भोपाल में नई जिम्मेदारी संभालने वाले थे अनिल डामोर, उससे पहले हार्ट अटैक ने ली जान

भोपाल| मध्य प्रदेश के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी (आईएएस) अनिल कुमार डामोर का अचानक निधन हो गया है। उन्होंने विदिशा में अंतिम सांस ली। डामोर हाल ही में विदिशा में अपर कलेक्टर के पद पर पदस्थ थे, लेकिन हाल ही में शासन ने उनका स्थानांतरण भोपाल कर दिया था। मंगलवार सुबह अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें तुरंत अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा महाविद्यालय ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार, उनके निधन की प्रारंभिक वजह हृदयघात (हार्ट अटैक) बताई जा रही है।

सहज व्यवहार और मिलनसार व्यक्तित्व के लिए जाने जाते थे डामोर

आईएएस अनिल कुमार डामोर अपने अत्यंत सरल, सहज और खुशमिजाज स्वभाव के लिए जाने जाते थे। वे अपने अधीनस्थों और सहकर्मियों के साथ हमेशा मित्रवत व्यवहार रखते थे। यही कारण था कि केवल ज़िले में ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मध्य प्रदेश के प्रशासनिक हलकों में वे बेहद लोकप्रिय थे और सभी उनका काफी सम्मान करते थे।

निधन की खबर से शोक की लहर, अस्पताल में लगा जमावड़ा

अनिल कुमार डामोर के देहांत की दुखद सूचना मिलते ही पूरे प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों में शोक छा गया। विदिशा और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में अधिकारी, कर्मचारी और उनके परिचित मेडिकल कॉलेज पहुँच गए। अस्पताल परिसर में उनके अंतिम दर्शनों और पोस्टमार्टम प्रक्रिया के दौरान उपस्थित सभी सहकर्मी और मित्र अत्यंत भावुक और दुखी नज़र आए।

भोपाल में उप सचिव के पद पर हुआ था हालिया स्थानांतरण

राज्य शासन ने हाल ही में अनिल कुमार डामोर को भोपाल स्थित पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में उप सचिव के रूप में नई जिम्मेदारी सौंपी थी। इससे पूर्व वे विदिशा में अपर कलेक्टर का प्रभार संभाल रहे थे। इस माह स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद वे कार्यमुक्त होकर अपनी नई पदस्थापना की जिम्मेदारी संभालने की तैयारियों में लगे थे, लेकिन इससे पहले ही यह दुखद हादसा हो गया।

मूल रूप से झाबुआ के निवासी थे डामोर, परिवार में दो बच्चे

अस्पताल में मौजूद अधिकारियों और पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि आईएएस अनिल कुमार डामोर मूल रूप से झाबुआ जिले के रहने वाले थे। उनके परिवार में उनकी धर्मपत्नी और दो बच्चे हैं। उनका बेटा वर्तमान में 11वीं कक्षा का छात्र है। उनके आकस्मिक निधन से परिवार और शुभचिंतकों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

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