कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से बाजार में हड़कंप, सेंसेक्स 200 अंक टूटा

धवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे बेंचमार्क इक्विटी सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों नीचे आ गए। बाजार में इस गिरावट की मुख्य वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और लगातार बनी भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं रहीं, जिनका निवेशकों की धारणा पर गहरा असर पड़ा।
कारोबार की शुरुआत में तीस शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 166.19 अंक लुढ़ककर 77,070.93 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि पचास शेयरों वाला एनएसई निफ्टी भी 59 अंक फिसलकर 24,096.75 पर आ गया। सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में टाटा स्टील, लार्सन एंड टुब्रो, बजाज फाइनेंस, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, पावर ग्रिड और महिंद्रा एंड महिंद्रा को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। इसके विपरीत, एचसीएल टेक, इंफोसिस, एटर्नल, सन फार्मा और कोटक महिंद्रा बैंक लाभ दर्ज करने में कामयाब रहे। इस दौरान वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.67 फीसदी की बढ़त के साथ 91.63 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
बाजार में गिरावट के मुख्य कारण
बाजार में छाई इस सुस्ती और गिरावट के पीछे कई बड़े कारण रहे। अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिन का अस्थायी युद्धविराम बिना किसी ठोस राजनयिक नतीजे के समाप्त हो गया, जिससे ऊर्जा आपूर्ति में लंबे समय तक व्यवधान आने की आशंका फिर से गहरी हो गई है। इसी वजह से कच्चे तेल के दाम ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं। साथ ही, दीर्घकालिक अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड भी कई वर्षों के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि इन सभी मिले-जुले कारकों ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में व्यापक जोखिम-बंद माहौल तैयार कर दिया है।
वैश्विक और एशियाई बाजारों का प्रदर्शन
वैश्विक मोर्चे पर भी स्थिति कुछ ऐसी ही नजर आई। अमेरिका के शेयर बाजार पिछले सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए थे, जिसका असर एशियाई बाजारों पर भी साफ दिखाई दिया। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक 5.59 फीसदी तक लुढ़क गया, जबकि जापान का निक्केई 225 और शंघाई का एस एस ई कंपोजिट सूचकांक भी नुकसान में रहे। हालांकि, इस भारी मंदी के बीच हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक मामूली बढ़त हासिल करने में सफल रहा। विदेशी संस्थागत निवेशकों के आंकड़ों के अनुसार, उन्होंने पिछले सत्र में 1,651.53 करोड़ रुपये के इक्विटी शेयर खरीदे थे, लेकिन इसके बावजूद घरेलू बाजारों पर मंदी का दबाव पूरी तरह हावी रहा और सूचकांक लगातार लाल निशान में बंद हुए।
