मौत और तबाही का नकली अनुभव बना नया ट्रेंड, चीन में युवाओं की बढ़ी दिलचस्पी

बीजिंग। चीन में डार्क टूरिज्म का एक अनूठा ट्रेंड तेजी से जोर पकड़ रहा है, जहां लोग प्राकृतिक आपदाओं के वास्तविक अनुभव के लिए मोटी रकम चुका रहे हैं। चीन के हांग्जो में स्थित लवक्सिंग बेस जैसे केंद्रों में लोग पैसे देकर नकली तूफान, मूसलाधार बारिश और भीषण बाढ़ का सामना कर रहे हैं। इस इमर्सिव अनुभव के दौरान लोगों को सिर्फ डर का अहसास ही नहीं कराया जाता, बल्कि आपदा के समय बचाव और सर्वाइवल स्किल्स का प्रशिक्षण भी दिया जाता है।

12 हजार रुपये में तूफान और बाढ़ का इमर्सिव अनुभव

इस प्राकृतिक आपदा सिमुलेशन सेंटर में एक वयस्क के लिए शुल्क 899 युआन (लगभग 12,750 रुपये) रखा गया है, जबकि जंगल में जीवित रहने और जल बचाव ट्रेनिंग से जुड़े फैमिली पैकेज की कीमत करीब 5,000 युआन तक है। सिमुलेशन के दौरान 165 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलाई जाती हैं और प्रतिभागियों को सुरक्षा के लिहाज से थर्मल सूट और हेलमेट पहनाए जाते हैं। इसमें 6 से 14 वर्ष के बच्चे भी अभिभावकों के साथ भाग ले सकते हैं।

गर्दन तक पहुंचा पानी, डरावना रहा अनुभव

प्रतिभागियों के अनुसार, सिमुलेशन सेंटर में भूमिगत पार्किंग में पानी भरने और तेज बहाव जैसी परिस्थितियां इतनी वास्तविक होती हैं कि लोग कुछ देर के लिए भूल जाते हैं कि यह केवल एक अभ्यास है। अचानक आई बाढ़ के दौरान तेज बहाव के चलते प्रतिभागियों को कंक्रीट के खंभों से टकराने और मामूली चोट लगने जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है।

तनाव के दौर में सर्वाइवल क्षमता की परख

विशेषज्ञों का मानना है कि अनिश्चितता और भारी प्रतिस्पर्धा के इस दौर में लोग अपनी संकट से निपटने की क्षमता को परखने के लिए ऐसे अनुभवों का सहारा ले रहे हैं। इस अनोखे प्रोजेक्ट की शुरुआत प्रसिद्ध चीनी एडवेंचर कपल झांग शिन्यु और लियांग होंग के विचारों से प्रेरित है, जो ज्वालामुखी, रेडिएशन प्रभावित चेर्नोबिल और युद्ध क्षेत्रों की यात्राएं कर चुके हैं। उनका उद्देश्य लोगों को आपदा प्रबंधन के व्यावहारिक तरीके सिखाना और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना है।

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