मेरा नाम आजम खान है, इसलिए मेरे ऊपर 144 मुकदमे!

बिजनौर. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के रामपुर (Rampur) में समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) सांसद आजम खान (MP Azam Khan) ने शनिवार शाम अपने ऊपर दर्ज मुकदमों पर बड़ा बयान दिया. बिजनौर के वीरा चैरिटेबल सोसाइटी के कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे सपा सांसद आजम खान ने कहा, 'मेरा नाम आजम खान है, इसलिए मेरे ऊपर 144 मुकदमे दर्ज है.' वहीं, महाराष्ट्र (Maharashtra) में सियासी उलटफेर पर तंज कसते हुए आजम ने कहा कि बीजेपी ने महाराष्ट्र में ज्यादा खिचड़ी पकाई है.
बता दें कि सपा सांसद आजम खान (MP Azam Khan) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. एक दिन पहले बेटे अब्दुल्ला (Abdullah) के जन्म प्रमाणपत्र मामले में आजम उनकी पत्नी और बेटे के खिलाफ रामपुर कोर्ट से गैर जमानती वारंट जारी हुआ था.
'क्योंकि मैं मुजरिम हूं'
इससे पहले सपा सांसद ने कहा, 'मैं जिंदा हूं…अभी तक जिंदा हूं…इसलिए कि मैं मुजरिम और अपराधी हूं.' चुनावी सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आपका वकील हूं और आपकी खुशियां चाहता हूं. सपा सांसद ने दावा करते हुए कहा कि इस लड़ाई से पीछे नहीं हट सकता और मैदान छोड़कर नहीं जा सकता.
80 से ज्यादा मुकदमों में बनाए गए हैं आरोपी
आपको बता दें कि रामपुर से सांसद आज़म खान पर 84 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हो चुके हैं. इसमें जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन से संबंधित 30 मुकदमे हैं. पुलिस के मुताबिक, आज़म खान के घर पर किसी के द्वारा नोटिस रिसीव नहीं किए जाने के बाद नोटिस भी चस्पा किया गया था.
कद्दावरों से लिया लोहा
आज़म खान अपने सियासी करियर में नामचीनों से लोहा लेने में कभी पीछे नहीं रहे. कांग्रेस ने जब रामपुर के नवाब खानदान के वारिसों को टिकट दिया तब भी खान ने बाज़ी मारी और बीते लोकसभा चुनाव में भाजपा ने जब सेलिब्रिटी और पूर्व सांसद जया प्रदा को चुनाव मैदान में उतारा तो खान ने 1 लाख से ज़्यादा वोटों से जीत दर्ज की. स्थानीय स्तर हो या प्रदेश स्तर, आज़म खान अपनी ताकत और रसूख साबित करने में कभी कतराए नहीं.
विवादों से चोली दामन का साथ
रैलियों और बयानों में निजी टिप्पणियां और अभद्र भाषा के इस्तेमाल के आरोप आज़म खान पर अक्सर लगते रहे. इसके अलावा भड़काने वाले या सांप्रदायिक बयानों को लेकर भी वो आलोचना के शिकार हुए. 'ताजमहल को वक्फ बोर्ड के सुपुर्द किया जाना चाहिए, बजाय आर्कियोलॉजिकल सर्वे जैसी संस्था को सौंपने के' या 'कारगिल की चोटियों को जीतने वाले फौजी मुस्लिम थे, न कि हिंदू', ऐसे कई बयानों के कारण खान समय समय पर फंसते हुए भी नज़र आए.
