सोयाबीन-मक्का खरीदी को लेकर सरकार का फैसला, छुट्टी में भी खुली रहेंगी मंडियां

भोपाल। मध्यप्रदेश में सोयाबीन और मक्का की बंपर पैदावार और मंडियों में लगातार बढ़ती आवक को देखते हुए राज्य सरकार ने किसानों के हित में एक बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश सरकार ने अवकाश के दिनों में भी सभी कृषि उपज मंडियों को खुला रखने और सोयाबीन तथा मक्का की खरीदी व नीलामी प्रक्रिया अनवरत जारी रखने का निर्णय लिया है। इस कदम से किसानों को साप्ताहिक अवकाश या आगामी त्योहारों के दौरान मंडियां बंद होने के चलते अपनी उपज बेचने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा और मंडियों में लगने वाले लंबे जाम व असुविधा से भी बड़ी राहत मिलेगी।

किसानों के हितों की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री

मामले की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के सोयाबीन और मक्का उत्पादक किसानों की सुविधा तथा उनकी फसल के सुगम उपार्जन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसानों की हाड़-तोड़ मेहनत का उचित मूल्य दिलाना और उनके हितों की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। छुट्टियों के दिनों में भी उपार्जन और नीलामी चालू रहने से किसान अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी दिन मंडी पहुंचकर आसानी से फसल बेच सकेंगे, जिससे क्रय प्रक्रिया अधिक सुगम और पारदर्शी बनेगी।

मध्यप्रदेश में सोयाबीन उत्पादन में 32 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी का अनुमान

सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) द्वारा खरीफ सीजन के लिए जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष मध्यप्रदेश में सोयाबीन का कुल उत्पादन बढ़कर 57.16 लाख टन रहने का अनुमान जताया गया है। पिछले वर्ष राज्य में 43.24 लाख टन सोयाबीन का उत्पादन हुआ था, जिसकी तुलना में इस बार लगभग 32.2 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। बुवाई के रकबे में हुई इस बढ़ोतरी और बेहतर फसल आवक के मद्देनजर मंडियों का बिना किसी रुकावट के संचालित होना अत्यंत आवश्यक हो गया था।

भावांतर योजना के तहत 15 जनवरी तक होगी सोयाबीन की बिक्री

राज्य सरकार ने सोयाबीन उत्पादक किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से भावांतर भुगतान योजना को भी हरी झंडी दे दी है। इस योजना के अंतर्गत राज्य की अधिसूचित मंडियों में सोयाबीन बिक्री की समय-सीमा 22 अक्टूबर से 15 जनवरी तक तय की गई है। इसके माध्यम से यदि किसानों को घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य या संदर्भ मूल्य से कम दाम मिलते हैं, तो उस अंतर की भरपाई सरकार द्वारा सीधे किसानों के खाते में की जाएगी। अब इसमें मक्का को भी शामिल कर लिए जाने और छुट्टियों में भी खरीद जारी रहने से लाखों किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।

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