महायुति में हार पर मचा बवाल, शिंदे पर बीजेपी ने उठाए सवाल

मुंबई। महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव परिणाम आने के बाद सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के भीतर खींचतान और विवाद गहरा गया है। पांच में से तीन सीटों पर पराजय का सामना करने के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना पर 'गठबंधन धर्म' न निभाने और भीतरघात करने का सीधा आरोप लगाया है। बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन ने कहा कि यदि शिवसेना ने पूरी निष्ठा से बीजेपी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) का सहयोग किया होता, तो महायुति पांचों सीटों पर जीत दर्ज कर सकती थी।
पुणे और मराठवाड़ा की सीटों पर बगावत का आरोप
बीजेपी प्रवक्ता नवनाथ बन ने आरोप लगाया कि पुणे और नागपुर में शिवसेना ने गठबंधन के उम्मीदवारों का अपेक्षित समर्थन नहीं किया। पुणे शिक्षक सीट पर शिवसेना ने अंतिम समय में निर्दलीय उम्मीदवार प्रोफेसर सचिन सानप को अपना समर्थन दे दिया, जिससे महायुति के आधिकारिक वोट बंट गए। इसके अलावा, छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद-मराठवाड़ा) स्नातक सीट पर बीजेपी ने शिवसेना नेता और राज्य सरकार के मंत्री अब्दुल सत्तार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए। आरोप है कि अब्दुल सत्तार ने महायुति के आधिकारिक प्रत्याशी सतीश चव्हाण (NCP) के खिलाफ जाकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के उम्मीदवार डॉ. प्रतापसिंह पाटील की मदद की, जिससे महायुति को इस महत्वपूर्ण सीट से हाथ धोना पड़ा।
पुणे में हार-जीत के समीकरण और चुनावी नतीजे
पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में महाविकास आघाड़ी की उम्मीदवार हर्षदा जाधव-देशमुख ने जीत दर्ज कर इतिहास रचा, वह इस सीट से पहली महिला विधान परिषद सदस्य (MLC) बनी हैं। वहीं, पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी के कौस्तुभ गावडे ने शिवसेना समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सचिन सानप को हराकर जीत हासिल की, जिससे बीजेपी को कुछ राहत जरूर मिली। हालांकि, मराठवाड़ा और पुणे स्नातक सीट पर मिली करारी हार के बाद महायुति के घटक दलों के बीच आपसी विश्वास और चुनावी रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
