बेटे ने लीवर दान कर बचाई पिता की जान, जोधपुर AIIMS में डॉक्टरों को मिली बड़ी सफलता

जोधपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) जोधपुर में डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम ने एक 51 वर्षीय गंभीर मरीज का जटिल और सफल लीवर ट्रांसप्लांट करके उसे नया जीवन प्रदान किया है। इस भावुक और अनुकरणीय मामले में हरियाणा के नारनौल निवासी पीड़ित पिता की जान बचाने के लिए उनके अपने बेटे ने आगे आकर अपने लीवर का एक हिस्सा दान किया। मरीज पिछले करीब डेढ़ साल से क्रॉनिक लीवर डिजीज, पीलिया और पाचन तंत्र में ब्लीडिंग जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बुरी तरह जूझ रहा था। डॉक्टरों के अनुसार, हेपेटाइटिस-बी संक्रमण और पुरानी जीवनशैली के चलते मरीज का लीवर पूरी तरह खराब हो चुका था, जिसके बाद ट्रांसप्लांट ही एकमात्र अंतिम विकल्प बचा था।
एम्स जोधपुर में 30वां सफल लीवर ट्रांसप्लांट और जटिल सर्जरी
इस सफल ऑपरेशन के साथ ही एम्स जोधपुर ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए अपने संस्थान का 30वां लीवर ट्रांसप्लांट पूरा किया है। सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. वैभव वाष्र्णेय के कुशल नेतृत्व में विशेषज्ञों की एक बहुविषयक टीम ने इस बेहद जटिल सर्जरी को अंजाम दिया। एम्स जोधपुर में अब तक 16 जीवित दाताओं और 14 मृत दाताओं (कैडेवर) के माध्यम से सफल प्रत्यारोपण किए जा चुके हैं। इस ऐतिहासिक सर्जरी टीम में डॉ. सुभाष सोनी, डॉ. सेल्वाकुमार, डॉ. पीयूष वाष्र्णेय तथा डॉ. लोकेश अग्रवाल के साथ-साथ एनेस्थीसिया, नर्सिंग अधिकारियों और गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) का विशेष योगदान रहा।
आयुष्मान भारत योजना से मिला आर्थिक संबल
एम्स के कार्यकारी निदेशक प्रो. संजीव सिन्हा ने इस जटिल और सफल प्रत्यारोपण के लिए पूरी मेडिकल टीम को हार्दिक बधाई दी। वहीं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नवीन दत्त ने जानकारी देते हुए बताया कि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पात्र मरीजों को लीवर ट्रांसप्लांट जैसी बेहद खर्चीली चिकित्सा सुविधा का लाभ मिलने से गरीब व मध्यमवर्गीय परिवारों का वित्तीय बोझ काफी कम हुआ है। एम्स जोधपुर में विकसित हो रही इन आधुनिक और उच्चस्तरीय प्रत्यारोपण सुविधाओं से न केवल राजस्थान बल्कि पड़ोसी राज्यों से आने वाले गंभीर मरीजों को भी काफी सहूलियत मिल रही है।
