वर्धा में बाल विवाह पर क्रैकडाउन, दोषियों को जेल और जुर्माने की चेतावनी

वर्धा। महाराष्ट्र के वर्धा जिले में बाल विवाह की कुप्रथा को समाप्त करने के लिए चलाए जा रहे अभियानों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। पिछले आठ वित्तीय वर्षों के दौरान जिले में कुल 120 बाल विवाह रोके गए हैं, जबकि इन मामलों से संबंधित 13 अलग-अलग अपराध दर्ज किए गए हैं। जिला महिला एवं बाल विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019-20 से लेकर 30 सितंबर 2026 तक प्राप्त हुई सभी 120 शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए विवाह रोकने में सफलता प्राप्त की गई है।
विभिन्न वर्षों में दर्ज किए गए 13 मामले
बाल विवाह से जुड़े अपराधों के तहत जिले के विभिन्न थानों में कुल 13 मामले दर्ज हुए हैं। इनमें वर्ष 2020-21 में हिंगणघाट में 3, वर्ष 2021-22 में देवली, आर्वी और सेलू में कुल 3 तथा वर्ष 2023-24 में आर्वी व वर्धा में कुल 4 मामले दर्ज किए गए। इसी प्रकार वर्ष 2025-26 में सेलू में 2 और वर्ष 2026-27 में 1 मामला दर्ज किया गया, जबकि वर्ष 2019-20 और 2024-25 में कोई अपराध दर्ज नहीं हुआ था।
प्रशासनिक ढांचा और ग्रामीण स्तर पर अधिकारियों की तैनाती
जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी तृप्ति चव्हाण ने बताया कि बाल विवाह रोकने के लिए व्यापक प्रशासनिक व्यवस्था की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामसेवकों को 'बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी' तथा आंगनवाड़ी सेविकाओं को 'सहायक अधिकारी' की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं शहरी क्षेत्रों में पर्यवेक्षिकाओं को यह प्रभार दिया गया है। सूचना मिलते ही ये अधिकारी पुलिस, चाइल्डलाइन, वर्धा जिला बाल संरक्षण इकाई और स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करते हैं।
बाल विवाह कराने पर दो साल की जेल और भारी जुर्माना
कानून के अनुसार, विवाह के समय लड़की की आयु 18 वर्ष और लड़के की आयु 21 वर्ष से कम होना गैर-कानूनी है। बाल विवाह कराने, उसका आयोजन करने या उसमें सहयोग करने वाले माता-पिता, रिश्तेदार, मैरिज हॉल संचालक और पंडित/काजी के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में कार्रवाई की जाती है। इस अपराध में दोषी पाए जाने पर 2 वर्ष तक के कठोर कारावास और 1 लाख रुपये तक के जुर्माने का कड़ा प्रावधान है।
