बुखार और उल्टी से परेशान 100 छात्र, स्वास्थ्य विभाग ने स्कूल बंद करने का दिया आदेश
![]()
वायनाड। केरल के वायनाड जिले के कलपेट्टा स्थित एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान में स्वास्थ्य से जुड़ी एक गंभीर घटना सामने आने के बाद प्रशासन ने त्वरित कदम उठाए हैं। यहाँ एक स्थानीय स्कूल में पढ़ने वाले लगभग एक सौ विद्यार्थियों को अचानक तेज बुखार और उल्टी की भयंकर शिकायत होने लगी, जिसके बाद हड़कंप मच गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रभावित बच्चों को तत्काल उपचार के लिए क्षेत्र के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहाँ उनका इलाज किया गया। इस पूरे मामले की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की गई है।
स्वास्थ्य विभाग की जांच और दूषित जल का खुलासा
बच्चों के बीमार पड़ने की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की एक विशेष विशेषज्ञ टीम ने तत्काल हरकत में आते हुए 'सेंट जोसेफ हायर सेकेंडरी स्कूल' के परिसर का गहन निरीक्षण किया। अधिकारियों द्वारा की गई शुरुआती जाँच-पड़ताल में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि स्कूल परिसर के भीतर पानी की आपूर्ति के लिए बनी मुख्य पानी की टंकी और कुएं की लंबे समय से सफाई नहीं की गई थी और न ही उन्हें कीटाणुमुक्त (डिसइफेक्ट) बनाया गया था। माना जा रहा है कि दूषित पानी के सेवन के कारण ही इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को एक साथ स्वास्थ्य संबंधी गंभीर शिकायतें हुईं।
स्कूल को एक सप्ताह तक बंद रखने और सफाई के कड़े निर्देश
इस अप्रिय स्थिति को और अधिक फैलने से रोकने और बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने स्कूल प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि संस्थान को आगामी एक सप्ताह के लिए पूरी तरह से बंद रखा जाए। इस अवकाश की अवधि के दौरान स्कूल प्रबंधन को यह सख्त आदेश दिया गया है कि वे सभी कुओं, पानी की टंकियों और पूरे शैक्षणिक परिसर की उच्च स्तर पर साफ-सफाई तथा संपूर्ण कीटाणुशोधन की प्रक्रिया को पूरा करवाएं ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो सके।
निरीक्षण दल की अगुवाई और प्रशासनिक कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग के इस उच्चस्तरीय औचक निरीक्षण दल का नेतृत्व कलपेट्टा जनरल अस्पताल के रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर श्याम ने किया। इस पूरी जाँच प्रक्रिया और राहत कार्य में स्वास्थ्य विभाग के अन्य प्रमुख अधिकारी भी पूरी मुस्तैदी से जुटे रहे, जिनमें हेल्थ इंस्पेक्टर पी. ए. नवास तथा जूनियर हेल्थ इंस्पेक्टर सुरेश कुमार एवं बिबिन वर्गीस की महत्वपूर्ण भूमिका रही। स्थानीय प्रशासन स्थिति पर लगातार कड़ी नजर बनाए हुए है ताकि प्रभावित बच्चों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सके।
