संबित पात्रा का बड़ा आरोप, बोले- राहुल गांधी के लिए लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश

नई दिल्ली। विपक्षी दलों द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ निकाले जाने वाले विरोध मार्च से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक आक्रामक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन पर तीखा पलटवार किया है। भाजपा राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद संबित पात्रा ने विपक्ष के इस पूरे अभियान को सत्ता हासिल करने का एक प्रायोजित और राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया है।

‘राहुल गांधी को लॉन्च करने के लिए लोकतंत्र पर हमला’

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस की ओर से देश में सुनियोजित तरीके से सत्ता परिवर्तन कराने और राहुल गांधी को जबरन सत्ता में स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए भारत के मजबूत लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।

भाजपा सांसद ने कहा कि यह कोई आज की रणनीति नहीं है, बल्कि पिछले कई वर्षों से कांग्रेस राहुल गांधी को राजनीति में लॉन्च और पुनः स्थापित करने के असफल प्रयास करती रही है। उन्होंने कहा कि कई बार नाकाम होने के बाद अब कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने यह मान लिया है कि भले ही इसके लिए देश में अराजकता का माहौल क्यों न पैदा करना पड़े, वे अपने राजनीतिक एजेंडे से पीछे नहीं हटेंगे।

‘चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं को बनाया जा रहा निशाना’

विपक्ष के विरोध मार्च पर सवाल उठाते हुए संबित पात्रा ने कहा कि अतीत में भी विभिन्न राजनीतिक कारणों से भारतीय सेना, सुप्रीम कोर्ट, एचएएल (HAL), हिंदू समाज और ईवीएम (EVM) पर हमले किए गए हैं, और पिछले कुछ हफ्तों से लगातार चुनाव आयोग को भी टार्गेट किया जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि आज होने वाले इस प्रदर्शन के जरिए चुनाव आयोग की आड़ में देश में फिर से अराजकता फैलाने की कोशिश की जाएगी।

‘एसआईआर (SIR) को लेकर फैलाई जा रही हैं फर्जी खबरें’

संबित पात्रा ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष पिछले कुछ दिनों से जनता के बीच लगातार गलत सूचनाएं और फर्जी खबरें फैला रहा है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में दायर उस याचिका का भी हवाला दिया, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग की गई थी। पात्रा ने कहा कि इस मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत नोटिस जारी किया गया है, जिसमें दोनों पक्षों को अपनी दलीलें रखनी हैं और नियमानुसार सुनवाई होनी चाहिए, लेकिन विपक्ष राजनीतिक लाभ के लिए इस प्रक्रिया को भी विवादित बना रहा है।

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