वर्षो पुरानी परंपरा का निर्वाहन धधकते अंगारों पर चले श्रद्धालु

वर्षो पुरानी परंपरा का निर्वाहन
धधकते अंगारों पर चले श्रद्धालु
पेटलावद। धुलेंडी के दिन शाम को ग्रामीण क्षेत्र में प्रतिवर्ष होने वाले चूल के आयोजन में श्रद्धालु अपने हाथों में कलश-नारियल लेकर धधकते अंगारों पर नंगे पैर चले और अपनी मन्नत पूरी की। क्षेत्र के करवड़, टेमरिया, जामली आदि स्थानों पर यह अनोखा आयोजन बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। सबसे पहले जमीन पर लगभग 12 फिट लम्बा ओर 2 फिट गहरा गड्डा खोदा जाता है, इसके बाद लकड़ियां डालकर उसमे आग लगाई जाती है, अंगारे होने के बाद एक – एक कर मनन्तधारी धधकते अंगारों पर चलकर निकलते है। आग ठंडी ना हो इसके लिए उसमे बार-बार घी डाला जाता है। आग की लपटों ओर अंगारों पर निकलने के बाद भी श्रद्धालुओं को न तो पेर में छाले होते है और ना ही अन्य तरह की कोई परेशानी होती है। अंगारों पर श्रद्धालु ऐसे निकलते है जैसे सामान्य चल रहे हो। इस दौरान महिलाएं भी चूल में निकली। पुरुष अपने बच्चो को भी कंधों पर बैठाकर आस्था और विश्वास के साथ चूल से निकले। इस दौरान उनके चेहरे पर न तो किसी प्रकार का डर दिखाई दिया और न ही कोई चिंता। चूल के इस आयोजन में बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए, ओर महिलाओ मंगल गीत गाये। यह परंपरा वर्षो से चली आ रही है, जिसका निर्वाहन आज भी किया जा रहा है। मनन्तधारीयो के अनुसार गांव को आपदा से दूर रखने और परिवार पर कोई संकट विप्पति या अन्य तरह की मन्नत पूरी होने पर अंगारों पर चलते है। इस अनूठे आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीणजन पहुचे। 
