नाना पाटेकर की आखिरी इच्छा से जुड़ा पुराना किस्सा वायरल, खुद जमा की थीं अंतिम संस्कार की लकड़ियां

बॉलीवुड के मशहूर और दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार की सुबह निधन हो गया था। बीती देर रात पुणे में उनका अंतिम संस्कार पूरी विधि-विधान के साथ संपन्न कर दिया गया। उनकी इस अंतिम विदाई की सबसे खास बात यह रही कि उनका अंतिम संस्कार उन्हीं लकड़ियों से किया गया, जिन्हें उन्होंने खुद अपने जीते-जी अपने हाथों से इकट्ठा करके सहेज कर रखा था।
नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार के तुरंत बाद उनके बेटे ने मीडिया के सामने आकर यह स्पष्ट किया है कि आखिर उनके पिता का अंतिम संस्कार आधी रात को क्यों किया गया। आइए जानते हैं कल रात से अब तक के इस घटनाक्रम से जुड़ी मुख्य बातें…
नाना पाटेकर के निधन पर क्या बोले उनके बेटे मल्हार पाटेकर?
दिवंगत अभिनेता के बेटे मल्हार पाटेकर ने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'नाना साहेब जैसा व्यक्तित्व कभी भी हमें छोड़कर पूरी तरह नहीं जा सकता। उनकी महान उपलब्धियों ने उन्हें इतिहास में अमर बना दिया है। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि उनका हमेशा से यही दृढ़ विश्वास था कि हम सभी को एकजुट होकर वैश्विक स्तर पर सही और मानवता के मार्ग पर चलना चाहिए। तीसरी बात, भविष्य के दृष्टिकोण से, नाना साहेब जो अपनी सोच और विजन हमारे लिए छोड़ गए हैं, उसे ही आगे बढ़ाते हुए हम अपने आने वाले जीवन को दिशा देंगे। मैंने पिछले दो दिनों में भी यही बात दोहराई है कि नाना साहेब जैसे लोग अपने कर्मों और कार्यों के माध्यम से हमेशा जीवित रहते हैं। मराठी में हम ऐसे महान लोगों को अमर कहते हैं। उनके मन और मस्तिष्क में हमेशा केवल एक ही विचार प्रमुख रहता था कि वे इस दुनिया की बेहतरी और कल्याण के लिए निरंतर काम करें।'
क्यों करना पड़ा आधी रात को अंतिम संस्कार?
जब मीडियाकर्मियों ने मल्हार पाटेकर से यह सवाल किया कि उनके पिता नाना पाटेकर का दाह संस्कार इतनी देर रात क्यों किया गया, तो उन्होंने इसके पीछे की वजह स्पष्ट करते हुए कहा, 'हम उस समय गोवा में थे और उनका पार्थिव शरीर हमारे पैतृक गांव के फार्महाउस पर लाया जाना था। हमें पूरी उम्मीद थी कि हम तय समय पर पहुंच जाएंगे, लेकिन सफर में कुछ अतिरिक्त समय लग गया। चूंकि उनका निधन सुबह बहुत जल्दी हो चुका था, इसलिए काफी लंबा समय बीत चुका था और पार्थिव शरीर को और अधिक देर तक सुरक्षित रखना बिल्कुल भी ठीक नहीं था। यही वजह रही कि हमें सूर्यास्त के बाद और आधी रात में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ी।'
जीते-जी जुटाई गई लकड़ियों से हुआ अंतिम संस्कार
नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार पूरी तरह से उनकी खुद की जुटाई हुई लकड़ियों से ही संपन्न किया गया है। इन लकड़ियों को उन्होंने अपने जीवनकाल में ही पहले से ही इकट्ठा कर लिया था। आपको बता दें कि साल 2013 में दिए गए एक साक्षात्कार (इंटरव्यू) में नाना पाटेकर ने खुद इस बात का खुलासा किया था कि उन्होंने अपने अंतिम संस्कार की सभी तैयारियां बहुत पहले से कर रखी हैं। उन्होंने तब कहा था, 'हमें अच्छी तरह मालूम है कि हमारे अंतिम संस्कार में 12 मन लकड़ी की आवश्यकता पड़ने वाली है। यह मेरी एकमात्र अंतिम प्रॉपर्टी (संपत्ति) है, और इसी के साथ मैं एक दिन इस दुनिया से चला जाऊंगा।'
बॉलीवुड से सिर्फ जैकी श्रॉफ और कई नामचीन हस्तियां रहीं मौजूद
यूं तो फिल्म इंडस्ट्री में नाना पाटेकर के मित्रों का दायरा बहुत बड़ा था, परंतु बीती रात उनके अंतिम संस्कार में फिल्म जगत के बड़े कलाकारों में से केवल जैकी श्रॉफ ही व्यक्तिगत रूप से शामिल होने पहुँचे। इनके अतिरिक्त फिल्म उद्योग से प्रवीण तरडे, साजिद नाडियाडवाला और अनिल शर्मा जैसी प्रमुख हस्तियां भी वहां मौजूद रहीं।
इन फिल्मी सितारों के अलावा केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले, महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की पूर्व चेयरपर्सन रूपाली चाकणकर, महाराष्ट्र के उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल, तथा भैया जगताप समेत कई अन्य वरिष्ठ गणमान्य राजनीतिक एवं सामाजिक व्यक्ति भी इस दौरान वहां उपस्थित रहे और दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि दी।
