क्या जनता के आक्रोश के आगे जवाबदेह होगी सरकार?

कांग्रेस पार्टी का कहना है कि सरकार के अपने ही आधिकारिक दस्तावेज E20 ईंधन से वाहनों को होने वाले नुकसान की पुष्टि करते हैं, इसके बावजूद सरकार सच्चाई पर पर्दा डालने का प्रयास कर रही है। विभिन्न परीक्षण रिपोर्टों (Test Reports) में यात्री वाहनों के इंजन के फेल होने तक की बातें सामने आई हैं। देश भर में आम जनता का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है और लोग इस नीति पर सरकार से स्पष्ट जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

Leave a Reply