कोलकाता के दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ पर राजनीति गरमाई, असली जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में हाल ही में दुर्गा पूजा के दौरान हुई भीषण भगदड़ की घटना को लेकर राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है। सत्तारूढ़ दल के भीतर और राजनीतिक हलकों में इस बात को लेकर तीखे सवाल उठाए जा रहे हैं कि आखिर जन सुरक्षा को ताक पर रखकर दिखावे और आयोजनों को प्राथमिकता क्यों दी गई। मालूम हो कि सप्तमी के दिन हुई इस दुखद भगदड़ की घटना में 19 लोगों की अकाल मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद से आयोजकों की प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
चोरबागान सर्वजनीन पूजा समिति के सम्मान पर उठे गंभीर सवाल
विवाद तब और गहरा गया जब राज्य के सूचना और संस्कृति विभाग ने कोलकाता नगर निगम के साथ मिलकर चोरबागान सर्वजनीन दुर्गोत्सव समिति को 'बेस्ट ऑफ द बेस्ट' यानी 'सेरार सेरा-3' श्रेणी के प्रतिष्ठित देवी दुर्गा सम्मान 2026 से नवाजा। इसी विशेष पूजा पंडाल और उसके आसपास के इलाके में भारी भीड़ के कारण भगदड़ मच गई थी, जिसमें कई बेकसूर लोगों की जान चली गई थी। इसके बावजूद उसी पूजा आयोजन को 'बेस्ट लाइटिंग', 'बेस्ट पंडाल' और 'सबसे पर्यावरण-अनुकूल पूजा' जैसे कई अन्य पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया, जिसके बाद से राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
प्रशासनिक जवाबदेही और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल
घटना के बाद सार्वजनिक मंचों पर यह सवाल प्रमुखता से उठाया जा रहा है कि जब किसी धार्मिक आयोजन या पूजा को 'सर्वश्रेष्ठ' का खिताब दिया जाता है, तो वहाँ आने वाले लाखों आम नागरिकों की सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक होने पर आखिरकार किसकी सीधी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। आलोचकों और राजनीतिक दलों का कहना है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करके केवल भव्यता और दिखावे को बढ़ावा देने का नतीजा ऐसी त्रासदियों के रूप में सामने आता है।
मुख्यमंत्री की अपील और आयोजकों के लिए निर्देश
इस दर्दनाक हादसे के बाद प्रशासन और सरकार की ओर से कड़े कदम उठाए जाने की बात कही जा रही है। संबंधित नेतृत्व ने थीम-आधारित दुर्गा पूजा के सभी आयोजकों से यह सख्त अपील की है कि वे भविष्य में ऐसे आयोजनों के दौरान पंडाल परिसरों में पर्याप्त रोशनी का समुचित इंतजाम रखें तथा भीड़ के सुचारू आवागमन के लिए पर्याप्त संख्या में प्रवेश और निकास द्वार सुनिश्चित करें। प्रशासन का मानना है कि कई बार आकर्षक थीम के नाम पर पंडालों के भीतर रोशनी बहुत कम रखी जाती है, जिससे भीड़ नियंत्रण में भारी कठिनाई होती है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में भव्य और कलात्मक थीम वाले पंडालों के जरिए लोगों को आकर्षित करने की होड़ रहती है, लेकिन अब सुरक्षा और प्रशासनिक निर्देशों का सख्ती से पालन कराना सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है।
