कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर, समय पर वेतन देगी पंजाब सरकार

वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी की किस्त जारी करने में देरी के बावजूद पंजाब के मुलाजिमों और पेंशनरों पर इसका असर नहीं होने दिया जाएगा और सभी को समय पर वेतन मिल जाएगा। उन्होंने कहा कि करीब 2000 करोड़ रुपये वेतन-भत्तों के लिए खर्च होते हैं और सरकार मौजूदा हालात में भी कर्मचारियों को समय पर वेतन का भुगतान करेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र से पैसा मिलने में हो रही देरी का असर विकास कार्यों और कई पेंडिंग अदायगियों पर पड़ रहा है।
गौरतलब कि केंद्र सरकार ने तीन माह से जीएसटी मुआवजे के 4100 करोड़ रुपये पंजाब को नहीं दिए हैं। इसके चलते, भारी भरकम कर्ज में डूबी पंजाब सरकार के लिए गंभीर संकट खड़ा हो गया है। सरकारी खजाने में पैसा न होने कारण करीब 5000 करोड़ रुपये के बिल फंस गए हैं जबकि सरकार को पहले लिए हुए कर्जों पर ब्याज के एवज में करीब 7000 करोड़ रुपये चुकाने की मजबूरी भी है।
वित्त मंत्री ने कहा कि फिलहाल उनका पहला लक्ष्य वेतन, पेंशन और कर्ज पर ब्याज की अदायगी है, जिसे समय पर पूरा किया जा रहा है। एक दिसंबर को वेतन जारी कर दिया जाएगा। विभिन्न मदों से होने वाली राजस्व प्राप्तियों में देरी बारे पूछे गए सवाल पर वित्त मंत्री ने कहा कि देश में मंदी के इस दौर में केवल पंजाब ही नहीं केंद्र सरकार की प्राप्तियों में भी कमी आई है।
केंद्र का एफआरबीएम जोकि तीन फीसदी रहता है, अब चार फीसदी हो गया है। इसके बावजूद राजस्व उगाही में पंजाब राष्ट्रीय औसत के लिहाज से काफी अच्छी स्थिति में है। पंजाब का जीएसटी कलेक्शन भी अन्य राज्यों के औसत चार फीसदी के मुकाबले 10 फीसदी है। मुख्य समस्या यह है कि जिन राज्यों का आधारभूत कर ढांचा जीएसटी में समाहित हो गया है, उन राज्यों को हो रहे नुकसान की भरपाई केंद्र सरकार को ही करनी है।
केंद्र छाप सकता है नोट, पंजाब नहीं
मनप्रीत बादल ने कहा कि 4100 करोड़ की रकम थोड़ी नहीं होती। पंजाब में हर महीने वेतन पर 2000 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। इस तरह केंद्र सरकार पंजाबियों का दो महीने का वेतन दबाए बैठी है। उन्होंने कहा कि केंद्र के पास सारी ताकतें हैं। वह नोट छाप सकती है। बाजार से कर्ज उठा सकती है, लेकिन पंजाब के लिए तो कर्ज लेने की भी सीमा तय है। फिलहाल पंजाब अपनी हैसियत के हिसाब के काम चला रहा है लेकिन इससे विकास कार्यों पर असर पड़ रहा है।
वेतन, पेंशन और ब्याज देने में खर्च हो रही सारी कमाई
पंजाब सरकार जीएसटी के मुआवजे के लिए जहां केंद्र सरकार पर लगातार दबाव बना रही है, वहीं अपने संसाधनों से उसे जो आय हो रही, उसका अधिकांश हिस्सा वेतन, पेंशन और प्रदेश के सिर चढ़े कर्ज का ब्याज चुकाने में खर्च हो रहा है। राज्य में विकास कार्य ठप होकर रह गए हैं, जिसका स्पष्ट संकेत वित्त विभाग के अक्तूबर के फिस्कल इंडीकेटर से मिला है। विकास कार्यों पर सरकार का खर्च मात्र 4.88 फीसदी रह गया है। वहीं, राजस्व घाटा 6199.76 करोड़ और वित्तीय घाटा 7605.25 करोड़ पर पहुंच गया है।
अक्तूबर के दौरान राज्य सरकार की राजस्व व पूंजीगत प्राप्तियों में, अगस्त-सितंबर के मुकाबले कुछ सुधार तो हुआ है लेकिन यह इतना नहीं है कि सरकार अपने बलबूते प्रदेश का पूरा खर्च चला सके। फिस्कल इंडीकेटर के अनुसार, अक्तूबर में कुल राजस्व प्राप्ति 38.60 फीसदी रही, जिसमें जीएसटी का योगदान 41.78 फीसदी, सेल टैक्स का 49.22 फीसदी और एक्साइज ड्यूटी का 43.98 फीसदी रहा है।
गैर-कर राजस्व में भी सुधार हुआ है और अगस्त (11.95 फीसदी) के मुकाबले अक्तूबर में यह उगाही 16.63 फीसदी दर्ज की गई है। लेकिन कर्जों की रिकवरी मात्र 2.66 फीसदी रह गई है जबकि बाजार से उठाए कर्ज का आंकड़ा 7605.26 करोड़ पर पहुंच गया है। दूसरी ओर, राज्य सरकार का खर्च आमदनी से ज्यादा हो रहा है।
अक्तूबर में 30307.63 करोड़ की राजस्व व पूंजीगत प्राप्तियों के मुकाबले राजस्व व पूंजीगत खर्च 36507.39 करोड़ (40.48 फीसदी) रहा। इसमें भी खास बात यह रही कि ज्यादातर पैसा वेतन, पेंशन और कर्ज पर ब्याज देने में चला गया। वेतन पर 52.35 फीसदी, पेंशन पर 49.90 फीसदी और ब्याज पर 42.19 फीसदी पैसा खर्च हुआ। इसके चलते, राज्य सरकार 2989.72 करोड़ की सब्सिडी अदायगी में एक भी पैसा नहीं डाल सकी।
