गैरकानूनी गर्भपात पर लगेगी रोक, गर्भलिंग जांच के खिलाफ जिलास्तर पर होगी कड़ी निगरानी

मुंबई। महाराष्ट्र में अवैध गर्भलिंग जांच और गैरकानूनी गर्भपात जैसी कुप्रथाओं पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार ने निगरानी और कानूनी कार्रवाई की व्यवस्था को बेहद सख्त करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। मंत्रालय में हाल ही में संपन्न राज्यस्तरीय टास्क फोर्स की पहली बैठक में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री प्रकाश आबिटकर ने घोषणा की है कि स्वास्थ्य, पुलिस और राजस्व विभागों के बीच आपसी तालमेल को और बेहतर बनाकर इन अवैध गतिविधियों पर तुरंत नकेल कसी जाएगी। इस महत्वपूर्ण बैठक में टास्क फोर्स की अध्यक्ष एवं विधान परिषद सदस्य डॉ. नीलम गोऱ्हे, विधायक डॉ. मनीषा कायंदे, विधायक उमा खापरे, विधायक स्नेहा दुबे सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि नागपुर में आयोजित होने वाले आगामी शीतकालीन सत्र से पहले पालघर, पुणे, छत्रपति संभाजीनगर और नासिक समेत कई संवेदनशील जिलों में विभागीय समीक्षा बैठकों का आयोजन किया जाएगा। डॉ. नीलम गोऱ्हे ने जानकारी दी कि जिलास्तरीय समितियों के साथ-साथ महानगरपालिकाओं और जिला परिषदों के अधिकृत स्वास्थ्य अधिकारियों के कामकाज की भी नियमित समीक्षा की जाएगी, जबकि अवैध गर्भलिंग और गर्भपात के मामलों में की गई कार्रवाई का हर हफ्ते फॉलोअप लिया जाएगा।

संगठित गिरोहों पर मोक्का लगाने की सिफारिश

टास्क फोर्स की इस उच्चस्तरीय बैठक में यह कड़ा प्रस्ताव रखा गया है कि जो डॉक्टर या अन्य लोग बार-बार और संगठित तरीके से अवैध गर्भलिंग जांच तथा गैरकानूनी गर्भपात के धंधे में लिप्त हैं, उनके खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून यानी मोक्का के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की जाए। डॉ. गोऱ्हे के अनुसार, इस गंभीर विषय पर विधि एवं न्याय विभाग से कानूनी राय लेकर आवश्यक संशोधनों की संभावनाओं का अध्ययन करने पर स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने पूरी तरह सकारात्मक रुख दिखाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरोपियों को किसी भी सूरत में सबूतों से छेड़छाड़ करने का मौका नहीं दिया जाएगा और इस पूरे अपराध नेटवर्क की तह तक पहुंचकर कड़े कदम उठाए जाएंगे।

सोनोग्राफी केंद्रों और ऑनलाइन मशीनों पर कड़ी नजर

डॉ. गोऱ्हे ने जोर देकर कहा कि गर्भधारण-पूर्व और प्रसव-पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम तथा मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी कानून का धरातल पर बेहद कड़ाई से पालन होना अनिवार्य है। सोनोग्राफी जैसी आधुनिक तकनीक के दुरुपयोग को रोकने के लिए अनधिकृत केंद्रों की पहचान करने, घर-घर जाकर होने वाली अवैध जांचों पर रोक लगाने और पोर्टेबल सोनोग्राफी मशीनों की ऑनलाइन बिक्री पर भी पैनी नजर रखने की आवश्यकता है। पोर्टेबल मशीनों की खरीद-बिक्री के दौरान खरीदार की पात्रता और सभी लेन-देन के रिकॉर्ड की बारीकी से जांच करने के लिए केंद्र सरकार और विभिन्न ऑनलाइन पोर्टलों से समन्वय स्थापित करने का सुझाव भी दिया गया है।

कम लिंगानुपात वाले क्षेत्रों में विशेष सर्वेक्षण

चर्चा के दौरान विधायक डॉ. मनीषा कायंदे ने सुझाव दिया कि जिन इलाकों में बालिकाओं के जन्म का अनुपात लगातार चिंताजनक रूप से गिर रहा है, वहां किसी औपचारिक शिकायत का इंतजार किए बिना ही प्रशासन द्वारा तुरंत सर्वेक्षण, औचक निरीक्षण और जांच की जानी चाहिए। विधायक उमा खापरे ने टास्क फोर्स के सदस्यों को स्पष्ट रूप से जिलावार जिम्मेदारियां बांटने की बात कही, वहीं विधायक स्नेहा दुबे ने आदिवासी अंचलों तक अवैध गर्भलिंग जांच के जाल के फैलने पर गहरी चिंता जताते हुए वहां टास्क फोर्स की सक्रिय और प्रभावी भूमिका की पुरजोर वकालत की। डॉ. गोऱ्हे ने इस बात पर विशेष बल दिया कि भ्रूण हत्या रोकने की जिम्मेदारी अकेली महिलाओं की नहीं है, बल्कि इसके लिए पुरुष जनप्रतिनिधियों और समाज के हर वर्ग को आगे आकर अपनी सक्रिय भागीदारी निभानी होगी।

बैठक के अंत में स्वास्थ्य और पुलिस विभागों के लिए एक संयुक्त मानक कार्यप्रणाली (एसओपी) तैयार करने तथा राज्य के पुलिस महानिदेशक के साथ समन्वय बैठक आयोजित करने पर भी विस्तार से चर्चा की गई। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के संकल्प को दोहराते हुए डॉ. गोऱ्हे ने कहा कि बालिकाओं के जन्म को सुरक्षित बनाने और जन्म के समय लिंगानुपात में सकारात्मक सुधार लाने के लिए राज्य सरकार हरसंभव और निरंतर कदम उठाती रहेगी।

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