अदालत में आजम खां की भावुक अपील, जज के सामने हाथ जोड़कर रखी अपनी बात

गाजियाबाद। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की विशेष अदालत में सुनवाई के दौरान समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खां अत्यंत भावुक हो गए और अदालत कक्ष के भीतर रो पड़े। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा मांगी गई कस्टडी रिमांड की अर्जी को खारिज करते हुए उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में डासना जेल भेजने का आदेश जारी कर दिया। शनिवार को रामपुर जेल से रिहाई मिलते ही प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने उन्हें हिरासत में ले लिया था, जिसके बाद उन्हें गाजियाबाद की विशेष अदालत में प्रस्तुत किया गया।
अदालत के समक्ष भावुकता और राजनीतिक द्वेष का आरोप
विशेष न्यायाधीश अवनीश कुमार पांडेय के समक्ष पेश किए जाने के दौरान आजम खां ने हाथ जोड़कर अपनी बात रखी। उन्होंने अत्यंत भावुक स्वर में कहा कि राजनीतिक बदले की भावना के कारण उनका सबकुछ समाप्त हो चुका है और अब उनके पास कहने या बोलने के लिए कुछ भी शेष नहीं बचा है। अदालत परिसर में उनकी उपस्थिति के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता के तर्क और वित्तीय गड़बड़ी से इनकार
आजम खां के अधिवक्ता एवं पूर्व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता महेश यादव ने न्यायालय में ईडी की पूरी कानूनी कार्रवाई पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनके मुवक्किल के बैंक खातों में एक भी पैसे की वित्तीय अनिमियतता या हेरफेर सिद्ध नहीं हुई है। अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि शासन के इशारे पर यह पूरी कार्रवाई केवल राजनीतिक प्रतिशोध के तहत की जा रही है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि जांच एजेंसी को पूछताछ ही करनी थी, तो वह पूर्व में भी बी-वारंट हासिल कर जेल के भीतर पूछताछ की प्रक्रिया पूरी कर सकती थी।
जांच एजेंसी की मंशा पर सवाल और उच्च न्यायालय का रुख करने का निर्णय
बचाव पक्ष के वकील ने आरोप लगाया कि केंद्रीय जांच एजेंसी सत्ता पक्ष के दबाव में काम कर रही है और विपक्षी नेताओं को निशाना बना रही है। उन्होंने घोषणा की कि ईडी द्वारा की गई इस गिरफ्तारी और पूरी कानूनी प्रक्रिया को असंवैधानिक मानते हुए इसके खिलाफ शीघ्र ही उच्च न्यायालय में याचिका दायर की जाएगी और इस दंडात्मक कार्रवाई को कानूनी स्तर पर चुनौती दी जाएगी।
