हरीश रावत ने कांग्रेस छोड़ने की खबरों को लेकर दिया बड़ा बयान, पार्टी के प्रति जताई निष्ठा

देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने पार्टी पदों से इस्तीफा देने की अपनी पेशकश पर सफाई देते हुए स्पष्ट किया है कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता से कोई त्यागपत्र नहीं दिया है और उनकी वफादारी हमेशा पार्टी के साथ रहेगी।
कांग्रेस से इस्तीफे की खबरों का खंडन
हरीश रावत ने मीडिया में चल रही उन खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया जिनमें उनके कांग्रेस पार्टी छोड़ने का दावा किया जा रहा था। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी की सदस्यता उनके खून और हड्डियों में बसी है और वह आज जो कुछ भी हैं, वह सिर्फ इसी पार्टी की बदौलत हैं।
ओएसडी के ठिकानों पर छापेमारी और रुख
अपने ओएसडी रहे चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर हुई प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद रावत ने कहा था कि अगर उनके सहयोगी पर लगे भ्रष्टाचार या गड़बड़ी के आरोप साबित होते हैं, तो यह उनके लिए बेहद शर्मिंदगी की बात होगी। हालांकि, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव से पहले एक विशेष राजनीतिक 'नरेटिव' गढ़ने के लिए यह कार्रवाई की गई है।
पार्टी पदों छोड़ने के पीछे की वजह
अपने शुरुआती बयान में रावत ने कहा था कि वे नहीं चाहते कि उनके किसी कदम या सहयोगी से जुड़े मामले के कारण पार्टी के भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे संघर्ष को कोई कमजोरी पहुंचे। इसी नैतिक आधार पर उन्होंने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी और कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के पदों से हटने की बात कही थी, जिसे मीडिया ने पार्टी से पूर्ण इस्तीफे के रूप में प्रसारित कर दिया था।
हरीश रावत का राजनीतिक सफर
उत्तराखंड की राजनीति के कद्दावर चेहरों में शुमार हरीश रावत 1980 में अल्मोड़ा से मुरली मनोहर जोशी को हराकर सांसद बने थे। केंद्र सरकार में श्रम एवं रोजगार मंत्री रह चुके रावत 2014 से 2017 के बीच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं।
