बेटी के पैदा होने पर टैक्सी ड्राइवर ने निकाली शोभा यात्रा, बांटी 1 क्विंटल मिठाई

देश में आज भी कई जगहों पर जन्म से पहले ही गर्भ में लिंग की पहचान कर बच्चियों को धरती पर आने से रोक दिया जाता है. ऐसे में महाराष्ट्र के अकोला में एक टैक्सी ड्राइवर ने बेटी के पैदा होने पर जिस शानदार अंदाज में जश्न मनाया वह काबिले तारीफ है.
    चौबे परिवार ने बेटी के जन्म लेने पर 1 क्विंटल की मिठाई बांटीपिछले वर्ष राजस्थान में भी एक परिवार ने निकाली थी शोभा यात्रा2011 की जनगणना में देश का लिंगानुपात प्रति हजार पर 940

देश में आज भी कई जगहों पर बेटी को जन्म लेने से पहले ही मार दिया जाता है. जन्म से पहले गर्भ में लिंग की पहचान कर बच्चियों को धरती पर आने से रोक दिया जाता है. इस कुप्रथा को रोकने के लिए लंबे समय से जागरुकता अभियान भी चलाया जाता रहा, लेकिन इसका अपेक्षित परिणाम नहीं निकला और देश में लिंगानुपात का अंतर कम नहीं हो रहा है. हालांकि एक टैक्सी ड्राइवर ने बेटी के जन्म लेने पर जिस तरह का जश्न मनाया वो अन्य लोगों के लिए नजीर हो सकता है.

महाराष्ट्र के अकोला में एक टैक्सी ड्राइवर ने बेटी के पैदा होने पर जिस शानदार अंदाज में जश्न मनाया वो उन कई परिवारों की आंखें खोलने वाला है जिनके यहां आज भी बेटी की जगह बेटे को ही प्राथमिकता दी जाती है. टैक्सी ड्राइवर के घर बेटी के जन्म लेने से उसके घरवालों ने शानदार अंदाज में अपने नए मेहमान का स्वागत किया.

अकोला के चौबे परिवार में जन्मी बिटिया की किस्मत अच्छी रही क्योंकि उसके धरती पर कदम रखने पर घरवालों ने जमकर जश्न मनाया. बेटी के पैदा होने पर पूरे इलाके में 1 क्विटंल मिठाई बंटवाई गई. यही नहीं इस परिवार ने पूरे शहर में शोभा यात्रा भी निकाली. चौबे परिवार में जन्मी बच्ची की गांव से स्वागत जुलूस निकालकर सरकार की बहुचर्चित 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' का संदेश भी दिया.

बेटी के पैदा होने पर शोभा यात्रा निकालने की यह पहली घटना नहीं है. इससे पहले पिछले साल राजस्थान के झुंझुनू में भी ऐसा खूबसूरत नजारा देखने को मिला था, जब एक परिवार ने बेटी के पैदा होने पर गाजे-बाजे के साथ नवजात शिशु और उसकी मां को रथ पर बैठाकर शोभायात्रा निकाली.

इस शोभा यात्रा की खास बात यह रही कि इसमें परिवार के रिश्तेदारों के साथ-साथ झुंझुनू के जिला कलेक्टर भी शामिल हुए और उन्होंने इस यात्रा को स्वयं रवाना भी किया.

देश में लिंगानुपात का अंतर बेहद खतरनाक स्तर पर है. 2011 की जनगणना के अनुसार प्रति एक हजार पुरुषों पर 940 महिलाएं हैं. कई राज्यों में यह लिंगानुपात 900 से भी कम के स्तर पर है. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के अलावा पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ जैसे संपन्न और बेहद शिक्षित राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में लिंगानुपात बेहद चिंताजनक स्थिति पर पहुंच गया है.

दिल्ली में यह अनुपात 866 है तो पंजाब में 893, हरियाणा में 877 और चंडीगढ़ में 818 तक नीचे गिर गया है. जबकि उत्तर प्रदेश में यह प्रति हजार पुरुषों पर 912 महिलाएं हैं.

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