पंत की तरह मयंक के लिए भी आसान नहीं था वापसी का सफर, कोच देवेंद्र ने खोले राज

न्यूजीलैंड के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी तेज गेंदबाजी का लोहा मनवाने वाले युवा तेज गेंदबाज मयंक यादव के करियर का सफर आसान नहीं रहा है। पीठ के निचले हिस्से (लोअर बैक) की गंभीर सर्जरी के बाद मैदान पर वापसी करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था, जिसकी तुलना उनके कोच देवेंद्र शर्मा ने भारतीय स्टार ऋषभ पंत के संघर्ष से की है। पूर्व रणजी क्रिकेटर देवेंद्र ने एक विशेष बातचीत में साझा किया कि एक वक्त ऐसा भी आया था जब यह सवाल उठने लगा था कि क्या ये दोनों खिलाड़ी अपनी पुरानी लय और फिटनेस हासिल कर पाएंगे या नहीं। हालांकि, मयंक और ऋषभ दोनों ने ही अपनी मजबूत इच्छाशक्ति के बल पर सभी आशंकाओं को गलत साबित करते हुए शानदार वापसी की है।

सर्जरी के बाद का संघर्ष और कोच की प्रेरणा

न्यूजीलैंड में सर्जरी की प्रक्रिया से गुजरने के बाद मयंक यादव मानसिक रूप से काफी चिंतित हो गए थे। उन्होंने अपने कोच देवेंद्र से साझा किया था कि चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार रिहैबिलिटेशन में कम से कम छह महीने का लंबा समय लगेगा। उस कठिन दौर को याद करते हुए कोच देवेंद्र ने बताया कि उन्होंने मयंक को ढांढस बंधाया और कहा कि यह समय भी बीत जाएगा, बस किसी भी परिस्थिति में अपनी हिम्मत नहीं हारनी है। शुरुआती दौर में आलोचकों का यह भी मानना था कि मयंक अब कभी अपनी पुरानी रफ्तार से गेंदबाजी नहीं कर पाएंगे, लेकिन तेज गेंदबाज ने अपनी पुरानी गति बरकरार रखकर सभी आलोचकों को करारा जवाब दिया है।

शाकाहारी जीवनशैली और भगवान कृष्ण की भक्ति के बूते 150 की रफ्तार

कोच देवेंद्र ने मयंक के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि जब उनके पिता प्रभु यादव उन्हें सोनेट क्रिकेट क्लब लेकर आए थे, तब मयंक के पैर और जांघें काफी कमजोर हुआ करती थीं। उनकी शारीरिक कमजोरी को देखकर कोच ने उन्हें मांसाहार के सेवन की सलाह दी थी, लेकिन पक्के कृष्ण भक्त होने के कारण मयंक ने कभी नॉन-वेज को हाथ नहीं लगाया। आज भी वे पूरी तरह शाकाहारी भोजन, पनीर और टोफू के सहारे अपनी ऊर्जा बनाए रखते हैं और 150 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से गेंदबाजी करते हैं।

भविष्य के लिए टेस्ट और वनडे का बड़ा लक्ष्य

कोच देवेंद्र का मानना है कि मयंक में अपार संभावनाएं हैं और उन्हें केवल टी20 तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने मयंक को भारतीय टेस्ट और एकदिवसीय टीम में जगह बनाने के लिए अपने ओवरों का दायरा बढ़ाने की सलाह दी है। कोच के मुताबिक, जिस दिन मयंक बिना किसी शारीरिक परेशानी के रोजाना तीस ओवर फेंकने का अभ्यास करने लगेंगे, वे राष्ट्रीय टेस्ट और वनडे टीम के नियमित खिलाड़ी बन जाएंगे। उनकी पिछली शारीरिक कमजोरियों को दूर करने के लिए राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी में भी विशेष रूप से काफी पसीना बहाया गया है, जिसके परिणाम अब मैदान पर साफ नजर आ रहे हैं।

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