आतंकी हमले के पीड़ितों को लेकर सियासत, कांग्रेस बोली- सरकार ने नहीं निभाई जिम्मेदारी

रायपुर| छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में हुए एक कायराना आतंकी हमले में मारे गए छत्तीसगढ़ के दो गरीब मजदूरों के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक जिलों तक न पहुंचाए जाने को लेकर राज्य की मौजूदा भाजपा सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। कांग्रेस ने कड़े शब्दों में सवाल उठाते हुए कहा है कि आतंकी हमले में जान गंवाने वाले छत्तीसगढ़ के इन मजदूरों के शवों को उनके गृह राज्य न लाना और उनका वहीं स्थानीय स्तर पर अंतिम संस्कार करवा देना इस सरकार की घोर असंवेदनशीलता और लापरवाही को उजागर करता है।

कांग्रेस पार्टी ने राज्य सरकार पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ तो तथाकथित 'डबल इंजन' की सरकार हमारे गरीब मजदूरों को बाहर सुरक्षा प्रदान करने में पूरी तरह नाकाम रही, और दूसरी तरफ उनकी निर्मम हत्या के बाद उनके अंतिम संस्कार और सम्मान के लिए उनके शवों तक को उनके परिजनों तक नहीं पहुंचाया गया। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि इस सरकार की नजर में आम मजदूरों की जान की कोई कीमत नहीं है।

'मृतक मजदूरों के परिजनों को मिले एक करोड़ रुपये का मुआवजा' — दीपक बैज

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि कुलगाम में आतंकवादियों ने छत्तीसगढ़ के दो मासूम मजदूरों की गोली मारकर हत्या कर दी थी, जिनमें से एक मजदूर सारंगढ़ जिले का और दूसरा सक्ति जिले का रहने वाला था। सरकार इतनी संवेदनहीन साबित हुई कि वह उन गरीब मजदूरों के शवों को भी उनके घर तक सुरक्षित नहीं ला पाई और उनका अंतिम संस्कार वहीं करवा दिया गया।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह उस डबल इंजन सरकार की प्राथमिक नैतिक जिम्मेदारी नहीं थी कि मृतकों के पार्थिव शरीर उनके स्वजनों को सौंपे जाते? ऐसी असंवेदनशील सरकार पर बेहद शर्म आती है। सरकार ने मृतकों के परिवारों के लिए मात्र 20 लाख रुपये के मुआवजे का ऐलान किया है, जबकि हमारी मांग है कि इसे बढ़ाकर कम से कम एक करोड़ रुपये किया जाना चाहिए। केंद्र और राज्य सरकारें आतंकी हिंसा में मारे गए इन नागरिकों को मरने के बाद भी उचित सम्मान देने में विफल रही हैं। क्या उन दोनों मृतकों के शव इसलिए वापस नहीं लाए गए क्योंकि वे गरीब मजदूर थे? मुख्यमंत्री और सरकार को जनता के सामने इसका स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

'आतंकी घटनाओं के पीछे किसी बड़ी साजिश की हो निष्पक्ष जांच'

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आगे कहा कि पहलगाम में पर्यटकों की हत्या के बाद एक बार फिर आतंकवादियों ने कश्मीर में दो मजदूरों की पहचान पूछकर और उनका धर्म जानकर उन्हें गोली का शिकार बनाया है। जब-जब केंद्र की सरकार कमजोर नजर आती है या उस पर राजनीतिक दबाव बढ़ता है, तब-तब देश के भीतर इस तरह की दुर्भाग्यपूर्ण आतंकी घटनाएं सामने आने लगती हैं, जैसे पूर्व में पुलवामा, फिर पहलगाम और अब कुलगाम की घटना।

यह सीधे तौर पर केंद्र सरकार की बड़ी विफलता को दर्शाता है। साथ ही, इस पूरी घटना के पीछे एक गहरा षड्यंत्र भी प्रतीत होता है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या यह किसी बड़े राजनीतिक ध्यान भटकाने की सुनियोजित साजिश तो नहीं है? इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

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