‘भेड़चाल’ बयान पर घिरी BJP, राजकुमार रोत बोले- बेनकाब हुई भाजपा की सोच

नई दिल्ली। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के बयानों के बाद राजस्थान की राजनीति में एक नया विवाद गहराता हुआ दिखाई दे रहा है। एक तरफ जहाँ राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री किरोड़ीलाल मीणा ने व्यक्तिगत रूप से आदिवासी दिवस मनाया, वहीं उनकी अपनी ही पार्टी के भीतर इस आयोजन को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए। बीजेपी ने आधिकारिक तौर पर ऐसे आयोजनों से दूरी बनाए रखी, जबकि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने इस दिवस से जुड़ी गतिविधियों को 'भेड़चाल' करार दिया। इस बयान के बाद राजस्थान के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में सबसे मजबूत राजनीतिक प्रभाव रखने वाली 'भारत आदिवासी पार्टी' (BAP) ने कड़ी आपत्ति जताई है और सांसद राजकुमार रोत ने प्रदेश अध्यक्ष के इस रुख की तीखी आलोचना की है।
मदन राठौड़ की टिप्पणी पर राजनीतिक घमासान
विश्व आदिवासी दिवस के कार्यक्रमों और सोशल मीडिया पर चल रहे अभियानों के संदर्भ में मदन राठौड़ द्वारा दिए गए बयान को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। भारत आदिवासी पार्टी का कहना है कि आज का आदिवासी युवा अपने संवैधानिक अधिकारों, सांस्कृतिक सम्मान और विशिष्ट पहचान को लेकर पूरी तरह जागरूक है, इसलिए इस प्रकार की टिप्पणियां करना बिल्कुल उचित नहीं है।
राजकुमार रोत और बीएपी की कड़ी प्रतिक्रिया
बीएपी सांसद राजकुमार रोत ने कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष द्वारा विश्व आदिवासी दिवस मनाने वाले युवाओं के लिए अपमानजनक शब्दावली का इस्तेमाल किया जाना अत्यंत निंदनीय है। इसके साथ ही, उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा इस अवसर पर आदिवासी समाज को शुभकामनाएं न दिए जाने को भी दुर्भाग्यपूर्ण बताया। रोत ने आरोप लगाया कि इस रवैये से आदिवासी समुदाय के प्रति सत्तारूढ़ दल और उससे जुड़े संगठनों की वास्तविक सोच उजागर होती है। उन्होंने योग दिवस का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित किसी दिवस का संबंध भारत से नहीं माना जा सकता, तो अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर भी यही तर्क लागू होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश का जागरूक युवा अब राजनीतिक दलों के कथनी और करनी के फर्क को भली-भांति समझ चुका है।
आगामी पंचायत और निकाय चुनावों पर असर
बीजेपी नेताओं के इन बयानों के आने वाले स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने के संकेत मिल रहे हैं। बीएपी का मानना है कि अधिकारों और अस्तित्व को लेकर सजग युवा वर्ग लोकतांत्रिक माध्यम से इन बयानों का करारा जवाब देगा, जिससे आगामी चुनावी समर में राजनीतिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।
