वाल्मीकि निगम मामले में घिरे नागेंद्र का पलटवार, बोले- दलित नेता को हटाने की साजिश

बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार में मंत्री बी. नागेंद्र ने अपने इस्तीफे की मांग को लेकर मुखर विपक्षी दलों पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें केवल इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वे कांग्रेस पार्टी से जुड़े हैं और एक दलित समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। नागेंद्र ने सवाल उठाया कि जब केंद्र सरकार के कई मंत्रियों और सांसदों के खिलाफ भी आपराधिक मामले दर्ज हैं, तो सिर्फ उनके खिलाफ ही इस्तीफे का दबाव क्यों बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि देश भर के कई नेताओं के खिलाफ गंभीर आरोप लंबित हैं, लेकिन राजनीतिक द्वेष के चलते उन्हें ही विशेष रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
अदालत पर पूरा भरोसा और आरोपों को बताया बेबुनियाद
अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर सफाई देते हुए नागेंद्र ने कहा कि वे इस मामले में अदालत का दरवाजा खटखटा चुके हैं जहाँ से उन्हें राहत मिल चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका ने उन्हें अभी तक दोषी नहीं ठहराया है, और उनके खिलाफ केवल आरोप हैं। कोई भी राजनीतिक व्यक्ति खुद को अदालत समझकर किसी को सीधे तौर पर दोषी करार नहीं दे सकता। नागेंद्र ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि देश की अदालत उन्हें किसी मामले में दोषी मानती है और सजा सुनाती है, तो वे कानून के सामने अपना सिर झुकाएंगे और फैसले को स्वीकार करेंगे।
इस पूरे विवाद के बीच मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और पार्टी का नेतृत्व पूरी तरह से नागेंद्र के समर्थन में खड़ा नजर आया है। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट रूप से चुनौती दी है कि यदि विपक्षी दल भाजपा के पास कथित वाल्मीकि निगम घोटाले से जुड़ा कोई ठोस सबूत है, तो उसे हवा में उछालने के बजाय सीधे विधानसभा के पटल पर रखना चाहिए, ताकि सदन में उस पर खुली चर्चा हो सके।
विपक्ष का जोरदार विरोध और राजनीतिक घमासान
दूसरी ओर, कर्नाटक विधानसभा में भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) के नेताओं ने नागेंद्र को दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने के विरोध में कड़ा मोर्चा खोला हुआ है। विपक्षी दलों ने काले शॉल पहनकर सदन में प्रदर्शन किया और बेलगावी समेत विभिन्न हिस्सों में धरने देकर उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की। विपक्ष का आरोप है कि करोड़ों रुपये के वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम घोटाले के आरोपी को मंत्री पद पर बनाए रखना नैतिकता के खिलाफ है।
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने विपक्ष के इन विरोध प्रदर्शनों को सिरे से खारिज करते हुए इसे उनकी राजनीतिक जमीन बचाने का एक हथकंडा करार दिया। उन्होंने कहा कि वाल्मीकि निगम मामले से जुड़ी अधिकांश बरामद राशि सुरक्षित खातों में वापस आ चुकी है और इस प्रकरण में मंत्री नागेंद्र की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं पाई गई है।
कुमारस्वामी पर मुख्यमंत्री का तीखा हमला
इस राजनीतिक गर्मागर्म के बीच, सीएम शिवकुमार ने ग्रेटर बेंगलुरु एकीकृत टाउनशिप परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के विरोध में उतरे केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी पर भी तीखा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जनता दल (सेक्युलर) राज्य के सुनियोजित विकास में लगातार बाधा उत्पन्न कर रही है। शिवकुमार ने पलटवार करते हुए कहा कि रियल एस्टेट कारोबार की संस्कृति किसने शुरू की, इसके जनक वही लोग हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य केवल आम जनता का कल्याण और चहुंमुखी विकास करना है।
