महिला टीम के मुख्य कोच स्जोर्ड मरीन आलोचनाओं के घेरे में, छुट्टी पर उठे सवाल

भारतीय हॉकी इस समय चारों तरफ से विवादों के घेरे में आ गई है। हाल ही में सामने आए 'केसरिया जर्सी' विवाद के बाद अब आगामी विश्व कप से ठीक पहले भारतीय महिला हॉकी टीम के मुख्य कोच को लंबी छुट्टी पर भेजे जाने को लेकर नया सियासी और खेल गलियारों में हंगामा खड़ा हो गया है। आगामी विश्व कप का आयोजन नीदरलैंड और बेल्जियम की संयुक्त मेजबानी में 14 अगस्त से शुरू होने जा रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि महिला टीम के मुख्य कोच स्जोर्ड मरीन खिलाड़ियों के साथ कैंप में मौजूद रहने के बजाय पिछले 20 दिनों से लगातार अवकाश पर चल रहे हैं।
पहले ऐतिहासिक खिताब की तलाश में जुटी है महिला टीम
कप्तान सलीमा टेटे के नेतृत्व में भारतीय महिला हॉकी टीम अपने पहले विश्व कप खिताब को जीतने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुख्य कोच मरीन गत 12 जुलाई से अपने निजी और पारिवारिक कारणों का हवाला देकर छुट्टी पर गए हुए हैं और अब उनके आगामी 6 अगस्त को सीधे नीदरलैंड में जाकर टीम के साथ जुड़ने की संभावना जताई जा रही है।
इससे पहले भारतीय महिला हॉकी टीम ने बेंगलुरु स्थित साई (SAI) केंद्र में आयोजित राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लिया था। इसके बाद टीम ने 31 जुलाई और 1 अगस्त को जर्मनी के खिलाफ अभ्यास मैच खेले और फिलहाल टीम नीदरलैंड पहुँचकर अपनी अंतिम तैयारियों को अंतिम रूप दे रही है। ऐसे में, विश्व कप जैसे महामुकाबले से ठीक पहले मुख्य कोच का इतने लंबे समय तक टीम से दूर रहना भारतीय टीम के प्रदर्शन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। जानकारी के लिए बता दें कि भारत को इस विश्व कप में अपना पहला मुकाबला आगामी 16 अगस्त को मजबूत चीन की टीम के खिलाफ खेलना है, जबकि इतिहास गवाह है कि विश्व कप में भारतीय महिला टीम का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन साल 1974 में रहा था, जहाँ टीम चौथे स्थान पर रही थी।
हॉकी इंडिया और साई ने दी है छुट्टी को मंजूरी
विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, मुख्य कोच स्जोर्ड मरीन की इस अवकाश की अर्जी को 'हॉकी इंडिया' और 'भारतीय खेल प्राधिकरण' (SAI) दोनों ही उच्च निकायों द्वारा आधिकारिक रूप से मंजूरी दी गई है। कोच की इस अनुपस्थिति के दौरान टीम के साथ रहकर फिलहाल कोचिंग और रणनीति की जिम्मेदारी विश्लेषणात्मक कोच (एंथिकल/एनालिटिकल कोच) माथियास विला संभाल रहे हैं।
पूर्व दिग्गजों और अध्यक्षों ने उठाए तीखे सवाल
टूर्नामेंट से ठीक पहले कोच के इस तरह गायब रहने को लेकर खेल जगत के दिग्गजों ने कड़ी आपत्ति जताई है। अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ (FIH) और हॉकी इंडिया के पूर्व अध्यक्ष नरिंदर बत्रा ने इस पर तीखा प्रहार करते हुए कहा, “सबसे पहली बात तो यह है कि पुरुष टीम के कार्यकाल के दौरान कथित दुर्व्यवहार के मामलों को लेकर मानहानि का मुकदमा झेलने वाले व्यक्ति को दोबारा इस पद पर नियुक्त ही नहीं किया जाना चाहिए था। अब विश्व कप जैसे अति-महत्वपूर्ण टूर्नामेंट से ठीक पहले मुख्य कोच का छुट्टी पर जाना हॉकी इंडिया के गैर-जिम्मेदाराना और गैर-गंभीर रवैये को साफ तौर पर उजागर करता है।”
इसके अलावा, भारतीय पुरुष हॉकी टीम के पूर्व दिग्गज गोलकीपर और कप्तान पी.आर. श्रीजेश ने भी इस मामले पर अपनी बेबाक राय रखते हुए कहा कि दुनिया के किसी भी बड़े टूर्नामेंट से ठीक पहले मुख्य कोच को अवकाश नहीं लेना चाहिए। एक कोच के तौर पर यही वह सबसे अहम समय होता है जब मैदान पर पेनल्टी कॉर्नर, सेट-पीस और शूटआउट जैसी तकनीकी रणनीतियों को अंतिम रूप दिया जाता है।
