अच्छी फिल्में बनाने का बढ़ रहा दबाव, अब भोजपुरी के द्विअर्थी संवादों पर स्वत: लग जाएगा ब्रेक: निरहुआ

मुंबई । भोजपुरी फिल्मों में द्विअर्थी संवाद भविष्य में नहीं सुनाई देंगे। भोजपुरी फिल्मों के सुप्रसिद्ध अभिनेता दिनेश लाल यादव निरहुआ ने कहा कि आने वाले दिनों में भोजपुरी सिनेमा के द्विअर्थी संवाद स्वत: बंद हो जाएंगे। पहले फिल्में थियेटर के ऑडियन्स के लिए बनती थीं, जिनमें रसीले गाने डालकर उसे हिट कराने का प्रयास किया जाता था, लेकिन अब फिल्में ओटीटी और सैटेलाइट के लिए बन रही हैं। सैटेलाइट में जब तक यूए सर्टिफिकेट नहीं होगा, तब तक फिल्म नहीं चलेगी। इस दबाव ने भोजपुरी में बदलाव का दबाव बनाया है। इस कारण अब अच्छी फिल्में बनानी पड़ेगी और द्विअर्थी संवादों से परहेज करना पड़ेगा। भोजपुरी फिल्मों को फैमली सिनेमा बनाने के सवाल पर निरहुआ ने कहा कि इसकी शुरूआत हो चुकी है, क्योंकि टेलीविजन पर जो फिल्में आती हैं, उसे परिवार के लोग एक साथ बैठकर देखते हैं। इसलिए अब इसे ध्यान में रखकर नई फिल्में बन रही हैं।
सेंसरशिप के सवाल पर दिनेश लाल ने कहा कि यह तो होना ही चाहिए और है भी, लेकिन एलबम पर अभी नहीं है, उस पर भी सेंसर लगाना चाहिए। कुछ गानों को सुनकर लोगों को लगता है कि यह तो भोजपुरी सिनेमा है, लेकिन वास्तव में वह एलबम होता है। इसमें लोग कुछ भी गाते हैं, कुछ भी बनाते हैं इस पर सेंसर होना अनिवार्य है। बॉलीवुड की तर्ज पर भोजपुरी के कलाकरों के लिए ट्रेनिंग संस्थान को लेकर निरहुआ ने कहा कि उप्र की योगी सरकार ने अभी भोजपुरी और अवधी के लिए एकेडमी बनाने का प्रस्ताव पारित किया है। लखनऊ या बनारस में यह बनने जा रहा है। लखनऊ में भारतेन्दु नाट्य आकादमी के बच्चे भी भोजपुरी सिनेमा में आ रहे हैं। यह पूछने पर कि भोजपुरी को दिशा देने वाले गायक, जो भाषा और गायन को समृद्ध करते थे, वे धीरे-धीरे अब गायब हो रहे हैं, क्या इसके लिए कोई दबाव है-निरहुआ ने कहा जब अच्छी फिल्में बनेगीं तो अच्छे गाने भी अपने आप आएंगे।
