राजस्थान CET में 40 लाख से ज्यादा आवेदन, दिसंबर में परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों की नजरें

जयपुर। राजस्थान में सरकारी नौकरियों की चाह रखने वाले प्रदेश के लाखों अभिलाषाओं के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (आरएसएसबी) की ओर से आयोजित होने वाली समान पात्रता परीक्षा (सीईटी) के अंतर्गत सीनियर सेकंडरी तथा स्नातक स्तर, दोनों ही चरणों की परीक्षाओं में नॉर्मलाइजेशन (प्रसामान्यीकरण) की प्रक्रिया को इस बार भी अनिवार्य रूप से लागू रखा जाएगा। विभिन्न पालियों (शिफ्टों) में आयोजित होने वाली इन परीक्षाओं के दौरान प्रश्नपत्रों के कठिनाई स्तर में आने वाले संभावित अंतर को तार्किक रूप से संतुलित करने के उद्देश्य से बोर्ड इसी पद्धति के आधार पर अभ्यर्थियों के प्राप्तांकों का निर्धारण करेगा और अंतिम चयन सूची तैयार करेगा। इन दोनों परीक्षाओं के लिए प्रदेशभर से 40 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने अपने आवेदन पंजीकृत कराए हैं। चयन बोर्ड के अध्यक्ष आलोक राज ने सोमवार को इस संबंध में आधिकारिक जानकारी साझा की है।
दिसंबर में सीनियर सेकंडरी परीक्षा और जनवरी में स्नातक स्तर की परीक्षा
समान पात्रता परीक्षा के तहत सीनियर सेकंडरी स्तर की परीक्षाएं आगामी 1 से 3 दिसंबर के मध्य संपन्न कराई जाएंगी। निर्धारित शेड्यूल के अनुसार यह परीक्षा तीन दिनों के भीतर कुल छह अलग-से शिफ्टों में आयोजित होगी। इस श्रेणी के लिए लगभग 23.56 लाख आवेदन प्राप्त हुए थे, हालांकि प्रशासनिक संवीक्षा के उपरांत इनमें से करीब 12 हजार अभ्यर्थियों ने अपने आवेदन वापस ले लिए हैं। इसके विपरीत, सीईटी स्नातक स्तर की परीक्षा का आयोजन जनवरी 2027 के दौरान प्रस्तावित किया गया है, जिसके लिए लगभग 17.15 लाख उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया है। इस प्रकार दोनों चरणों को मिलाकर कुल आवेदकों का आंकड़ा चालीस लाख के पार पहुंच चुका है।
चौदह प्रमुख सेवाओं के द्वार खोलेगी सीनियर सेकंडरी सीईटी
सीईटी सीनियर सेकंडरी स्तर के अंतर्गत प्राप्त अंकों के आधार पर सफल अभ्यर्थियों को चौदह विभिन्न सरकारी सेवाओं की आगामी भर्तियों में भाग लेने का सुनहरा अवसर प्राप्त होगा। इन प्रमुख सेवाओं और पदों में वनपाल, राजस्थान पुलिस कांस्टेबल, जमादार ग्रेड-द्वितीय, छात्रावास अधीक्षक, लिपिक ग्रेड-द्वितीय तथा कनिष्ठ सहायक जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल हैं। वहीं दूसरी ओर, स्नातक स्तर की समान पात्रता परीक्षा के माध्यम से बारह विभिन्न सेवाओं के अंतर्गत भर्तियों का मार्ग प्रशस्त होगा। इनमें पटवारी, ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ), कनिष्ठ लेखाकार, तहसील राजस्व लेखाकार, प्लाटून कमांडर, उप-जेलर और पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) जैसे प्रतिष्ठित पद सम्मिलित हैं। इस प्रकार यह पात्रता परीक्षा राज्य में प्रशासनिक व अन्य सरकारी नियुक्तियों का मुख्य द्वार साबित होगी।
नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया, नेगेटिव मार्किंग और न्यूनतम उत्तीर्णांक
बोर्ड अध्यक्ष आलोक राज ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा के विभिन्न चरणों और पालियों में आयोजित होने के कारण प्रश्नपत्रों के कठिनाई स्तर में भिन्नता स्वाभाविक है। इसी विसंगति को पाटने और सभी अभ्यर्थियों के साथ न्याय सुनिश्चित करने के लिए नॉर्मलाइजेशन फार्मूले को अपनाया जाएगा, जिसके माध्यम से विभिन्न शिफ्टों के अंकों को एक समान मानक पर लाया जाएगा। परीक्षा में गलत उत्तरों के चयन पर एक-तिहाई (0.33) अंकों की कटौती का प्रावधान रखा गया है। इसके अतिरिक्त, परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए न्यूनतम अर्हक अंक भी तय किए गए हैं, जिसके तहत सामान्य श्रेणी के परीक्षार्थियों को न्यूनतम 40 प्रतिशत तथा आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को कम से कम 35 प्रतिशत अंक अर्जित करना अनिवार्य होगा।
तीन वर्षों तक वैध रहेगा स्कोरकार्ड
समान पात्रता परीक्षा के अंतर्गत अभ्यर्थियों द्वारा प्राप्त किए गए अंकों की वैधता अवधि तीन वर्ष निर्धारित की गई है। इसका अर्थ यह है कि परीक्षार्थी इस निर्धारित समयावधि के भीतर प्राप्त अपने स्कोरकार्ड का उपयोग विभिन्न सरकारी विभागों की संबंधित भर्तियों में पात्रता सिद्ध करने के लिए कर सकेंगे। व्यापक स्तर पर होने जा रही इन परीक्षाओं को लेकर प्रशासनिक स्तर पर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं तथा लाखों युवाओं की निगाहें अब परीक्षा और नॉर्मलाइजेशन के परिणामों पर टिकी हुई हैं।
