शिवभोजन थाली योजना में सख्ती, केंद्रों पर CCTV जरूरी, पार्सल बंद

मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने गरीब, मजदूर, कामगार और जरूरतमंद लोगों को बेहद किफायती दरों पर भोजन उपलब्ध कराने वाली लोकप्रिय 'शिवभोजन थाली योजना' के सुचारू और पारदर्शी संचालन के लिए एक नई नियमावली जारी की है। सरकार ने पहले जारी किए गए सभी शासन निर्णयों और निर्देशों को एकजुट करते हुए इस नई नियमावली में संचालन, गुणवत्ता, अनुशासन और भुगतान से जुड़े नियमों को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है।

शिवभोजन केंद्रों पर सीसीटीवी लगाना अनिवार्य

नई व्यवस्था के तहत अब राज्य के प्रत्येक शिवभोजन केंद्र पर सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। कैमरों की फिटिंग इस प्रकार करनी होगी कि पूरे भोजन केंद्र की हर गतिविधि पर सीधी नजर रखी जा सके। केंद्र के आकार और संरचना के अनुसार एक या उससे अधिक कैमरे लगाए जा सकेंगे। इसके साथ ही, बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में सुचारू कामकाज के लिए वैकल्पिक व्यवस्था (पावर बैकअप) करना भी केंद्र संचालक के लिए जरूरी होगा।

संचालन का समय और थालियों की संख्या

नई नियमावली के मुताबिक, शिवभोजन केंद्र रोजाना सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक ही संचालित किए जाएंगे। इस निर्धारित समय के दौरान लाभार्थियों के लिए भोजन करने हेतु पर्याप्त और आरक्षित बैठने की व्यवस्था करना संचालक की जिम्मेदारी होगी।

  • प्रत्येक केंद्र पर एक साथ कम से कम 25 लोगों के बैठकर खाने की व्यवस्था होनी चाहिए।

  • हर केंद्र पर प्रतिदिन न्यूनतम 75 और अधिकतम 200 थालियां ही उपलब्ध कराई जाएंगी।

  • योजना के तहत लाभार्थी को एक थाली के लिए केवल 10 रुपये ही चुकाने होंगे।

शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अनुदान राशि

सरकार ने शिवभोजन थाली का वास्तविक मूल्य शहरी क्षेत्रों में 50 रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों में 35 रुपये तय किया है। इसमें से लाभार्थी से सिर्फ 10 रुपये लिए जाएंगे, जबकि शेष अंतर की राशि सरकार द्वारा सीधे अनुदान के रूप में केंद्र संचालक को दी जाएगी:

  • शहरी क्षेत्र: सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति थाली का अनुदान।

  • ग्रामीण क्षेत्र: सरकार द्वारा 25 रुपये प्रति थाली का अनुदान।

पार्सल और बाहर से खाना लाने पर रोक

नई गाइडलाइन्स के तहत शिवभोजन केंद्रों पर पार्सल या 'टेक-अवे' की सुविधा पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। न तो केंद्र के अंदर बाहर का खाना लाया जा सकेगा और न ही केंद्र का भोजन पैक करके बाहर ले जाने की अनुमति होगी। इसके अलावा, किसी भी सरकारी कर्मचारी या संबंधित प्रतिष्ठान के स्टाफ को इस रियायती योजना के तहत भोजन देने पर भी पाबंदी रहेगी।

गुणवत्ता और उचित स्थानों का चयन

बासी या खराब खाना परोसे जाने से रोकने के लिए कड़े निर्देश दिए गए हैं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) समय-समय पर भोजन की गुणवत्ता की जांच करेगा और विभाग से मिलने वाले गुणवत्ता प्रमाण पत्र को भोजनालय में प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा। साथ ही, केंद्र खोलने के लिए उन स्थानों को प्राथमिकता देने को कहा गया है जहां गरीबों और मजदूरों की आवाजाही सबसे अधिक होती है; जैसे- जिला अस्पताल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, बाजार और सरकारी कार्यालयों के आसपास के इलाके।

वर्ष 2020 में हुई थी शुरुआत

गौरतलब है कि महाराष्ट्र सरकार ने समाज के गरीब और जरूरतमंद तबके को भरपेट भोजन देने के उद्देश्य से 1 जनवरी 2020 के शासन निर्णय के तहत इस योजना की रूपरेखा तैयार की थी और इसका औपचारिक शुभारंभ 26 जनवरी 2020 को किया गया था। समय के साथ इसमें सुधार और पारदर्शिता लाने के लिए अब इन सभी प्रावधानों को एकीकृत करते हुए यह नई नियमावली लागू की गई है।

 

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