बसों पर कार्रवाई से ऑपरेटर नाराज

भोपाल ।सीधी में यात्रियों से भरी बस के नहर में गिरने की दर्दनाक घटना में 54 यात्रियों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद सरकार ने बसों की जांच का अभियान शुरू किया है। इसको लेकर बस ऑपरेटरों ने मोर्चा खोल दिया है। बस ऑपरेटरों ने सरकार की कार्रवाई पर ही सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए है। बस संचालकों का कहना है कि सीधी बस हादसे में प्रशासन की गलती छुपाने के लिए बस ऑपरेटरों को निशाना बनाया जा रहा है। बस संचालकों ने कहा कि कार्रवाई के विरोध में और तीन साल से किराया वृद्धि नहीं होने को लेकर भोपाल समेत आसपास के संभाग में 26 और 27 फरवरी को बस नहीं चलाएंगे।
मंगलवार को राजधानी के विशाल शादी हॉल में बस संचालकों की बैठक हुई। बैठक में भोपाल, सागर, होशंगाबाद, बेतूल, इंदौर के बस संचालक उपस्थित थे। इसमें तेजेंदर सिंह, चरण जीत गुलाटी, मोहम्मद अख्तर, धर्मेंद्र उपाध्याय, अनीस खान, दीपेश विजयवर्गीय, गोपाल पैगवार, मुन्ने भाई, राजा कुरैशी, सलमान खान, अनूप सिंह गिल आदि उपस्थित थे। बस सचालकों ने प्रशासन की चालानी कार्रवाई का विरोध किया। उन्होंने कहा कि सरकार बस व्यवसाय में हो रहे नुकसान की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही है।
-सीधी हादसे का प्रशासन जिम्मेदार
बस संचालकों का कहना है कि सीधी बस हादसा पूरी तरह सतना और सीधी के जिला प्रशासन और पुलिस की अनदेखी का नतीजा था। यदि सतना में परीक्षा थी तो जिला कलेक्टर को मालूम होना चाहिए था कि इस मार्ग पर कितनी बस संचालित है। और आसपास के जिलों का एकमात्र सेंटर सतना है। इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी। दूसरा कारण यह था कि सीधी में एक सड़क बहुत खराब थी। इसके बाद भी वहां पुलिस की कोई व्यवस्था नहीं थी। जो ट्रैफिक को नियंत्रित कर सके।
-3 साल से किराया वृद्धि
संचालकों ने कहा कि पिछले 6 महीने में तीन बार मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री और परिवहन विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन दिए। जिसमें बताया गया कि डीजल की कीमत में लगातार वृद्धि हो रही है, लेकिन सरकार 3 साल से किराया वृद्धि नहीं कर रही है। जबकि डीजल की कीमत बढऩे के साथ ही सभी ऑटो पाट्र्स टायर के अलावा अन्य खर्चे भी बढ़ जाते है। बस संचालकों ने कहा कि जब डीजल 60 रुपए प्रति लीटर था तब से किराया वृद्धि नहीं की गई है। अब डीजल 90 रुपए प्रति लीटर से अधिक हो गया है। ऐसे में बस संचालन बेहद घाटे का व्यवसाय हो गया है।
-किसी मार्ग पर फ्रीक्वेंसी तय नहीं
संचालकों ने कहा कि सरकार 10 साल में किसी भी मार्ग पर फ्रीक्वेंसी तय नहीं कर पाई है। आरटीओ असफर दो-दो मिनट के अंतराल पर लोगों को परमिट जारी कर रहे है। इससे प्रतिस्पर्धा बहुत बड़ी है, लेकिन सरकार इस तरफ ध्यान नहीं दे रही है। बस स्टैंड पर अराजक तत्व बस संचालकों से वसूली करते हैं। किसी भी बस स्टैंड पर समय पर पहुंचना और दो गाड़ी के बीच कम अंतराल होने के कारण स्पर्धा होना दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण है। लेकिन सरकार राजस्व और भ्रष्टाचार दोनों के कारण परमिट पर रोक नहीं लगा रही है।
-यात्रियों की सुरक्षा की तरफ नहीं ध्यान
बस संचालकों का कहना है कि अधिकारियों को यात्रियों की सुरक्षा की तरफ ध्यान नहीं है। चार्टर्ड और सूत्र बसों में डबल गेट नहीं है। इमरजेंसी गेट भी नहीं है। चार्टर्ड बस जो कि एयर कंडीशन है यदि वह पलटती है तो उसमें तुरंत आग लग सकती है। ऐसी घटना बेंगलुरु और हैदराबाद में हो चुकी हैं। लेकिन सरकार और बड़े अफसर इन बड़े बस संचालकों पर कार्रवाई करने से बच रहे हैं जबकि सरकार या अफसरों के पास इसकी कोई गारंटी नहीं है कि चार्टर्ड बस या सूत्र बस सेवा की बस दुर्घटनाग्रस्त नहीं होगी या उसमें यदि कोई अनहोनी होती है तो यात्री कैसे बाहर निकलेगा। यह परिवहन विभाग और पुलिस दोनों की तरफ से बड़ी अनदेखी है, लेकिन इन पूंजी पतियों पर कार्रवाई करने के बजाय जिन बस संचालकों के पास एक या दो बसें हैं उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

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