पेरिम द्वीप पर हूतियों का कब्जा, लाल सागर के मुहाने पर बढ़ी चुनौती

सना/अदन। लाल सागर और रणनीतिक बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य क्षेत्र में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने अपनी पकड़ खासी मजबूत कर ली है। हूतियों ने इस जलमार्ग के बीच स्थित बेहद अहम पेरिम द्वीप पर अपना कब्जा जमाने का दावा किया है। इस घटनाक्रम से ठीक एक दिन पहले विद्रोही गुट ने लाल सागर तट पर स्थित मोचा शहर और उसके प्रमुख बंदरगाह को भी अपने नियंत्रण में ले लिया था। इन दो बड़े इलाकों पर कब्जे के बाद वैश्विक व्यापारिक मार्ग पर सुरक्षा चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।

रणनीतिक मोर्चे पर हूतियों की दोहरी बढ़त

मोचा यमन की मुख्य भूमि पर समुद्र तट पर स्थित है, जबकि पेरिम द्वीप बाब अल-मंदेब के ठीक बीचों-बीच एक सामरिक स्थिति रखता है। इन दोनों ठिकानों के हाथ लगने से हूतियों को लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच होने वाली आवाजाही पर कड़ी नजर रखने और उसे नियंत्रित करने की बड़ी क्षमता मिल गई है। एशिया को यूरोप से जोड़ने वाले इस संकरे समुद्री मार्ग पर विद्रोही गुट की सक्रियता वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बन गई है।

यमन सरकार का सैन्य पलटवार और हवाई हमले

विद्रोहियों की इस आक्रामक बढ़त के जवाब में यमनी सरकारी सेना ने पश्चिमी तट के इलाकों में अपने अभियान तेज कर दिए हैं। सेना ने मोचा और धुबाब क्षेत्र में हूती ठिकानों को निशाना बनाकर जोरदार हवाई हमले किए हैं, जिनमें कई वाहन और हथियार नष्ट किए गए हैं। मोचा-धुबाब सड़क मार्ग पर भी लड़ाकों के जमावड़े पर हमले की खबर है। बढ़ते तनाव को देखते हुए सेना ने आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए ताइज-मोचा और मोचा-धुबाब मार्गों का इस्तेमाल न करने की सख्त चेतावनी जारी की है।

यमन में संघर्ष का नया दौर

वर्ष 2014 में राजधानी सना सहित देश के बड़े हिस्से पर कब्जा करने वाले हूतियों और सरकारी बलों के बीच साल 2022 के बाद से संघर्ष काफी हद तक थमा हुआ था। हालांकि, जुलाई की शुरुआत से शुरू हुई ताजा झड़पों ने यमन के युद्धक्षेत्र की तस्वीर एक बार फिर बदल दी है। इस घटनाक्रम से सऊदी अरब के तेल व्यापार और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लाइनों पर मंडराता खतरा गहरा गया है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

Leave a Reply