मध्य प्रदेश में 1050 पटवारियों के प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू, कलेक्टरों को आदेश

भोपाल। मध्यप्रदेश से एक बहुत बड़ी प्रशासनिक खबर सामने आ रही है। राज्य के अंतर्गत 'स्वामित्व योजना' के तहत मुफ्त रजिस्ट्री के कार्य में आनाकानी और विरोध जता रहे पटवारियों की मांगों को आखिरकार शासन द्वारा मान लिया गया है। इसके साथ ही, राजस्व विभाग ने पटवारियों को राजस्व निरीक्षक (RI) के पद पर पदोन्नति (प्रमोशन) देने की प्रक्रिया का भी औपचारिक रूप से श्रीगणेश कर दिया है। इस संबंध में कमिश्नर कार्यालय द्वारा प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टरों से पटवारियों की सेवा से जुड़ी संपूर्ण जानकारी तलब की गई है, और विभाग की ओर से लगभग 1,050 पटवारियों की एक सूची भी जारी कर दी गई है।
30 सितंबर तक अनिवार्य रूप से मांगी गई रिपोर्ट
प्राप्त विवरण के अनुसार, राजस्व विभाग ने सभी संबंधित जिला कलेक्टरों को यह निर्देश दिया है कि वे निर्धारित समयावधि के भीतर पटवारियों का संपूर्ण विवरण उपलब्ध कराएं। कलेक्टरों के माध्यम से संबंधित तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों के जरिए यह डेटा मांगा गया है। हालांकि मध्यप्रदेश की स्वामित्व योजना में पटवारियों को रजिस्ट्रीकर्ता की आधिकारिक जिम्मेदारी सौंपी गई थी, परंतु इस व्यवस्था को लेकर मैदानी स्तर पर पटवारियों में असंतोष व्याप्त था।
क्यों नाराज चल रहे थे पटवारी?
विभागीय सूत्रों के अनुसार, पटवारी इस योजना के क्रियान्वयन से इसलिए संतुष्ट नहीं थे क्योंकि उनके तर्कों के मुताबिक भूमि का स्वामित्व तय होना मूल रूप से लाभार्थी और शासन के बीच की एक दस्तावेजी प्रक्रिया का विषय है। ऐसी स्थिति में पटवारी को सीधे तौर पर 'र रजिस्ट्रीकर्ता' यानी निष्पादक (एग्जीक्यूटर) बनाकर भविष्य की व्यक्तिगत कानूनी जवाबदेही तय करना पूरी तरह से उचित नहीं है। यदि भविष्य में किसी व्यक्ति द्वारा संपत्ति के स्वामित्व या अभिलेखों को चुनौती दी जाती है, तो निष्पादक के रूप में आधिकारिक तौर पर दर्ज रहने वाले पटवारी को भी अनावश्यक रूप से कानूनी उलझनों और अदालती प्रक्रियाओं में घसीटा जा सकता है, जिससे कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना थी।
जून 2007 या उससे पुराने संवर्ग के कर्मियों को मिलेगा लाभ
यह पदोन्नति प्रक्रिया 'मध्य प्रदेश भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त तृतीय श्रेणी अराजपत्रित सेवा भर्ती नियम 2012' में 18 जून 2018 को किए गए संशोधनों के आधार पर पूरी की जाएगी। इसके विहित प्रावधानों के अंतर्गत आने वाले और 1 जनवरी 2026 को 50 वर्ष से कम आयु वाले पटवारियों की एक विशेष सूची तैयार की गई है। इसके अतिरिक्त, विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों को यह भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन पटवारियों के संवर्ग में सीधी नियुक्ति जून 2007 या उससे पूर्व की है, उनके नामों को भी अनिवार्य रूप से इस पात्रता सूची में शामिल किया जाए ताकि वरिष्ठता के आधार पर न्यायसंगत प्रमोशन मिल सके।
