‘दिल्ली के रिमोट से चल रही सरकार’, पार्क बिल विवाद पर BJP का शिवकुमार पर वार

बेंगलुरु: कर्नाटक में प्रस्तावित 'पार्क संशोधन विधेयक' को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता आर. अशोक ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें 'डमी' और 'रिमोट-कंट्रोल्ड' मुख्यमंत्री करार दिया। भाजपा के कड़े विरोध और जनआक्रोश के बीच राज्य सरकार ने फिलहाल विवादित विधेयक को वापस ले लिया है, जिसे सार्वजनिक परामर्श के बाद अगले विधानसभा सत्र में पुनः प्रस्तुत किया जाएगा।
भाजपा का आरोप: दिल्ली आलाकमान के दबाव में लिया गया फैसला
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर आर. अशोक ने दावा किया कि ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला के राज्य दौरे ने सिद्ध कर दिया है कि कर्नाटक सरकार का संचालन दिल्ली से हो रहा है:
हरियाली को खतरे का दावा: आर. अशोक ने कहा कि राज्य सरकार ने पार्कों की 5 प्रतिशत भूमि के व्यावसायिक/अन्य उपयोग की अनुमति देने वाला प्रावधान लाकर बेंगलुरु के 'ग्रीन कवर' (हरियाली) को खतरे में डाल दिया था।
जनता का आक्रोश: भाजपा द्वारा पर्दाफाश किए जाने के बाद जनता का विरोध बढ़ा, जिसके फलस्वरूप कांग्रेस आलाकमान के हस्तक्षेप पर सरकार को कदम पीछे खींचने पड़े।
नेतृत्व पर सवाल: उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने कन्नड़ जनता की आवाज के बजाय पार्टी आलाकमान के निर्देशों को प्राथमिकता दी, जो एक 'रिमोट-कंट्रोल सरेंडर' है।
क्या है प्रस्तावित पार्क संशोधन विधेयक?
प्रस्तावित 'सरकारी पार्क और पार्क संरक्षण अधिनियम' संशोधन का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक कार्यों हेतु पार्क की 5 प्रतिशत भूमि का अधिग्रहण करने की अनुमति देना था। पर्यावरण प्रेमियों और भाजपा ने इस प्रावधान का यह कहते हुए विरोध किया कि इससे बेंगलुरु की कीमती हरित भूमि नष्ट हो जाएगी।
सरकार का पक्ष: व्यापक चर्चा हेतु वापस लिया गया विधेयक
कैबिनेट निर्णय की जानकारी देते हुए कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने स्पष्ट किया कि विधेयक में कोई बदलाव किए बिना इसे वापस लिया गया है ताकि सार्वजनिक रूप से व्यापक विचार-विमर्श किया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार जनता और विशेषज्ञों के रचनात्मक सुझावों का स्वागत करेगी तथा आगामी विधानसभा सत्र में इस पर खुली चर्चा कराई जाएगी।
