लोकवाणी में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने की मन की बात

रायपुर। सभी श्रोताओं को नमस्कार, जय जोहार !- आज हमारे साथ स्टूडियो में मौजूद हैं, छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल जी। आप आज मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘लोकवाणी’ के दूसरे प्रसारण के माध्यम से, छत्तीसगढ़ की जनता के सवालों के जवाब भी देंगे, और अपने विचार भी रखेंगे।
– हम आकाशवाणी की ओर से, माननीय मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल जी का हार्दिक अभिनंदन करते हैं, स्वागत करते हैं।
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
– जय जोहार। सबले पहिली, मे ह जम्मो रेडियो सुनइया मन के, स्वागत करत हवं। आम जनता, खेत-खार म काम-बुता करत किसान भाई-बहिनी मन, घर म अपन काम-बुता करत रेडियो सुनैया हमर दीदी-महतारी मन, सियान अउ संगवारी मन, नोनी-बाबू मन, जम्मो ल नमस्कार ! जय जोहार !
– आज विश्व साक्षरता दिवस हे। साक्षरता याने अक्षर ज्ञान। जेन मन क, ख, ग, घ जइसन अक्षर अऊ 1,2,3,4 गिनती पढे़, अऊ लिखे बर सीख जाथे, ओला साक्षर कहे जाथे। लेकिन जेन मन नहीं सीख पायें, ओला निरक्षर कहे जाथे।
– साक्षर मन ला लगातार पढ़त-लिखत रहे बर लागथे। जे मा ओहा आघू अपन काम-बुता के चीज ला लिख पढ़ सकय, अऊ अपन जिनगी ला उजियार बना सकय।
– आज के दिन ये संकल्प लिये जाथे के हमर प्रदेश के जम्मो रहवइया मन साक्षर होंय।
– एक करू गोठ कहिथौं। हमर छत्तीसगढ़ म सन् 2011 के जनगणना अनुसार 70.28 प्रतिशत आबादी साक्षर रिहिस हावय। जे म पुरूष आबादी 80.27 प्रतिशत, अऊ महिला आबादी 60.27 प्रतिशत रिहिस।
– साक्षरता के स्तर का आकलन हर 10 साल में होता है अर्थात इसका नया आंकड़ा 2021 की जनगणना के बाद आयेगा। लेकिन एक अनुमान है कि 2011 से 2018 के बीच हुए प्रयासों के बावजूद आज भी राज्य में एक चौथाई जनता अर्थात 25 प्रतिशत लोग निरक्षर है।
– मेरा मानना है कि साक्षरता तो शिक्षा का द्वार है। यदि प्रदेश की 25 प्रतिशत जनता साक्षरता की चौखट तक भी नहीं पहुंची है, तो मानव विकास के तमाम आंकड़े बेमानी हैं। कुपोषण, शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर, बीमारियांे आदि को लेकर यदि जागरूकता में कहीं कोई कमी है, तो इसका सीधा रिश्ता साक्षरता से जुड़ता है।
– ऐसी स्थिति में कोई कहे कि हमने राज्य को विकास के शिखर पर पहुंचा दिया है, तो उसे सफेद झूठ ही माना जायेगा।
– आज विश्व साक्षरता दिवस के अवसर पर यह कहना शायद अनुचित लगे लेकिन यह बेहद दुःख का विषय है कि 31 मार्च 2018 से राष्ट्रीय स्तर पर ‘साक्षरता’ का कार्यक्रम ही बंद कर दिया गया है। इस कारण न केवल निरक्षरों को साक्षर बनाने की गति धीमी हुई है, बल्कि इस काम में लगे हजारों कर्मचारियों के रोजगार पर भी संकट आ गया है। – आज इस वातावरण में जब विश्व साक्षरता दिवस मनाया जायेगा तो हमारे पास साक्षरता के थमे हुए प्रयास और रूके हुए आंकड़े होंगे।
– लेकिन हमें हताश नहीं होना है।
– आज ‘विश्व साक्षरता दिवस’ के अवसर पर मैं आप सबको बधाई और शुभकामनाएं देते हुए, यह कहना चाहता हूं कि प्रदेश की एक चौथाई आबादी को साक्षर बनाना, हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
– ‘साक्षर भारत’ का ‘राष्ट्रीय अभियान’ विगत डेढ़ साल से बंद होने का असर हमारे छत्तीसगढ़ में भी पड़ेगा। हम सबको मिलकर यह तय करना है कि अपने प्रदेश की शेष 25 प्रतिशत आबादी को कैसे साक्षर बनायेंगे।
– मेरा यह भी मानना है कि जनभागीदारी से, हम और आप मिलकर इस बारे में कोई अच्छा फैसला कर लेंगे। इस विषय पर मैं प्रदेश की साक्षर और सक्षम जनता से अपील करता हूं कि वे अपना योगदान देने के लिए हरदम तैयार रहें।
एंकर
– माननीय मुख्यमंत्री जी, सबसे पहले हम सुनते हैं, सूरजपुर जिले के मधुसूदन प्रजापति की आवाज, जिसमें उन्होंने लोकवाणी के बारे में अपने उद्गार व्यक्त किए हैं। उनकी आवाज में लवन निवासी प्रियांशु पाण्डेय सहित कई श्रोताओं की आवाज को शामिल माना जाए, जिन्होंने ऐसे ही विचार व्यक्त किए हैं।
श्री मधुसूदन प्रजापति की आवाज
– (सर मैं मधुसूदन प्रजापति बोल रहा हूँ, विकासखंड-प्रेमनगर, जिला सूरजपुर, छत्तीसगढ़ से। जी सर, आज का जो विषय है उस विषय के लिये मैं माननीय मुख्यमंत्री जी को बहुत-बहुत बधाई और धन्यवाद देना चाहूँगा। हमको समाचार के माध्यम से उनसे जुड़ने का एक अच्छा अवसर मिला है। और आज का मेरा एक सवाल है। सर जैसे युवा और शिक्षा को लेकर हालांकि शिक्षा में और किस तरह से बदलाव किया जाये। ताकि शिक्षा प्राप्त करके युवा, आज कल के युवा जो बेरोजगार रहते है, उनके लिये कुछ इस तरह से शिक्षा का व्यवस्था किया जाये, ताकि युवा पढ़ लिखकर बेरोजगार ना घूमें।’)
एंकर
– और अब सुनते हैं रायगढ़ निवासी कुलमाड़ी महानंदिया की बात।
(‘माननीय मुख्यमंत्री महोदय को अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण के लिए मैं आपको आभार व्यक्त करता हूं।’)
माननीय मुख्यमंत्री का जवाब
– बहुत धन्यवाद प्रजापति जी, महानंदिया जी और अन्य साथियों।
– ‘लोक वाणी’ को आप लोगों का प्यार मिल रहा है, यह बड़ी खुशी की बात है। हम चाहते हैं कि हमारे महान नेताओं की बदौलत जो आजादी मिली है, जो संविधान मिला है, जो लोकतंत्र का वरदान मिला है, लगातार मजबूत हो। इसके लिए अभिव्यक्ति की आजादी के हर माध्यम का उपयोग हम करेंगे। ‘लोकवाणी’ इसी दिशा में एक विनम्र प्रयास है।
– जो लोग बरसों से अन्याय सह रहे हैं, बरसों से न्याय के लिए लड़ रहे हैं, जो बरसों से उन सामान्य सुविधाओं और अधिकारों से वंचित हैं, जो उन्हें संविधान के तहत मिलने चाहिए, इनके लिए हमारी सरकार ने सबसे पहले काम किए हैं। हमारा हर कदम सामाजिक न्याय की दिशा में बढ़ा है।
– इसी क्रम में हमने पहले किसानों, आदिवासियों, गरीब व मध्यम वर्गीय परिवारों की लंबे समय से उपेक्षित मांगों को पूरा किया।
– जनसंख्या के अनुपात में अनुसूचित जनजाति को 32 प्रतिशत, अनुसूचित जाति को 13 प्रतिशत, अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत तथा सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय, सामाजिक न्याय की दिशा में उठाया गया कदम है।
– मुझे खुशी है कि प्रदेश के सर्वसमाज ने हमारी सरकार की भावनाओं को समझा है। सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर तबकों को न्याय देने के लिए आप सब ने सरकार के हाथ से हाथ मिलाया है, इसके लिए मैं इस मंच से पूरे प्रदेश की जनता को धन्यवाद देता हूं।
एंकर
– माननीय मुख्यमंत्री जी, आज सबसे ज्यादा सवाल शिक्षाकर्मियों के हैं। अगर सबके नाम लिए जाएं तो शायद इस कार्यक्रम का पूरा समय ही निकल जाए। इसलिए कुछ लोगों का नाम लेता हूं।
– जशपुर से विवेक दुबे, अकरम जावेद, मरवाही से प्रशांत कुमार मानिकपुरी, पेण्ड्रा से राजेश कुमार, अम्बिकापुर से सच्चिदानंद नायक, रायगढ़ से राधा गुप्ता, महासमुन्द से सुनीता नायक धमधा से बी.पी. भोई, धमतरी से भीखम लाल साहू, मैनपुर से तोमन लाल साहू, सुकमा से कृष्ण कुमार पुजारी, देवभोग से शम्भू कुशवाहा, कोण्डागांव से नितेन्द्र, भिलाई से मूलचंद यादव और राजनांदगांव से पुष्पा तिवारी।
– इन सबने पूछा है कि शिक्षाकर्मियांे के संविलियन के बारे में राज्य सरकार की क्या नीति है? शेष शिक्षाकर्मियों का संविलियन कब तक होगा और स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा लगभग 15 हजार व्याख्याताओं की भर्ती की प्रक्रिया कब पूरी होगी ?
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
– शिक्षाकर्मियों के संविलियन के मामले में सबसे ज्यादा सवाल आए हैं। मैं आप सबको आपकी जागरूकता के लिए बधाई देता हूँ।
– आपको याद होगा कि चुनाव के पहले आपके संविलियन और तमाम सुविधाओं के लिए आपके साथ मिलकर, हमने भी कितनी सीधी और बड़ी लड़ाई लड़ी थी।
– निश्चित तौर पर आप लोगों की हिम्मत और सहयोग के बिना ये लड़ाई जीतना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन था।
– सरकार बनने के बाद हमने उस जीत को आगे बढ़ाया है।
– 18 साल में पहली बार शिक्षाकर्मियों को ट्रांसफर की सुविधा दी।
– राज्य में 1 लाख 45 हजार शिक्षाकर्मी हैं, जिसमें से 1 लाख 25 हजार का संविलियन कर लिया गया है।
– शेष का संविलियन भी निर्धारित समय-सीमा, उनकी 8 साल की सेवा पूरी होने पर हो जाएगा।
– नियमित होने से वेतन विसंगति का मामला भी हल हो जाएगा।
– जो छोटी-मोटी समस्याएं आती रहेंगी, उसका समाधान भी होता रहेगा, आप लोगों को कोई चिन्ता करने की जरूरत नहीं पडे़गी।
– जहां तक 15 हजार शिक्षकों की भर्ती का मामला है, तो मैं आपको बताना चाहता हूं, इसमें कहीं कोई दिक्कत नहीं है। व्यापम द्वारा परीक्षा ली जा चुकी है। परिणाम आते ही यह कार्य आगे बढ़ाया जाएगा।
– मैं आप सब से आग्रह करता हूँ कि अब अपना सौ प्रतिशत योगदान देकर बच्चों का भविष्य बनाने में जुट जाएं।
– सही बात है कि हर बड़ी उपलब्धि के पीछे गुरूजनों का योगदान होता है, जो सामान्यतः दिखाई नहीं देता।
– लेकिन शिक्षक-शिक्षिकाओं ने हर युग में किसी बात की परवाह किए बिना अपनी जिम्मेदारी निभाई है। तभी आज दुनिया को नए ज्ञान, शोध, अनुसंधान का लाभ मिला है।
– मैं अपील करता हूं कि आज की पीढ़ी के गुरूजन भी हमारी नई पीढ़ी का भविष्य गढ़ने में अहम भूमिका निभाएं।
एंकर
– अतिथि शिक्षकों/शिक्षा मितान/शिक्षा मित्र इस तरह की योजनाओं के बारे में राज्य सरकार की क्या नीति है ? क्या इसके माध्यम से रोजगार की संभावनाएं समाप्त हो गई हैं ?
– मुख्यमंत्री महोदय जी, इस संबंध में बहुत सारे सवाल आए हैं। बिलासपुर से प्रसन्न दुबे, साजा से धीरेन्द्र जायसवाल, राजनांदगांव से अनवर खान और कबीरधाम से डॉ. समेता पटेल सहित अनेक साथियों की जिज्ञासाएं आपके जवाब से शांत होंगी।
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
– आप लोगों को इस बारे में बेहतर जानकारी है कि शिक्षकों की कमी की स्थिति में ऐसे पद बनाकर मानदेय के आधार पर शिक्षा का काम चलाया जा रहा था।
– बहुत सारी समस्याएं इसलिए थीं क्योंकि शिक्षकों की भर्ती प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से होती थीं।
– हमारी सरकार ने आते ही, एक ओर तो नियमित भर्ती की प्रक्रिया शुरू की, वहीं दूसरी ओर प्लेसमेंट एजेंसियों की दुकानदारी बंद की। विशेष परिस्थितियों में काम चलाने के लिए अतिथि शिक्षकों की भर्ती का अधिकार ‘शाला प्रबंधन समितियों’ को दिया गय है।
– अब शिक्षकों का मानदेय शाला प्रबंधन समितियों के माध्यम से दिया जाता है, जिसके कारण कोई ‘प्लेसमेंट एजेंसी’ डंडी नहीं मार सकती।
– हम लगातार शिक्षा के क्षेत्र में बड़े निर्णय ले रहे हैं जिससे जल्दी ही बहुत सारी समस्याएं समाप्त हो जाएंगी।
एंकर
– माननीय मुख्यमंत्री जी, बड़ी संख्या में श्रोता यह जानना चाहते हैं कि कॉलेजों में सहायक प्राध्यापकों की कमी दूर करने के लिए जो आपने लगभग डेढ़ हजार सहायक प्राध्यापकों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू की थी, वह अधर में क्यों अटक गई। पिथौरा से रविशंकर बंछोर, महासमुन्द से आशुतोष पुुरी गोस्वामी, बालोद से डॉ. जिज्ञासा पाण्डेय, कैलाश यादव, मुंगेली से सरस देवांगन, सक्ती से अजय कुमार, खैरागढ़ से सुरेन्द्र कुमार, रायपुर से शिवेन्द्र बहादुर और राजनांदगांव से राजीव जंघेल, संतोष मानिकपुरी जैसे कई श्रोता यह जानना चाहते हैं कि कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती कब तक होगी व परीक्षा की तिथि कब तक आ जायेगी ?
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
– हमने कॉलेजों में लगभग 1500 प्राध्यापकों की कमी पूरा करने के लिए प्रक्रिया शुरू की थी लेकिन माननीय हाईकोर्ट से स्टे हो जाने
के कारण कार्यवाही रूक गई है। माननीय हाईकोर्ट में शासन का पक्ष रखने प्राथमिकता से कार्यवाही की जा रही हैं। हम चाहते हैं कि विधि-मान्य तरीके से सारी प्रक्रिया पूरी हो और कॉलेजों को प्राध्यापक मिल सकें। मुझे लगता है कि इस मामले में हमें जल्दी ही सफलता मिलेगी।
एंकर
– माननीय मुख्यमंत्री जी, बिलासपुर निवासी, बिहारी जायसवाल जी ने आपके लिए एक खास संदेश भेजा है आइए उन्हीं की आवाज में सुनते हैं और फिर आप अपने विचार साझा करना चाहेंगे।
– मैं मुख्यमंत्री जी को बधाई देना चाहता हूं उनके माध्यम से मेरी बेटी की पढ़ाई आगे संभव हो पाई है। मेरी छोटी सी किराना दुकान है और आमदनी बहुत कम है। जिसकी वजह से बच्चों का खर्च उठा पाना संभव नहीं है। मेरी बेटी डीएवी स्कूल में शिक्षा के अधिकार के तहत पढ़ाई कर रही है। पहले निःशुल्क शिक्षा का प्रावधान नहीं था हमारी गरीबी इतनी थी कि हम हताश हो चुके थे कि हम अपने बच्चे को अच्छी शिक्षा नहीं दे पायेंगे। पर भूपेश सरकार द्वारा शिक्षा के अधिकार योजना से मेरी बेटी को निःशुल्क शिक्षा मिल पाया है। यह योजना 12वीं की पढ़ाई तक लाभान्वित करती है इसके लिए भूपेश सरकार को मैं बहुत धन्यवाद देना चाहूंगा ।
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
– जायसवाल जी, आपको यह संदेश भेजने के लिए धन्यवाद। मुझे यह कहते हुए बहुत खुशी है कि हमारी एक पहल से सिर्फ आपकी बेटी को ही नहीं, बल्कि प्रदेश में 4 हजार बच्चों को लाभ मिला है। राज्य सरकार सभी बच्चों और विशेषकर बालिका शिक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।
– आपको यह जानकर अच्छा लगेगा कि छत्तीसगढ़, ऐसी पहल करने वाला देश का सबसे पहला राज्य बन गया है, जिसने शिक्षा का अधिकार कानून को विस्तार दिया है। जनता को यह अधिकार हमारी केन्द्र की यूपीए सरकार ने दिया था जिसे आगे बढ़ाने का काम छत्तीसगढ़ की हमारी राज्य सरकार ने किया है।
– हमने शिक्षा के अधिकार के तहत निःशुल्क शिक्षा देने की सीमा 8वीं से बढ़ाकर कक्षा 12वीं तक कर दिया है, जिससे इस साल 4 हजार बच्चों को 9वीं कक्षा में प्रवेश मिला है और उनके आगामी कक्षा में जाने के साथ यह सिलसिला भी आगे बढ़ता जाएगा।
एंकर
– माननीय मुख्यमंत्री जी, एक रोचक संयोग है कि दो अलग-अलग गांवों से एक ही नाम के दो लोग, आपसे बड़ा अहम सवाल कर रहे हैं। लीजिए उनकी ही आवाज में बात सुन लीजिए।
– गुलाब राम साहू, ग्राम-छेल्का की आवाज।
– (मोर नाम गुलाब राम साहू है, सर मैं छेल्का साजा जिला बेमेतरा से बोलत हौं मोर सवाल ये है जइसे लईका मन पढ़ लिख के कंपनी मन मा काम मंगे ला जाथे, तो कंपनी सीमेंट प्लांट है, स्टील प्लांट है और बहुत प्लांट है, रायपुर में भिलाई में वहां हमर छत्तीसगढ़िया लड़का मन ला काम मिले नहीं, और बाहर से जो लड़का मन आथे यू.पी. के, बिहार के, ओमन ल पहली काम मिल जाथे और हमर लोकल छत्तीसगढ़िया मन ल मिले, नहीं तौ हमन छत्तीसगढ़िया मन का बनी करत रहन का, नांगर ही जोतत रहन का, ये मोर बोलना हवै। ह मन ल ओमा प्राथमिकता काबर नहीं मिले, छत्तीसगढ़िया मन ल।
(गुलाब साहू बोल रहा हूँ, ग्राम झेरीझेरी से मेरा प्रश्न है शिक्षा के सुधार में क्या पहल की जा रही है सरकार के द्वारा।)
एंकर
– माननीय मुख्यमंत्री जी, आप इन दोनों का जवाब देंगे तो गौरेला मरवाही से अक्षत शर्मा, कबीरधाम से आनंद तिवारी और नागेन्द्र ठाकुर जैसे कई श्रोताओं को अपने सवालों का जवाब मिल जाएंगे।
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
– दोनों गुलाब भाई मन अऊ संगवारी मन।
– आपमन के सवाल बने वाजिब हे।
– छत्तीसगढ़ के हवा, छत्तीसगढ़ के पानी, छत्तीसगढ़ के कोयला, छत्तीसगढ़ के आयरन ओर, लाइम स्टोन, जम्मो संसाधन हमर अऊ ओखर लाभ हमर युवा संगीमन ल नई मिले तो ओखर बर हम जम्मो मन जिम्मेदार हन।
– स्थानीय लोगों को स्थानीय संसाधनों का फायदा मिले इसके लिए पं. जवाहरलाल नेहरू, पं. रविशंकर शुक्ल जैसे हमारे नेताओं ने भिलाई स्टील प्लांट बनाया था तो उसका लाभ बहुत बड़े क्षेत्र को मिला। शिक्षा, संस्कृति, स्वास्थ्य, रोजगार हर क्षेत्र में भिलाई आगे बढ़ा।
– ऐसा ही हम अब प्रदेश के हर अंचल में कराना चाहते हैं। इसलिए हमने एन.एम.डी.सी. को कहा है कि नगरनार इस्पात संयंत्र में भर्ती होने वाले कर्मचारियों की भर्ती परीक्षा दन्तेवाड़ा में हो।
– बस्तर, सरगुजा, बिलासपुर संभाग में जिला काडर बनाकर भर्ती की जाएगी।
– बस्तर, सरगुजा, बिलासपुर संभागों में कनिष्ठ कर्मचारी चयन बोर्ड के गठन का निर्णय लिया गया है।
– वनोपज तथा कृषि उपज का वैल्यू एडिशन अर्थात मूल्य संवर्धन राज्य में ही हो, इसके लिए आधा दर्जन से अधिक फूड पार्क स्थापित किए जा रहे हैं।
– राज्य के निवासियों को स्थानीय उद्योगों में रोजगार दिलाने के लिए हम हर संभव प्रयास कर रहे हैं। साथ ही यह इन्तजाम भी कर रहे हैं कि ऐसे नए उद्योगों के लिए कुशल मानव संसाधन राज्य में ही तैयार हों। कौशल उन्नयन के लिए हमारी दिशा बड़ी साफ रहेगी।
– नई औद्योगिक नीति में इस संबंध में और भी कड़े प्रावधान किये जायेंगे ताकि हमारे स्थानीय युवाओं को छत्तीसगढ़ में स्थापित होने वाले उद्योगों में बेहतर रोजगार के अवसर मिल सकें।
– उदाहरण के लिए छत्तीसगढ़ विद्युत उत्पादक राज्य है, लेकिन इसका लाभ बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर देने के रूप में नहीं मिला, इसलिए हम छत्तीसगढ़ को अधिक बिजली खपत वाला राज्य बनाना चाहते हैं,ताकि बिजली से रोजगार का सृजन भी बड़े पैमाने पर हो।
– प्रदेश में उद्योग और व्यापार को सरल बनाने के लिए अनेक निर्णय लिए हैं। ताकि बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर बढ़ें।
– हमने गुमाश्ता लायसेंस के हर साल नवीनीकरण का नियम समाप्त कर दिया है।
– मिनी स्टील प्लांट की बिजली दर में कमी की गई है।
– मुझे यह कहते हुए खुशी है कि हमारे प्रयासों का असर दिखने लगा है।
– एक स्वतंत्र संस्था ‘सी.एम.आई.ई.’ द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार हमारी सरकार के आने के बाद जनवरी से अप्रैल 2019 में प्रदेश में बेरोजगारी की दर में कमी आई है।
– जनवरी से अप्रैल 2018 के बीच छत्तीसगढ़ में ‘लेबर पार्टीसिपेशन रेट’ 42.83 प्रतिशत था। इस अवधि में शिक्षित बेरोजगारी की दर 16.18 प्रतिशत थी।
– जबकि हमारे समय अर्थात जनवरी से अप्रैल 2019 के बीच ‘लेबर पार्टीसिपेशन रेट’ बढ़कर 42.98 प्रतिशत हो गई तथा शिक्षित बेरोजगारी की दर घटकर 10.90 प्रतिशत आ गई।
– इसी प्रकार देश में ऑटोमोबाइल सेक्टर मंदी की कहानी कह रहा है, तब छत्तीसगढ़ में वाहनों की खरीदी बढ़ी है।
– हमारी सरकार के कार्यकाल में विगत वर्ष की तुलना में हर माह वाहनों की खरीदी बढ़ी है, जो अधिकतम मार्च 2019 में 36.75 प्रतिशत तक पहुंची।
– ये आंकड़े बताते हैं कि हमारी सरकार गांव से लेकर शहर तक, किसान से लेकर शिक्षित बेरोजगारों तक का जीवन बेहतर बनाने की दिशा में सही रास्ते पर चल रही है।
एंकर
– माननीय मुख्यमंत्री जी और शिक्षा की गुणवक्ता बढ़ाने को लेकर किए जा रहे प्रयासों के बारे में आप क्या कहना चाहेंगे?
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
– मैं बताना चाहता हूँ कि कक्षा पहली से आठवी तक के बच्चों के राज्य स्तरीय मूल्यांकन की एक नयी प्रणाली हमारी सरकार ने छŸाीसगढ़ में शुरू की है। जिसकी तारीफ राष्ट्रीय स्तर पर हुई है।
– इससे पास-फेल को लेकर जो समस्या है उसका हल निकलेगा।
– स्कूलों की सबसे बड़ी समस्या शिक्षकों की कमी थी। दो दशकों से अधिक समय से नियमित शिक्षकों की भर्ती नहीं हो रही थी। अस्थायी रूप से शिक्षकों की भर्ती अलग-अलग पद नामों से की जा रही थी जिसको लेकर विसंगतियां, असंतोष और आक्रोश था। हमने एक ठोस निर्णय लिया कि अब नियमित शिक्षकों की भर्ती की जायेगी। इस तरह शिक्षा व्यवस्था को सही संरचना, सही आयाम देने की दिशा में हमने बड़ा कदम उठाया है।
– फिलहाल 15 हजार शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया चल रही है।
– कुछ लोगों का सवाल है कि कला संकाय में शिक्षकों की भर्ती क्यों नहीं हुई ? तो इसका जवाब देना चाहता हूं।
– कला संकाय में पहले ही काफी शिक्षक हैं, रिक्त पद नहीं हैं, पद रिक्त होने पर इसके लिए भी भर्ती प्रक्रिया की जाएगी। इसको लेकर कोई संशय नहीं होना चाहिए।
– इसके अलावा भी नियमित शिक्षकों की भर्ती को लेकर बड़े निर्णय लिए जाने हैं।
– स्कूलों में बच्चों के सम्पूर्ण व्यक्तित्व का विकास हो, जो उन्हें सिर्फ किताबी ज्ञान न दें, बल्कि रोजगार और अपने जीवन के अहम फैसले लेने में भी सक्षम बनाये।
– प्रदेश में पहली बार ‘‘डिजि दुनिया’’ के नाम से एक कार्यक्रम शुरू किया गया है। जिसमें छत्तीसगढ़ की सभी 4 हजार 330 हाईस्कूलों तथा हायर सेकेण्डरी स्कूलों में ‘ई-क्लास रूम’ तथा ‘ई-लैब’ स्थापित किए जा रहे हैं, इस तरह हम स्कूल स्तर से नए जमाने की ‘आई.टी.’ आधारित पढ़ाई कराने की शुरूआत कर रहे हैं।
– ‘दीक्षा’ नाम से मोबाइल एप्प के माध्यम से सारी पाठ्यपुस्तकें ‘ई-सामग्री’ के रूप में उपलब्ध करायी जाएंगी।
– इतना ही नहीं राज्य की 6 बोलियों और भाषाओं में बिना इन्टरनेट के मोबाइल फोन पर पढ़ने की सुविधा भी दी जाएगी।
– हम ऐसे अनेक नए काम कर रहे हैं, जिससे स्कूली शिक्षा का स्तर सुधरेगा।
– कॉलेजों में भी शिक्षा का स्तर सुधारने में प्रमुख भूमिका सहायक प्राध्यापकों की होती है। इसके साथ हमने ग्रंथपाल, क्रीड़ा अधिकारी आदि पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की है।
– हर काम में कुछ प्रारंभिक तकलीफें आती हैं। इस काम में भी कुछ अदालती रोक लगी है जिसका समाधान किया जा रहा है।
– हमने प्रदेश में दो दर्जन नये कॉलेज खोलने की तैयारी कर ली है। जिसमें से 7 मॉडल डिग्री कॉलेज नक्सल प्रभावित तथा अत्यंत पिछड़े क्षेत्रों में खोले जा रहे हैं।
– मेरा मानना है कि अगर हमारे युवा साथी कुछ कर गुजरने की ठान लेते हैं और सही रास्ता अपनाते हैं तो आपको लक्ष्य पर पहुंचने से कोई रोक नहीं सकता।
– युवाओं की असीम ऊर्जा का उपयोग सिर्फ पढ़ाई-लिखाई तक सीमित नहीं है। आप लोगों के साहस और कौशल ने बड़े-बड़े मुकाम हासिल किये हैं। ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहां हमारे युवा साथी अपने पैरों के निशान नहीं छोड़ सकते।
– इसलिए हम युवाओं को सिर्फ नौकरी तक सीमित रखने की मानसिकता नहीं रखते, बल्कि यह चाहते हैं कि वे हर क्षेत्र में नाम कमायें। इसलिए इस प्रदेश में एक ऐसा ‘सपोर्ट सिस्टम’ बनाना चाहते हैं कि युवा अपना कौशल विकसित करें और अपना रास्ता खुद बना लें।
– राज्य में खेल प्राधिकरण गठित करने का विचार इसी तरह आया।
– हमने यह निर्णय ले लिया है और इसके तहत पूरे राज्य में खेल स्कूल, खेल अकादमी आदि संस्थाएं संचालित की जायेंगी।
– मुझे आज यह कहते हुए बेहद खुशी हो रही है कि छत्तीसगढ़ में ‘मुख्यमंत्री शहरी कार्यात्मक साक्षरता कार्यक्रम’ शुरू किया गया है। इसके अंतर्गत 27 जिलों में 36 केन्द्र बनाये गये हैं।
– 14 वर्ष से 60 वर्ष आयु तक के लोगों को इन केन्द्रों में ‘डिजिटल साक्षर’ बनाया जायेगा।
– आज के युग में कम्प्यूटर, मोबाइल एप्प आदि का चलन है। यदि हम लोगों को ‘डिजिटल साक्षर’ बना देंगे तो उनके व्यक्तित्व विकास, पालक की जिम्मेदारी का निर्वाह, वित्तीय-कानूनी आदि जानकारियां, कौशल विकास, आत्मरक्षा आदि से नागरिकों का सशक्तीकरण किया जा सकेगा।
– इस तरह स्कूल शिक्षा से लेकर 60 वर्ष के लोगों को ‘डिजिटल साक्षर’ बनाने तक बहुत बड़े क्षेत्र में हम काम कर रहे हैं। जो सिर्फ ज्ञान ही नहीं बल्कि चेतना के विस्तार में भी मददगार होगा।
– हम युवाओं की प्रतिभा, लगन, मेहनत, जुनून और कुछ नया कर गुजरने की चाह पर पूरा भरोसा करते हैं। इसलिए उद्यमिता का विकास और प्रोत्साहन हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
– हम युवाओं के भरोसे प्रदेश के आर्थिक-सामाजिक मोर्चाे पर विकास के बड़े अभियान छेड़ेंगे और मुझे विश्वास है कि बड़ी जीत हासिल करेंगे।
– प्रदेश की युवा शक्ति को मेरा सलाम। आप आगे बढ़िये हम आपके साथ चट्टान की तरह खड़े हैं।
– युवा साथियों के लिए युवा कवियों की लिखी चंद लाइनें बोलना चाहूंगा-
नहीं आग है इन हाथों में,
तुम खुद ही चिंगारी हो।
सबका भाग्य जगाने को,
संघर्ष तुम्हारा जारी हो।
—
जो छाई है इस अम्बर में,
सूरज की वो लाली तुम।
सबके चेहरों पर जो बनकर,
चमके वो खुशहाली तुम।
एंकर
– माननीय मुख्यमंत्री जी, आज आप प्रदेश के युवाओं से मुखातिब हुए, उनके सवालों के जवाब दिये। इससे हमारे युवा साथियों को निश्चित तौर पर बहुत से भ्रमों से बहुत से शंकाओं से बाहर निकलने का रास्ता मिला होगा।
– अंत में, आपने जो युवा शक्ति का आह्वान किया और युवाओं पर भरोसा जताने की बात कही, उससे हमारे युवा साथियों का मनोबल बहुत बढ़ेगा। वे अपनी पूरी ऊर्जा से काम कर पायेंगे और निश्चित तौर पर छत्तीसगढ़ का हर सपना पूरा करने और ‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़’ की मंजिल तक पहुंचने में जरूर हाथ बंटाएंगे
– अब लोकवाणी का आगामी प्रसारण 13 अक्टूबर 2019 को होगा। विषय होगा ’’स्वास्थ्य एवं मातृ शक्ति’’। इस विषय पर हमारे श्रोता अपने विचार 28, 29 एवं 30 सितम्बर के बीच रख सकेंगे। पहले की तरह ही आप फोन नम्बर 0771-2430501, 2430502, 2430503 पर दोपहर 3 से 4 बजे के बीच फोन करके अपने सवाल रिकार्ड करा सकते हैं।
