मुंबई में पानी की समस्या से राहत की तैयारी, कुओं को दुरुस्त करने के लिए BMC ने खोला खजाना

मुंबई। मुंबई में पानी की संभावित किल्लत से निपटने और पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) ने एक बड़ा कदम उठाया है। बीएमसी ने शहर के सभी प्रशासनिक वार्डों में स्थित पुराने पारंपरिक खुले कुओं की सफाई, गाद निकालने और मरम्मत के लिए प्रत्येक वार्ड को 30 लाख रुपये का शुरुआती फंड मंजूर किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य शुद्ध पेयजल की अनावश्यक खपत को कम करना और गैर-पीने योग्य कार्यों के लिए कुओं के पानी का उपयोग बढ़ाना है।

कुओं के जीर्णोद्धार के लिए 5 लाख रुपये प्रति कुआँ बजट

बीएमसी द्वारा तैयार किए गए मानक अनुमान के अनुसार, प्रति कुएँ की मरम्मत, सफाई और बुनियादी उपकरणों की स्थापना पर लगभग 4.82 लाख से 5 लाख रुपये तक का खर्च आएगा। चयनित कुओं में गाद हटाने के साथ-साथ 5,000 लीटर क्षमता की पानी की टंकी, 2 एचपी का मोटर पंप और आवश्यक बुनियादी ढांचा स्थापित किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त बजट के लिए अतिरिक्त नगर आयुक्त (प्रोजेक्ट्स) या नगर आयुक्त से विशेष मंजूरी भी ली जा सकेगी।

गैर-पीने योग्य कार्यों में होगा उपयोग

जीर्णोद्धार किए गए कुओं से मिलने वाले जल का उपयोग मुख्यतः उन गतिविधियों के लिए किया जाएगा जिनके लिए शोधित पीने के पानी की आवश्यकता नहीं होती। इसमें सड़कों की धुलाई और सफाई, उद्यानों में पौधों की सिंचाई, निर्माण कार्य, फ्लशिंग और शौचालयों की स्वच्छता जैसे कार्य शामिल हैं। इससे नगर पालिका के वॉटर टैंकरों के लिए भी स्थानीय स्तर पर पानी की उपलब्धता बढ़ेगी।

पेयजल आपूर्ति पर घटेगा दबाव

अनिश्चित मानसून और जल स्रोतों के घटने की आशंका को देखते हुए पारंपरिक कुओं को बैकअप के रूप में तैयार किया जा रहा है। बीएमसी प्रशासन का मानना है कि इस योजना के पूरी तरह लागू होने से शहर के जलाशयों और झीलों से सप्लाई होने वाले पीने के पानी पर दबाव काफी कम होगा और आपात स्थिति में नागरिकों को पानी के वैकल्पिक साधन उपलब्ध हो सकेंगे।

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